पैरेंटल कंट्रोल: न चैट दिखेगी, न कॉल; फिर भी बच्चों के व्हाट्सएप पर कैसे रहेगी माता-पिता की नजर? समझें प्रोसेस

जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति शुक्ला
Tue, 06 Oct 2026 11:22 AM IST
सार

व्हाट्सएप ने किशोरों की डिजिटल सुरक्षा और उनकी गोपनीयता के बीच संतुलन बनाते हुए नया पैरेंटल कंट्रोल डैशबोर्ड पेश किया है। इससे पैरेंट्स प्रोफाइल फोटो और मेटा एआई की निगरानी तो कर सकेंगे, लेकिन चैट नहीं पढ़ पाएंगे, तो मैसेज पढ़े बिना बच्चे ऑनलाइन खतरों से सुरक्षित कैसे रहेंगे? आइए जानते हैं इस नए तरीके के बारे में विस्तार से...

WhatsApp’s New Safety Move, Kids’ Chats Stay Private, Parents Still Get Key Alerts
व्हाट्सएप का पैरेंटल कंट्रोल फीचर - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन आने के साथ उनकी ऑनलाइन सुरक्षा माता-पिता के लिए बड़ी चिंता बन गई है। वहीं, बच्चों की हर निजी बातचीत पर नजर रखना उनकी प्राइवेसी को भी प्रभावित कर सकता है। इसी बीच व्हाट्सएप ने ऐसा तरीका पेश किया है, जिसमें दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। माता-पिता बच्चों के व्हाट्सएप अकाउंट से जुड़ी कुछ अहम सेटिंग्स को नियंत्रित कर सकेंगे और कुछ गतिविधियों पर अलर्ट भी पा सकेंगे, लेकिन बच्चों के मैसेज और कॉल उनके लिए निजी ही रहेंगे।

    बच्चों की सुरक्षा बढ़ेगी, लेकिन चैट नहीं पढ़ पाएंगे माता-पिता

    इसमें बच्चों की सुरक्षा और निजिता दोनों का ध्यान रखा गया है। किशोरों को ऑनलाइन जोखिमों से बचाने के लिए तकनीकी कंपनियों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। इसी बीच व्हाट्सएप ने अपने प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा नया सिस्टम पेश किया है।

    इसके तहत माता-पिता अपने किशोर बच्चों के व्हाट्सएप अकाउंट से अपना अकाउंट लिंक कर सकेंगे। इसके बाद उन्हें अपने फोन पर एक खास डैशबोर्ड मिलेगा। यहां से वे बच्चों के व्हाट्सएप की कुछ जरूरी सेटिंग्स को नियंत्रित कर पाएंगे।

    हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि माता-पिता बच्चों की पूरी व्हाट्सएप बातचीत देख सकेंगे। बच्चा किस व्यक्ति से बात कर रहा है, उसे क्या मैसेज भेज रहा है या उसे कौन-सा मैसेज मिला है, इसकी जानकारी माता-पिता को नहीं मिलेगी।

    ग्रुप में जोड़ने की कोशिश पर मिलेगा अलर्ट

    नए सिस्टम में माता-पिता को बच्चों के व्हाट्सएप इस्तेमाल से जुड़ी कुछ बाहरी गतिविधियों की जानकारी मिल सकेगी। अगर कोई अंजान नंबर बच्चे को किसी व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ने की कोशिश करता है, तो माता-पिता के फोन पर नोटिफिकेशन यानी अलर्ट आ जाएगा। इससे उन्हें पता चल सकेगा कि बच्चे को किसी नए ग्रुप में जोड़ने का प्रयास हुआ है।

    इसी तरह, अगर बच्चा किसी नए पब्लिक चैनल को फॉलो करता है, तो इसकी जानकारी भी माता-पिता को मिल सकेगी। यानी माता-पिता बच्चों की निजी बातचीत में सीधे दखल दिए बिना यह समझ पाएंगे कि उनके व्हाट्सएप इस्तेमाल में कौन-सी बाहरी गतिविधियां हो रही हैं।

    मेटा एआई को लेकर भी मिलेगा नियंत्रण

    इसी के अलावा व्हाट्सएप में मेटा एआई के इस्तेमाल को लेकर भी यह व्यवस्था अहम है। आजकल बच्चे एआई बॉट्स से कई तरह के सवाल पूछते हैं और अलग-अलग विषयों पर बातचीत करते हैं।

