कोरोना के तेजी से संक्रमण को देखते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी छात्रावासों को तत्काल प्रभाव से खाली कराने का निर्णय लिया है। कोरोना के तेजी फैलाव को देखते हुए विवि ने यह निर्णय लिया है कि कही छात्रों के बीच संक्रमण फैला तो उसे रोकना मुश्किल होगा।
इस बात को ध्यान में रखकर बुधवार को कुलपति की अध्यक्षता में हुई बैठक में छात्रावास खाली कराने का निर्णय लिया गया। विवि प्रशासन ने निर्णय लिया है कि छात्रावास खाली नहीं करने वालों को बलपूर्वक बाहर कर दिया जाएगा। छात्रावास खाली कराने के विवि के निर्णय के बाद छात्रों का विरोध शुरू हो गया है। छात्रों का कहना है कि कोविड-19 के तेजी से बढ़ रहे संक्रमण के बीच आखिर में छात्र-छात्राएं कहां जाएंगे।
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मार्च में पूरे देश में लॉकडाउन लागू होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं विवि के छात्रावासों एवं डेलीगेसी में फंस गए थे। विवि एवं जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से अप्रैल में छात्रावासों में रह रहे छात्रों को प्रशासन की मदद से घर भेजने की व्यवस्था की थी।
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इविवि प्रशासन की ओर से 30 अप्रैल को छात्रावासों को लगभग खाली करवाकर सभी अधीक्षकों की ओर से रिपोर्ट विवि प्रशासन को दी गई थी। छात्रावास खाली होने के बाद जब लॉकडाउन हटा तो इविवि के कुछ छात्रावासों में धीरे-धीरे छात्र आकर रहने लगे।
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विवि में इस बात की चर्चा है कि किसी छात्रावास में लखनऊ से आकर एक छात्र नेता कई दिन ठहरा था, उसके जाने के बाद पता चला कि वह कोविड-19 पॉजिटिव था, उसके बाद से छात्रावास के छात्र सहमे हैं। इसकी जानकारी विवि प्रशासन को मिलने के बाद ही यह निर्णय लिया गया है। फिलहाल विवि के अधिकारी इस बारे में कुछ भी जानकारी से इनकार करते रहे।
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लॉकडाउन हटने के बाद छात्रवास आ गए बड़ी संख्या में छात्र
विवि प्रशासन को अधीक्षकों से मिली रिपोर्ट में कहा गया है कि 30 अप्रैल को एएन झा छात्रावास में मात्र 35 छात्र थे जो अब बढ़कर 87 पहुंच गए हैं, इसी प्रकार जीएन झा छात्रावास में 20 छात्र बढ़कर 40 पहुंच गए। हिंदू हॉस्टल में मात्र दो छात्र जबकि पीसी बनर्जी छात्रावास पूरी तरह से खाली है।