बागपत में सिनौली के उत्खनन में मिले चार हजार साल पुराने इतिहास को अंतरराष्ट्रीय पटल पर प्रस्तुत किया गया है। ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज की गई सीरीज ‘सीक्रेटस ऑफ सिनौली-डिस्कवरी ऑफ द सेंचुरी’ में सिनौली के इतिहास को अभिनेता मनोज वाजपेयी ने प्रस्तुत किया है।
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बड़ौत के सिनौली उत्खनन स्थल से प्राप्त शवदाह भट्ठी
- फोटो : अमर उजाला
आगरा सर्किल में सिनौली को 267वां संरक्षित स्मारक घोषित किया जा चुका है। सिनौली में 28.75 हेक्टेयर जमीन संरक्षित स्मारक एवं अवशेष स्थल घोषित की गई है।
पुरातत्व विभाग की ओर से कराए गए उत्खनन में मिले योद्धाओं के रथ, कंकाल, धनुषबाण और तलवार से चार हजार साल पुराने इतिहास की पुष्टि हो चुकी है। सिनौली में मिली दस में से तीन कब्र महिलाओं की थीं, जिनमें तलवार और धनुषबाण खुदाई में मिले। इससे जाहिर है कि सिनौली की महिलाएं तलवार और धनुष-बाण चलाने में माहिर रहीं होंगी।
एक योद्धा की तरह ही हुए उनके अंतिम संस्कार के दौरान शाही ताबूत में सम्मान के तौर पर तलवार और धनुषबाण रखे जाने की परंपरा थी। उत्खनन में कब्र संख्या नौ पर धनुष बाण की पुष्टि हो चुकी है। यह सवाल अनसुलझा है कि महिलाओं के कंकाल में टखने से नीचे के पैर कटे हुए क्यों मिले हैं।
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सिनौली उत्खनन
- फोटो : अमर उजाला
प्राचीन रथ दबा मिला था, जिससे पता चलता है कि योद्धा के रथ को भी दफना दिया गया। शाही ताबूत, प्राचीन रथ, महिला का कंकाल, धनुष, तांबे की तलवार और मृदभांड सामने आए थे। महिला के कंकाल के पास कॉपर का शीशा, हड्डियों से बना कंघा मिला था।