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मंदाकिनी नदी का विकराल रूप: खतरे के निशान से 4.5 मीटर ऊपर, फिर डूबा रामघाट; दुकानें-मकान, आश्रम और होटल जलमग्न

Wed, 02 Sep 2026 03:06 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, चित्रकूट
अमर उजाला नेटवर्क, चित्रकूट Published by: Sharukh Khan Updated Wed, 02 Sep 2026 03:06 PM IST
सार

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का विकराल रूप देखने को मिल रहा है। नदी खतरे के निशान से 4.5 मीटर ऊपर बह रही है। रामघाट, कामतानाथ, जानकीकुंड जाने वाली सड़कों पर नावें चलने लगीं। घाट किनारे बनीं दुकानें, मकान, आश्रम और होटल जलमग्न हो गए।

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MP News Mandakini River Flood Water Rises 4.5 Metres Above Danger Mark, Ramghat Submerged
मंदाकिनी नदी का विकराल रूप - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मध्य प्रदेश व पहाड़ी क्षेत्र में हुई तेज बारिश के बाद मंदाकिनी नदी ने एक बार फिर विकराल रूप दिखाया है। मंगलवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान 126.50 मीटर को पार कर करीब साढ़े चार मीटर ऊपर पहुंच गया। इससे रामघाट क्षेत्र फिर पानी में डूब गया। घाट किनारे बनीं दुकानें, मकान, आश्रम और होटल जलमग्न हो गए। रामघाट से कामतानाथ, आरोग्यधाम और जानकीकुंड जाने वाली सड़कों पर भी पानी भर गया, वहां नावें चलानी पड़ीं।
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मंगलवार भोर चार बजे तक जलस्तर 126.40 मीटर था, जो खतरे के निशान से महज 10 सेंटीमीटर नीचे था। इसके बाद मध्यप्रदेश व चित्रकूट क्षेत्र में रातभर हुई तेज बारिश से जलस्तर तेजी से बढ़ा और कुछ ही घंटों में हालात बिगड़ गए। रामघाट में बाढ़ का पानी दोबारा भरने से दुकानों फिर डूब गईं। जिससे दुकानदारों की मुश्किलें फिर बढ़ गईं।
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एक दिन पहले की गई साफ-सफाई भी पानी में बह गई। घरों और दुकानों में पानी भरने के बाद लोग ऊपरी मंजिलों पर चले गए। होटलों व आश्रमों में ठहरे लोगों को भी परेशानी हुई। सड़कें डूबने से बाहर निकलना मुश्किल हो गया।
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भरत मंदिर में 15 लोग फंसे, मदद का इंतजार
रामघाट स्थित भरत मंदिर में पुजारी समेत करीब 15 लोग पानी के बीच फंसे हैं। पुजारी श्यामजी पांडेय ने बताया कि मंदिर के सभी कमरे डूब गए हैं और राशन भी खराब हो गया है। अब तक मदद के लिए कोई नहीं पहुंचा है। वहीं डीएम पुलकित गर्ग ने बताया कि तेज बारिश के कारण मंदाकिनी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है।

लोगों को बाहर निकलने के लिए लाउडस्पीकर से अनाउंस किया गया था। काफी लोगों को रैन बसेरों में रुकने व खाने-पीने के इंतजाम किए गए हैं। अगर किसी भी मंदिर में कोई पुजारी व अन्य लोग रुके हैं तो उनको भी निकाला जाएगा।
 

कानपुर और आसपास के जिलों में 4 लोगों की मौत
लगातार हो रही बारिश के कारण पिछले चौबीस घंटों के दौरान कानपुर और आसपास के जिलों में घर गिरने की घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गई। कई अन्य लोग घायल है। कानपुर के महाराजपुर में मंगलवार सुबह कच्चा मकान गिरने से मलबे में दबकर शकुंतला विश्वकर्मा (56) की मौत हो गई।

हरदोई के बेनीगंज क्षेत्र में सोमवार रात कच्ची दीवार गिरने से मलबे में दबकर हरिपाल (72) की मौत हो गई। वहीं लोनार में कच्ची कोठरी ढहने से दंपती समेत चार लोग घायल हो गए। बांदा के मरका क्षेत्र में सोमवार को कच्चे मकान की दीवार गिरने से हिमांशु (7) की मौत हो गई। कानपुर देहात के शिवली में मंगलवार सुबह कच्चा घर ढहने से सात माह की मासूम शानवी की मौत हो गई जबकि बुजुर्ग दंपती समेत चार लोग घायल हो गए। 
 

भरत मंदिर में 15 लोग फंसे
रामघाट स्थित भरत मंदिर में पुजारी समेत करीब 15 लोग पानी के बीच फंसे हैं। पुजारी श्यामजी ने बताया कि मंदिर के सभी कमरे डूब गए हैं और राशन भी खराब हो गया है। अब तक मदद के लिए कोई नहीं पहुंचा है।
 

29 अगस्त को आई बाढ़ अब तक की सबसे बड़ी थी। बाढ़ से करीब 563 घरों के क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट आई है। टीमें नुकसान का आकलन कर रही हैं। मंगलवार सुबह फिर आई बाढ़ ने रामघाट, तराँहा सहित कई गांवों को प्रभावित किया है। अब तक 700 से अधिक राशन किट बांटी जा चुकी हैं। पुलकित गर्ग, डीएम, चित्रकूट
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