{"_id":"5f0c23c4dd0aee5ad17c19c1","slug":"kanpur-encounter-villagers-of-bikru-narrated-the-story-of-vikas-dubey-s-crime-to-sit","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"कानपुर एनकाउंटर: जांच को बिकरू पहुंची एसआईटी तो गांव वाले बोले, जउन विकास पंडित काहत, गांव मां वही होत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानपुर एनकाउंटर: जांच को बिकरू पहुंची एसआईटी तो गांव वाले बोले, जउन विकास पंडित काहत, गांव मां वही होत
Mon, 13 Jul 2020 04:50 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 13 Jul 2020 04:50 PM IST
विज्ञापन
kanpur encounter SIT
- फोटो : अमर उजाला
बिकरू के अलावा आसपास के गांवों में भी विकास की दहशत थी। जमीन खरीदें या गाड़ी। विकास को रंगदारी पहुंचानी होती थी। जमीनों पर कब्जे, धमकी, मारपीट से ग्रामीण तंग आ गए थे। चुनाव में विकास अपने प्रत्याशियों को ग्रामीणों से जबरन वोट डलवाता था। रविवार को जब एसआईटी ने गांव पहुंच ग्रामीणों खासकर पीड़ितों से बातचीत की तो इसका खुलासा हुआ। इसके बाद एसआईटी ने चंद्रिका गांव के एक दर्जन से अधिक ग्रामीणों के बयान सर्किट हाउस में बुलाकर दर्ज किये।
kanpur encounter SIT
- फोटो : अमर उजाला
एसआईटी के अधिकारियों ने गांव के बुजुर्ग वीरेंद्र दुबे से विकास दुबे, उसकी जिला पंचायत सदस्य पत्नी रिचा दुबे, उसके भाई की ग्राम प्रधान बहू अंजलि दुबे के बारे में पूछा तो एक बुजुर्ग ने बताया कि पंडित (विकास दुबे) अपने मन का मालिक था, वह तो कम सताता था, लेकिन उसके गुर्गे लोगों को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे। जउन विकास पंडित काहत, गांव मां वही होत। गांव के यूनुस ने बताया कि विकास पंडित के सामने बोलन की हिम्मत काहु की नहीं रही।
kanpur encounter SIT
- फोटो : अमर उजाला
कभी राशन नहीं दिया
विकास जिसको चाहता था, उसी को राशन मिलता था। अधिकतर राशन उसके गुर्गे बेच डालते थे या खुद गुर्गे राशन आदि ले जाते थे। गांव निवासी वीरेंद्र दुबे ने बताया कि उनकी विकास से बनती नहीं थी। इसलिए उसने उनको कभी राशन दिया ही नहीं। इसके अलावा तमाम ऐसे लोग हैं जो विकास की इस करतूत से परेशान थे।
विकास जिसको चाहता था, उसी को राशन मिलता था। अधिकतर राशन उसके गुर्गे बेच डालते थे या खुद गुर्गे राशन आदि ले जाते थे। गांव निवासी वीरेंद्र दुबे ने बताया कि उनकी विकास से बनती नहीं थी। इसलिए उसने उनको कभी राशन दिया ही नहीं। इसके अलावा तमाम ऐसे लोग हैं जो विकास की इस करतूत से परेशान थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
kanpur encounter SIT
- फोटो : अमर उजाला
घर किसको मिलेगा, विकास तय करता
एसआईटी को बयान दर्ज कराने के दौरान राकेश पांडे ने बताया कि उनके पास पक्का घर नहीं है। उन्होंने काॅलोनी के लिए आवेदन किया था। चूंकि बहुत पहले विकास से किसी बात पर खटक गई थी तो विकास ने उसको आज तक कालोनी लेने नहीं दी। वो और उनका परिवार कच्चे मकान में रहने को मजबूर है। विकास जिसे चाहता था उसे मकान देता था। राकेश पांडे ने बताया कि प्रधानी जीतने के बाद आज तक अंजलि दुबे कभी गांव आईं नहीं। पंडित जी जो चाहत ते करत ते।
एसआईटी को बयान दर्ज कराने के दौरान राकेश पांडे ने बताया कि उनके पास पक्का घर नहीं है। उन्होंने काॅलोनी के लिए आवेदन किया था। चूंकि बहुत पहले विकास से किसी बात पर खटक गई थी तो विकास ने उसको आज तक कालोनी लेने नहीं दी। वो और उनका परिवार कच्चे मकान में रहने को मजबूर है। विकास जिसे चाहता था उसे मकान देता था। राकेश पांडे ने बताया कि प्रधानी जीतने के बाद आज तक अंजलि दुबे कभी गांव आईं नहीं। पंडित जी जो चाहत ते करत ते।
विज्ञापन
बिकरू गांव में जांच करने पहुंची एसआईटी की टीम
- फोटो : अमर उजाला
रंगदारी नहीं दी तो कब्जा कर ली जमीन
गांव निवासी मुस्तकीम और अब्दुल हमीद ने बताया कि उनकी तीन व दो बीघा जमीन विकास ने बदमाशी के बल पर कब्जा कर ली थी। जब विरोध किया तो पीटा और जान से मारने की धमकी दी। आज तक जमीन वापस नहीं मिली। ये सिर्फ इसलिए कि उसने कई लाख रुपये की मांग की थी पर दोनों ने नहीं दिये थे।
गांव निवासी मुस्तकीम और अब्दुल हमीद ने बताया कि उनकी तीन व दो बीघा जमीन विकास ने बदमाशी के बल पर कब्जा कर ली थी। जब विरोध किया तो पीटा और जान से मारने की धमकी दी। आज तक जमीन वापस नहीं मिली। ये सिर्फ इसलिए कि उसने कई लाख रुपये की मांग की थी पर दोनों ने नहीं दिये थे।