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Vikas dubey: बिना नक्शा व सील इमारतों में निर्माण का ठेका लेता था विकास, मन मुताबिक सौदा कराने में था माहिर

Mon, 13 Jul 2020 05:23 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 13 Jul 2020 05:23 PM IST
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विकास दुबे फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
दहशतगर्द विकास दुबे पर सिर्फ नेता और पुलिस वाले ही मेहरबान नहीं थे। केडीए ने भी खूब दरियादिली दिखाई। बताते हैं कि केडीए के कुछ अफसर और बाबू विकास और उसकी काली कमाई संभालने वाले जय बाजपेई समेत अन्य लोगों के इशारों पर काम करते थे। इन्हीं के बल पर विकास और उसके गुर्गे शहर में बगैर नक्शे और सील इमारतों में चोरी छिपे निर्माण करवाने का ठेका तक ले लेते थे।
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पुलिस ने विकास दुबे के गैंग का खात्मा कर दिया है - फोटो : Amar Ujala
कई इमारतों में केडीए अफसरों की नाक के नीचे निर्माण हुए, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई। केडीए के तमाम खाली प्लाटों पर विकास का कब्जा रहा। तीन साल पहले एक केडीए वीसी ने कल्याणपुर क्षेत्र में ध्वस्तीकरण अभियान चलाकर एक जमीन को कब्जा मुक्त कराया था। वह जमीन विकास दुबे की शह पर कब्जाई गई थी। केडीए के अन्य अफसर वर्षों इसे नजरंदाज करते रहे थे। 



 
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विकास दुबे फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाल ा
मन मुताबिक सौदा कराने में था माहिर
जमीन हथियाने और उसका मनमुताबिक सौदा कराने में विकास बहुत माहिर था। केडीए में उसने ऐसा जाल बिछा रखा था कि हर जगह उसकी तूती बोलती। बताते हैं कि विकास के इशारे पर नीलामी वाले प्लाटों में बोलियां तक नहीं लगती थीं और उनका आवंटन कर दिया जाता था। कई नीलामी तो सिर्फ कागजों में हुईं। यह खेल कोई एक दो साल नहीं बल्कि लंबे समय से चलता आ रहा था। नीलामी वाले अधिकतर भवन और प्लाट उसी के हिस्से आते थे, जिसे विकास या उसके गुर्गे चाहते थे। इस खेल को कैसे अंजाम दिया जाता था, यह एसआईटी की जांच में सामने आ सकता है। 

 
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विकास दुबे फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
चीफ इंजीनियर तक थे मेहरबान 
सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि केडीए के एक चीफ इंजीनियर विकास के एक गुर्गे को खुद ही सलाह देते थे कि निवेश कैसे करना है। ये वही चीफ इंजीनियर हैं जिन्होंने सपा नेता महताब आलम को दो अतिरिक्त मंजिल बनाने की मंजूरी दी थी और वह भवन भरभराकर गिर गया था। इसमें दबकर कई मजदूरों की जान गई थी। इसके अलावा विकास दुबे का केडीए के कई बाबुओं पर भी सिक्का चलता था। कब कौन सी जमीन नीलाम होनी है? कौन से प्लाट की किस्तें जमा नहीं हो रहीं? कहां-कहां, कितने प्लाट खाली हैं? कौन सा बिल्डर संकट में फंसा है। इन सब बातों की जानकारी विकास एंड कंपनी तक पहुंचती थी। विकास इन्हीं सूचनाओं के आधार पर अपनी गोटें बिछाता था और जमीनों का सौदा तय करवाता था। 

 
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विकास दुबे फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
फर्जी रजिस्ट्री का हुआ था खुलासा
करीब तीन साल पहले केडीए में फर्जी रजिस्ट्री कांड का खुलासा हुआ था। बताया जाता है कि पनकी क्षेत्र में कई बड़े प्लाटों की रजिस्ट्री फर्जी तरीके से कर दी गई थी। करोड़ों की जमीनें कौड़ियों के भाव बेची गई थीं। इनमें से कई जमीनों की फाइलें केडीए से गायब मिलीं। इसमें कई बाबू फंसे थे। बाद में यह जांच भी दबा दी गई। बताते हैं कि जांच को अंजाम तक न पहुंचाने के पीछे विकास का भय था। 

 
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