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Vikas Dubey Case: बिकरू कांड का मध्य प्रदेश कनेक्शन, अपराधी और खादी की सांठगांठ, विकास दुबे ने कबूली थी ये बात
Wed, 03 Mar 2021 11:29 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 03 Mar 2021 11:29 AM IST
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विकास दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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बिकरू कांड का मध्य प्रदेश कनेक्शन शुरू से रहा है। विकास दुबे का सार्वजनिक रूप से सरेंडर भी मध्यप्रदेश के उज्जैन में हुआ। तब एक बात यह भी सामने आई थी कि वहीं एक शराब कारोबारी के यहां विकास ने पनाह ली थी। एक बड़े नेता के इशारे पर उसने सरेंडर किया।
विकास दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
अब असलहों की खरीदफरोख्त में भी एमपी कनेक्शन सामने आया है, जिसमें बसपा नेता शामिल है। विकास दुबे की हर राजनीतिक दल में अच्छी पैठ थी। 2017 में जब एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार किया था, तब उसने ये बात खुलेआम कबूली थी।
विकास दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
बिकरू कांड के बाद नौ जुलाई की सुबह उज्जैन में जब उसने सरेंडर किया तब एक सत्ताधारी नेता द्वारा मदद करने की बात सामने आई थी। सूत्रों के मुताबिक विकास को उम्मीद थी कि अगर वो एमपी में सरेंडर करेगा तो एनकाउंटर नहीं होगा। इसके बाद अमर दुबे समेत अन्य बदमाशों ने भी मध्य प्रदेश भागने का प्रयास किया था।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
गिरोह बनाने की थी तैयारी
एसटीएफ के मुताबिक आठ माह तक जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पकड़े गए सभी आरोपी निश्चिंत हो गए थे। उनको लग रहा था कि अब कोई कार्रवाई नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक ये सभी गिरोह बनाने की तैयारी में थे। असलहों की तस्करी के साथ वारदातों को भी अंजाम देते।
एसटीएफ के मुताबिक आठ माह तक जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पकड़े गए सभी आरोपी निश्चिंत हो गए थे। उनको लग रहा था कि अब कोई कार्रवाई नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक ये सभी गिरोह बनाने की तैयारी में थे। असलहों की तस्करी के साथ वारदातों को भी अंजाम देते।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
कहीं डकैतों को तो नहीं कर रहे थे सप्लाई
जिस तरह के असलहों की डिमांड सत्यवीर सिंह की तरफ से की जा रही थी और जो असलहे खरीदे गए, उससे ये साफ है कि उसका इस्तेमाल कहीं बड़ी घटना में करने की तैयारी थी। आशंका ये भी है कि कहीं डकैतों को तो ये असलहे सप्लाई तो नहीं कर रहे थे।
जिस तरह के असलहों की डिमांड सत्यवीर सिंह की तरफ से की जा रही थी और जो असलहे खरीदे गए, उससे ये साफ है कि उसका इस्तेमाल कहीं बड़ी घटना में करने की तैयारी थी। आशंका ये भी है कि कहीं डकैतों को तो ये असलहे सप्लाई तो नहीं कर रहे थे।