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अयोध्या के संतों की दावेदारी क्यों कमजोर?: राम मंदिर ट्रस्ट में अब और संत नहीं, अभी हैं इतने सदस्य; समीकरण

Sun, 30 Aug 2026 10:55 AM IST
Sharukh Khan अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Sharukh Khan Updated Sun, 30 Aug 2026 10:55 AM IST
सार

राम मंदिर ट्रस्ट में अब और संत नहीं होंगे। अभी छह सदस्य हैं। धार्मिक समिति से भी नौ संत जुड़े हैं। दो सिंतबर को ट्रस्ट की बैठक होगी। ट्रस्ट की बैठक पर निगाहें टिकी हैं।

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No more seers to be added to the Ram Mandir Trust there are currently six members
ram mandir - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संभावित पुनर्गठन को लेकर अयोध्या के संत समाज में चर्चाएं तेज हैं। यह भी चर्चा है कि ट्रस्ट में अयोध्या के किसी एक नए संत को भी जगह मिल सकती है। हालांकि, मौजूदा समीकरणों को देखते हुए ट्रस्ट में अयोध्या के किसी नए संत को शामिल किए जाने की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है। 
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ट्रस्ट में पहले से ही संत समाज का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है और धार्मिक मामलों के लिए गठित धार्मिक समिति में भी अयोध्या समेत संत परंपरा से जुड़े नौ संतों की भूमिका है।  ट्रस्ट की मौजूदा संरचना पर नजर डालें तो छह संत पहले से ही ट्रस्ट के सदस्य हैं। 
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इसके अलावा धार्मिक समिति में नौ संतों की मौजूदगी है। यानी निर्णय लेने वाली मुख्य संस्था और धार्मिक मामलों की समिति दोनों स्तरों पर संत समाज को पर्याप्त प्रतिनिधित्व हासिल है।
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यही स्थिति ट्रस्ट में किसी नए संत की नियुक्ति की संभावनाओं को सीमित करती है। ट्रस्ट में आगामी बदलावों को लेकर जो सबसे महत्वपूर्ण संभावना सामने आ रही है, वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के एक-एक पदाधिकारी को प्रतिनिधित्व दिए जाने की है।

 

ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय व डॉ. अनिल मिश्र के स्थान पर इनका चयन किया जाएगा। चंपत राय की जगह विहिप के किसी पदाधिकारी व डॉ. अनिल मिश्र की जगह संघ के किसी पदाधिकारी को शामिल किए जाना लगभग तय है। अब दो सिंतबर को होने वाली तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर निगाहें टिकी हैं।

अयोध्या के संतों की दावेदारी क्यों कमजोर 
अयोध्या के कई संत लंबे समय से ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व की मांग अथवा संभावना को लेकर चर्चा में रहे हैं, लेकिन मौजूदा संरचना में छह संतों की मौजूदगी और धार्मिक समिति में नौ संतों के शामिल होने के कारण नए संत को शामिल करने के लिए स्थान और आवश्यकता दोनों का सवाल खड़ा होता है। राम मंदिर के एक ट्रस्टी का भी यही मानना है कि ट्रस्ट में संत पहले से पर्याप्त हैं। ऐसे में प्राथमिकता संगठनात्मक प्रतिनिधित्व को मिलने की संभावना अधिक है।

राम मंदिर ट्रस्ट का वर्तमान स्वरूप
महंत नृत्यगोपाल दास-अध्यक्ष, डॉ. कृष्ण मोहन-अंतरिम महासचिव, गोविंददेव गिरि-कोषाध्यक्ष, महंत दिनेंद्र दास-सदस्य, नृपेंद्र मिश्र-सदस्य, जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती-सदस्य, जगद्गुरु विश्वप्रसन्न तीर्थ-सदस्य, युगपुरुष परमानंद सदस्य, केशव परासरण-सदस्य, डीएम अयोध्या-पदेन सदस्य, केंद्रीय गृह सचिव-पदेन सदस्य, राज्य गृह सचिव-पदेन सदस्य। धार्मिक समिति गोविंददेव गिरि, महंत कमलनयन दास, महंत डॉ. रामानंद दास, महंत दिनेंद्र दास, अधिकारी राजकुमार दास, महंत मिथिलेश नंदिनी शरण, वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु विश्वप्रसन्न तीर्थ, युगपुरुष परमानंद।

चढ़ावा चोरी में नहीं दाखिल हुई आपत्ति
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में दर्ज रिपोर्ट की विवेचना अदालत की निगरानी में कराए जाने के लिए अधिवक्ता संघ के मानीटरिंग प्रार्थना पत्र पर विवेचक ने शनिवार को भी आपत्ति दाखिल नहीं की। वहीं अधिवक्ता संघ की ओर से भी पैरवी करने के लिए कोर्ट में कोई मौजूद नहीं रहा। विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट रजत वर्मा ने विवेचक को आपत्ति प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
 
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