{"_id":"61c7ecd04f2da84fe71d9cef","slug":"big-question-where-did-181-crores-come-from-and-where-did-they-want-to-go-officers-who-came-to-put-raid-lost-their-senses","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Tax Raid: रेड डालने आए अधिकारियों के खजाना देख उड़े होश, बोले- नोटबंदी के बाद इतनी रकम कहां से आई?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Tax Raid: रेड डालने आए अधिकारियों के खजाना देख उड़े होश, बोले- नोटबंदी के बाद इतनी रकम कहां से आई?
Sun, 26 Dec 2021 04:06 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 26 Dec 2021 04:06 PM IST
विज्ञापन
Tax raid: पीयूष जैन के पास मिला काले धन का भंडार
- फोटो : amar ujala
कानपुर के इत्र कारोबारी पीयूष जैन के ठिकानों से 181 करोड़ रुपये की नकदी मिलने के बाद जांच अधिकारी भी हैरत में हैं। एक साथ इतनी बड़ी रकम मिलने से जांच एजेंसियों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। विभागीय अफसरों का कहना है कि पीयूष का कारोबार इतना बड़ा नहीं है कि नवंबर 2016 में नोटबंदी और बीच में करीब डेढ़ साल के कोरोना काल के बाद वह इतनी बड़ी रकम जुटा ले। ऐसे में नकदी किसकी है, कहां से आई और कहां खपाई जानी थी? जैसे तमाम सवालों के जवाब तलाशने की चुनौती महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) समेत अन्य जांच एजेंसियों के सामने हैं। आशंका है कि यह रकम चुनाव में खपाने के लिए इत्र कारोबारी के यहां इकट्ठा की गई थी। सूत्रों का कहना है कि आनंदपुरी में मिले नोटों को काफी संजोकर रखा गया था। गड्डी को पहले कागज और फिर पन्नी और बाद में टेप लगाकर सुरक्षित किया गया था, ताकि नोटों को लंबे समय तक आसानी से रखा जा सके।
Tax raid: पीयूष जैन
- फोटो : amar ujala
इत्र कारोबारियों का कारोबार कानपुर और कन्नौज में है। इनकी बहुत बड़ी फैक्टरी या इकाई नहीं है, जिससे इतना बड़ा टर्नओवर हो। ऐसे में हवाला का कारोबार लंबे समय से संचालित होने की संभावना जताई जा रही है। इस बात की आशंका ज्यादा है कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हवाला के जरिये मोटी रकम इत्र कारोबारी के ठिकानों पर जुटाई गई, जिसे यहां से अलग-अलग शहरों में भेजने की योजना रही हो।
piyush jain income tax raid
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, खुलासा होता जाएगा। आयकर विभाग की जांच शुरू होने पर आय के स्रोतों, संपत्तियों आदि की जानकारी सामने आने की उम्मीद है। डीजीजीआई ने शिखर पान मसाला, ट्रांसपोर्टर प्रवीण जैन और इत्र कारोबारी के यहां एक साथ छापा मारा था। ऐसे में शिखर पान मसाला कंपनी के मालिक प्रदीप अग्रवाल, ट्रांसपोर्टर और कारोबारी के अलग-अलग मिलने वालों का रुपया होने के एंगल पर भी जांच की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
piyush jain income tax raid
- फोटो : अमर उजाला
घर में तहखाना, पुरातत्व विभाग की टीम करेगी जांच
इत्र कारोबारी के यहां जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है। नए-नए खुलासे हो रहे हैं। जांच में पता चला है कि इत्र कारोबारी के कन्नौज स्थित मकान में तहखाना है। इसमें बोरियों में रुपये भरकर रखे गए हैं। इसके अलावा मकान की दीवारों में नोटों की गड्डी और गहने छिपाए गए हैं। वहीं पूरे मकान की दीवारों में जगह-जगह नोट या गहने होने की आशंका के चलते डीजीजीआई की टीम ने लखनऊ के पुरातत्व विभाग के अफसरों से संपर्क किया है। रविवार को पुरातत्व विभाग की टीम उपकरणों के माध्यम से नोट, गहने आदि का पता लगाएगी।
इत्र कारोबारी के यहां जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है। नए-नए खुलासे हो रहे हैं। जांच में पता चला है कि इत्र कारोबारी के कन्नौज स्थित मकान में तहखाना है। इसमें बोरियों में रुपये भरकर रखे गए हैं। इसके अलावा मकान की दीवारों में नोटों की गड्डी और गहने छिपाए गए हैं। वहीं पूरे मकान की दीवारों में जगह-जगह नोट या गहने होने की आशंका के चलते डीजीजीआई की टीम ने लखनऊ के पुरातत्व विभाग के अफसरों से संपर्क किया है। रविवार को पुरातत्व विभाग की टीम उपकरणों के माध्यम से नोट, गहने आदि का पता लगाएगी।
विज्ञापन
piyush jain income tax raid
- फोटो : अमर उजाला
पहले नई कारों से होती थी कर चोरी
सूत्रों के अनुसार इत्र पर 18 फीसदी जीएसटी है। कन्नौज इसका बड़ा हब है। जीएसटी लगने के बाद कर चोरी के लिए कारोबारी नई-नई कारों का इस्तेमाल करते थे। इत्र आदि के डिब्बों या बक्सों को आसानी से सेडान लग्जरी कारों में छिपाया जा सकता है। पहले नई कारों का नंबर भी देर से मिलता था। इत्र कारोबारी इसका लाभ उठाते थे। नई-नई कारें खरीदकर और रुपयों की हेराफेरी में उनका इस्तेमाल कर बेच देते थे। एक चक्कर में ही 10 लाख का इत्र इधर से उधर हो जाता था।
सूत्रों के अनुसार इत्र पर 18 फीसदी जीएसटी है। कन्नौज इसका बड़ा हब है। जीएसटी लगने के बाद कर चोरी के लिए कारोबारी नई-नई कारों का इस्तेमाल करते थे। इत्र आदि के डिब्बों या बक्सों को आसानी से सेडान लग्जरी कारों में छिपाया जा सकता है। पहले नई कारों का नंबर भी देर से मिलता था। इत्र कारोबारी इसका लाभ उठाते थे। नई-नई कारें खरीदकर और रुपयों की हेराफेरी में उनका इस्तेमाल कर बेच देते थे। एक चक्कर में ही 10 लाख का इत्र इधर से उधर हो जाता था।