बदायूं में हुए बवाल को लेकर नई जानकारी सामने आई है। करीब आठ दिन पहले बनी प्रतिमा को स्थापित करने के लिए ग्रामीणों के बीच घुसे शरारती तत्वों ने पहले से सुनियोजित तैयारी कर ली थी। इसकी जानकारी खुफिया तंत्र को भी नहीं लगी।
पुलिस की अब तक की जांच पड़ताल में ये सामने आया है कि प्रतिमा स्थापित करने को लेकर विरोध व कार्रवाई झेलने के लिहाज से महिलाओं को आगे किया गया। मंगलवार को वायरल हुए कई वीडियो से यह बात साबित हो रही है। सड़क पर जाम लगाने व प्रदर्शन करने में महिलाएं ही आगे दिखीं। इस दौरान खुफिया अमले को रणनीति की भनक भी नहीं लग सकी जिसकी वजह से घटना बड़ी हो गई।
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क्षतिग्रस्त पुलिस की गाड़ी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रामीणों के अनुसार प्रतिमा लगाने के लिए आठ दिन पहले चंदा एकत्र किया गया था। रकम इकट्ठी होने के बाद घटना से दो दिन पहले गांव में प्रतिमा गुपचुप तरीके से लाई गई थी। चर्चा है कि प्रतिमा रामपुर के शाहबाद से लाई गई थी। इसके बाद सोमवार रात करीब डेढ़ बजे प्रतिमा सरकारी भूमि पर ले जाकर रखी गई।
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क्षतिग्रस्त पुलिस की गाड़ी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक वीडियो में महिलाएं सड़क घेरकर खड़े होकर एसडीएम प्रियंका गोयल से बात करती दिखीं। इस दौरान उनके तेवर तीखे थे। दोपहर में बारिश होने पर भी महिलाएं अपने इरादे से नहीं हटीं। यहां तक भूख-प्यास भी उनके इरादों के आड़े आते नहीं दिखी।
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एसडीएम से बात करतीं महिलाएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुबह से शाम तक महिलाएं पुरुषों के बराबर मोर्चा संभाले खड़ी रहीं। यही कारण रहा कि 12 घंटे तक पुलिस प्रशासन के अफसरों को जूझना पड़ा। रात में प्रतिमा बिसौली कोतवाली में सुरक्षित रखवा दी गई।
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पथराव में घायल पुलिसकर्मी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस ने प्रतिमा खंडित किए जाने की सूचना को बताया निराधार
घटनाक्रम के बीच प्रतिमा खंडित किए जाने की खबर भी सामने आई। हालांकि, पुलिस ने इसे पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। एसएसपी अंकिता शर्मा का कहना है कि डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा को तोड़ा या खंडित नहीं किया गया। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए गांव में पुलिस बल तैनात है और अधिकारियों की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है। फिलहाल गांव में शांति और कानून-व्यवस्था सामान्य है। प्रशासन की ओर से लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की गई है।