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हर ओर बप्पा का शोर, पंडाल-पंडाल विराजे गणपति, ये पूजन विधि दूर करेगी दरिद्रता

Mon, 02 Sep 2019 06:49 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 02 Sep 2019 06:49 PM IST
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ganesh chaturthi 2019 special story auspicious time and method of worship
गणेश चतुर्थी 2019 - फोटो : अमर उजाला
ढोल, नगाड़ों, अबीर, गुलाल के साथ आज घरों और पंडालों में गणपति बप्पा विराजमान हो गए हैं। कहीं पर एक दिन तो कहीं 10 दिनों तक पार्वती नंदन की सेवा विधि-विधान से की जाएगी। गणेश चतुर्थी शुरू होने के साथ ही कानपुर का माहौल भी गणेसमय हो गया है।
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गणेश चतुर्थी 2019 - फोटो : अमर उजाला
ढोल-ताशों के साथ गणपति बप्पा के जयघोष के साथ लोग प्रतिमाओं को ले जाते रहे। मान्यता है कि भगवान गणेश का जन्म उत्तम भाद्र्रपद मास केशुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था। इसी के मद्देनजर घरों और पंडालों में एक दिन से लेकर 10 दिनों तक गजानन की प्रतिमाएं स्थापित कर अंत में विसर्जन किया जाता है।
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गणेश चतुर्थी 2019 - फोटो : अमर उजाला
कानपुर में बिठूर स्थित प्राचीन श्रीसिद्धविनायक गणेश मंदिर के आचार्य बलवंतभाऊ शास्त्री पटवर्धन कहते हैं कि इस बार गणपति का मयूरेश्वर अवतार हुआ है। सफेद दूर्बा चढ़ाने से विशेष फल मिलता है। 10 मोदक गणेश मंदिर में चढ़ाने या ब्राह्मण को दान करने से विद्यार्थियों को सफलता, संतान प्राप्ति, संतान सुख, दांपत्य जीवन अच्छा रहता है। केवड़ा जल, केवड़ा इत्र या केवड़ा का फूल चढ़ाने से घर की दरिद्रता दूर होती है।
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गणेश चतुर्थी 2019 - फोटो : अमर उजाला
गणेश भगवान की पूजा वैसे तो अनेक रूपों में की जाती है। हरिद्र रूप में स्थापना सबसे सरल और सर्वाधिक लाभदायी है। गणपति भगवान को मोदक प्रिय हैं। पूजन के समय मोदक का भोग अवश्य लगाएं। अगर संभव न हो सके तो फिर मोतीचूर के लड्डुओं का भोग लगाएं। गणेशजी को दूर्बा भी बहुत पसंद है। 

गजानन के 12 रूप
वक्रतुण्ड, एकदंत, कृष्णपिंगाक्ष, गजवक्त्र, लंबोदर, विकट, विघ्नराजेंद्र, धूम्रवर्ण, भालचंद्र, विनायक, गणपति व गजानन। 
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गणेश चतुर्थी 2019 - फोटो : अमर उजाला
कानपुर में जगह-जगह गणपति पंडाल सजाए गए हैं। नवाबगंज में नव युवक गणेश मंडल की ओर से चतुर्थ श्री गणेश महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव आयोजकों में शुभम सविता, राहुल त्रिपाठी, देवांश अवस्थी, विनय सविता, संजय सैनी मौजूद हैं। बताया कि स्थापना व आरती के साथ शुरू हुआ महोत्सव 11 सितम्बर को विसर्जन व 12 को विशाल भंडारे के साथ समाप्त होगा। 
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