    नए नियमों के तहत माता-पिता यह तय कर सकेंगे कि उनका बच्चा मेटा एआई से किस तरह के विषयों पर बातचीत कर सकता है। इसका उद्देश्य बच्चों को ऐसे कंटेंट से दूर रखना है, जो उनकी उम्र के लिहाज से अनुचित हो सकता है। इस तरह एआई का इस्तेमाल पूरी तरह रोकने के बजाय माता-पिता उसके इस्तेमाल की कुछ सीमाएं तय कर सकेंगे।

    बच्चों की प्रोफाइल फोटो और दूसरी सेटिंग्स पर भी नियंत्रण

    इस व्यवस्था के तहत माता-पिता बच्चों के व्हाट्सएप की कुछ दूसरी अहम सेटिंग्स को भी नियंत्रित कर सकेंगे। इनमें प्रोफाइल फोटो और ग्रुप से जुड़ी सेटिंग्स शामिल हैं। इसके लिए बच्चे का व्हाट्सएप अकाउंट माता-पिता के अकाउंट से लिंक किया जाएगा। इसके बाद माता-पिता अपने फोन पर उपलब्ध डैशबोर्ड के जरिए जरूरी बदलाव कर सकेंगे।

    व्हाट्सएप का जोर इस बात पर है कि यह व्यवस्था बच्चों की हर गतिविधि पर निगरानी रखने के लिए नहीं, बल्कि उनके डिजिटल इस्तेमाल को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए है।

    चैट और कॉल निजी रखना क्यों जरूरी है?

    कंपनी के अनुसार, मैसेज और कॉल को निजी रखना उसके सिस्टम की सुरक्षा का अहम हिस्सा है। व्हाट्सएप का कहना है कि मैसेज और कॉल की गोपनीयता को तकनीकी और कानूनी वजहों से बनाए रखना जरूरी है।

    अगर माता-पिता को बच्चों की चैट पढ़ने की अनुमति दी जाती, तो व्हाट्सएप को अपनी मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव करना पड़ता। इससे बच्चों के निजी डेटा की सुरक्षा कमजोर हो सकती थी और हैकर्स के लिए उस डेटा तक पहुंचने का खतरा बढ़ सकता था। यही वजह है कि नए सिस्टम में चैट और कॉल को निगरानी से बाहर रखा गया है।

    हर चैट पढ़े जाने का डर बच्चों को कर सकता है और असुरक्षित

    बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सिर्फ तकनीक का मामला नहीं है। इसमें उनके व्यवहार और परिवार के साथ उनके भरोसे पर भी निर्भर करता है। बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, अगर बच्चों को लगातार यह महसूस हो कि माता-पिता उनकी हर चैट पढ़ रहे हैं, तो वे अपनी बातचीत छिपाने के लिए दूसरे, कम सुरक्षित या गुप्त ऐप्स का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं।

    ऐसे में पूरी बातचीत पर नजर रखने के बजाय उन गतिविधियों पर ध्यान देना ज्यादा संतुलित तरीका माना जा सकता है, जिनसे बच्चों के ऑनलाइन जोखिम का अंदाजा लगाया जा सके।

    व्हाट्सएप का नया तरीका इसी सोच पर आधारित है। इसमें बच्चों की निजी बातचीत को निजी रखते हुए ग्रुप, चैनल और Meta AI जैसी बाहरी गतिविधियों पर माता-पिता को सीमित जानकारी और नियंत्रण दिया जाता है।

    व्हाट्सएप का मकसद सिर्फ निगरानी नहीं

    कंपनी के मुताबिक, इन सुविधाओं का उद्देश्य माता-पिता को बच्चों की निजी बातचीत का कंट्रोल देना नहीं है। इसका मकसद परिवारों के बीच बच्चों के सुरक्षित डिजिटल इस्तेमाल को लेकर बातचीत को बढ़ावा देना है। यानी अगर किसी बच्चे को किसी अनजान ग्रुप में जोड़ने की कोशिश होती है, वह कोई नया पब्लिक चैनल फॉलो करता है या मेटा एआई के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा की जरूरत है, तो माता-पिता उस स्थिति पर बच्चे से बात कर सकते हैं।

    इस तरह व्हाट्सएप बच्चों की प्राइवेसी को बनाए रखते हुए माता-पिता को उनकी डिजिटल सुरक्षा को लेकर जरूरी जानकारी देने की कोशिश कर रहा है।

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