बिजनौर के अमानगढ़ रेंज में जहां पर्यटन की तैयारी चल रही है, वहीं वन विभाग ने एक नया रास्ता बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। वन संरक्षक मुरादाबाद और एसडीओ बिजनौर ने नए रास्ते पर पर्यटन की संभावनाएं तलाशीं।
खूबसूरत नजारा: अमानगढ़ में वन अफसरों ने तैयार किया ऐसा रास्ता, जल-जंगल और वन्य जीवों का संगम भरेगा रोमांच
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इस निरीक्षण के दौरान अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के लगभग सभी मार्ग देखे गए। दिन और रात के समय पर्यटन की संभावनाएं देखने के लिए पैदल गश्त भी की गई। वन विभाग की टीम अमानगढ़ कक्ष संख्या 8, 10 व 13 फक्कड़ चौराहा, कोठीरो नदी, लालढांग नदी, जसपुर कक्ष संख्या 50 अ व 50 ब, झिरना गेट, कंडी रोड, झूलोखत्ता चौकी, नबीगढ़ ढेरी, एंटी पोचिंग कैंप, फीका बैराज, कोठीरो कक्ष संख्या एक अ व एक ब आदि क्षेत्र भी देखे। वहां पर पर्यटन शुरू होने के बाद क्या-क्या कार्य कराए जाएंगे, उनकी सूची भी तैयार की गई।
नए रास्ते पर तीन से चार घंटे घूम सकेंगे पर्यटक
वन विभाग की टीम झिरना गेट से पर्यटकों को घुमाने की योजना बना रही थी, लेकिन कार्बेट पार्क प्रशासन कोर एरिया होने के चलते इस पर राजी नहीं था। ऐसे में वन विभाग ने फक्कड़ चौराहे से दायीं ओर गए रास्ते को तैयार करने की योजना बनाई है। यह रास्ता बरसाती नदियों से होता हुआ गेस्ट हाउस के पास से होकर निकल रहे रास्ते पर मिल जाएगा।
एसडीओ ज्ञान सिंह ने बताया कि इस रास्ते पर घना जंगल है, रास्ते में बरसाती नदी, बड़ा मैदान और कुछ दूरी पर पहाड़ों का नजारा देखने को मिलेगा। नदी और खाली घास के मैदान में वन्य जीवों के दिखने की संभावना भी है। अकेले इस रास्ते पर पर्यटन तीन से चार घंटे तक घूम सकते हैं।
अजगर, हाथी और चीतल दिखे
वन विभाग की टीम को नए रास्ते पर निरीक्षण के दौरान कई वन्य जीव दिखे। इस पर हाथी, चीतल तो बड़ी संख्या में दिखे ही, साथ ही रास्ते में अजगर भी दिखा। नदी के पास भरे पानी से निकलकर बाहर आए कुछ कछुए भी टीम को दिखाई दिए। बताया जा रहा है कि बाघ और गुलदार भी इसके आसपास होने के संकेत मिले हैं। पूरे अमानगढ़ की बात करें तो 20 से ज्यादा बाघ, 100 हाथी के साथ भालू, चीतल, लंगूर आदि भी मौजूद हैं।
अमानगढ़ में ईको टूरिज्म होना है। जिस रास्ते पर पर्यटन का विचार चल रहा है, वह पहले से ही बना हुआ है, केवल उसे घूमने लायक बनाना है। मंथन के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा - ज्ञान सिंह, एसडीओ, वन विभाग