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झांसी दोहरा हत्याकांड: आंखों के सामने पोती के कत्ल से कांपी रूह, सिरफिरे ने उजाड़ दीं खुशियां
Wed, 24 Feb 2021 11:42 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 24 Feb 2021 11:42 PM IST
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झांसी हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
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हम अपनी पोती कृतिका के साथ घर के बाहर कुर्सी पर बैठे थे, कृतिका के पिता घर के भीतर थे और उसकी मां खाना बना रही थी। तभी कृतिका का सहपाठी मंथन सेंगर आया, कृतिका उसको देखकर कुर्सी से उठी वैसे ही मंथन तेजी से आगे बढ़ा और कृतिका की गर्दन से पिस्टल सटाकर गोली मार दी। रोते-बिलखते ये बातें कृतिका की दादी संतोष ने बताईं।
झांसी हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि कृतिका झांसी में एमए हिस्ट्री की पढ़ाई कर रही थी। उसकी ख्वाहिश थी कि वो सेना में अफसर या आईपीएस अफसर बने। इसलिए उसने एनसीसी भी की थी। एनसीसी में ही मंथन भी था। यहीं पर दोनों की दोस्ती हुई थी। लेकिन, क्या पता था कि वही दोस्त उसकी जिंदगी ले लेगा।
झांसी हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
मुझे भी गोली मारने को तान दी थी पिस्टल
कृतिका के पिता सुजीत त्रिवेदी ने बताया कि जैसे ही गोली चलने की आवाज सुनाई दी, वो और उनकी पत्नी घर के बाहर आए तो देखा कि कृतिका जमीन पर खून से लथपथ पड़ी है। सुजीत ने मंथन का पीछा करके दबोच लिया। उसने सुजीत पर भी पिस्टल तान दी थी। मगर तभी पड़ोसी आ गए और मंथन को दबोच लिया गया।
कृतिका के पिता सुजीत त्रिवेदी ने बताया कि जैसे ही गोली चलने की आवाज सुनाई दी, वो और उनकी पत्नी घर के बाहर आए तो देखा कि कृतिका जमीन पर खून से लथपथ पड़ी है। सुजीत ने मंथन का पीछा करके दबोच लिया। उसने सुजीत पर भी पिस्टल तान दी थी। मगर तभी पड़ोसी आ गए और मंथन को दबोच लिया गया।
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मृतका की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
नेशनल बॉक्सर थी कृतिका
बहन काव्या ने बताया कि कृतिका पढ़ाई में होनहार थी। खेल में भी सबसे आगे रहती थी। वो नेशनल बॉक्सर थी। स्टेट लेवल पर वो पदक भी जीत चुकी थी। सात फरवरी को उसने लखनऊ में सीडीएस का एग्जाम दिया था। तभी वो कानपुर आकर एक दिन अपने फ्लैट पर रुकी थी।
बहन काव्या ने बताया कि कृतिका पढ़ाई में होनहार थी। खेल में भी सबसे आगे रहती थी। वो नेशनल बॉक्सर थी। स्टेट लेवल पर वो पदक भी जीत चुकी थी। सात फरवरी को उसने लखनऊ में सीडीएस का एग्जाम दिया था। तभी वो कानपुर आकर एक दिन अपने फ्लैट पर रुकी थी।
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झांसी हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस का रहा सहयोग, कॉलेज प्रशासन ने बरती लापरवाही
मंथन दिनदहाड़े बुंदेलखंड महाविद्यालय में पिस्टल लेकर जाता है। साथी छात्र की हत्या कर आराम से वहां से निकल जाता है। उसके बाद कृतिका को मौत के घाट उतारता है। इस पूरे घटनाक्रम में एक बात तो साफ है कि अगर कॉलेज की वारदात के बाद ही तुरंत वो पकड़ा जाता तो कम से कम कृतिका की जान बच जाती। सुजीत का कहना है कि कॉलेज में अगर कोई इस तरह से असलहा लेकर आता है तो सीधे तौर पर कॉलेज प्रशासन की लापरवाही है। उन्होंने बताया कि झांसी पुलिस का पूरा सहयोग रहा। एसएसपी दिनेश कुमार पी ने हर संभव मदद की। आरोपी को सख्त सजा मिलेगी, यही उम्मीद है।
मंथन दिनदहाड़े बुंदेलखंड महाविद्यालय में पिस्टल लेकर जाता है। साथी छात्र की हत्या कर आराम से वहां से निकल जाता है। उसके बाद कृतिका को मौत के घाट उतारता है। इस पूरे घटनाक्रम में एक बात तो साफ है कि अगर कॉलेज की वारदात के बाद ही तुरंत वो पकड़ा जाता तो कम से कम कृतिका की जान बच जाती। सुजीत का कहना है कि कॉलेज में अगर कोई इस तरह से असलहा लेकर आता है तो सीधे तौर पर कॉलेज प्रशासन की लापरवाही है। उन्होंने बताया कि झांसी पुलिस का पूरा सहयोग रहा। एसएसपी दिनेश कुमार पी ने हर संभव मदद की। आरोपी को सख्त सजा मिलेगी, यही उम्मीद है।