सरस्वती हाईटेक सिटी : निवेश और रोजगार का केंद्र नहीं बन सकी सरस्वती हाईटेक सिटी, भूमि की कीमतें बनीं रोड़ा
प्रयागराज में निवेश और रोजगार का बड़ा केंद्र बनाने के सपने के साथ शुरू हुई सरस्वती हाईटेक सिटी करीब एक दशक बाद भी अपनी मंजिल से दूर है। महंगी जमीन, बढ़ती निर्माण लागत और आवंटित भूखंडों पर परियोजनाओं की सुस्त रफ्तार ने औद्योगिक विकास की राह रोक रखी है। अब यूपीसीडा नई कार्ययोजना के जरिए हाईटेक सिटी में निवेश और उद्योगों को गति देने की तैयारी में है।
विस्तार
सरस्वती हाईटेक सिटी की स्थापना के करीब दस वर्ष बाद भी यहां निवेश और रोजगार का अपेक्षित केंद्र विकसित नहीं हो सका है। उद्योगों के लिए जमीन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब 1138.78 एकड़ क्षेत्र में विकसित की गई इस परियोजना में अपेक्षित औद्योगिक गतिविधियां रफ्तार नहीं पकड़ सकी हैं। महंगी जमीन, विकास एवं निर्माण की अतिरिक्त लागत और परियोजनाओं के धरातल पर नहीं उतर पाने को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
2016 में रखी गई थी हाईटेक सिटी की आधारशिला
सरस्वती हाईटेक सिटी की आधारशिला वर्ष 2016 में रखी गई थी। उस समय यहां पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और करीब दस हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद जताई गई थी। आवासीय और औद्योगिक, दोनों तरह की जमीन महंगी होने के कारण निवेशकों की रुचि अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रही है। हाईटेक सिटी में कुल 2102 आवासीय भूखंड हैं, लेकिन अब तक केवल 802 का ही आवंटन हो सका है।
आवंटन के बाद भी धरातल पर नहीं उतरी परियोजनाएं
हाईटेक सिटी में बड़े उद्योगों के लिए जमीन आवंटित की गई, लेकिन ज्यादातर परियोजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकीं। करीब 20 बड़े उद्योगों के लिए जमीन आवंटित होने के बावजूद इनमें केवल तीन इकाइयां ही चालू हो सकीं। उद्यमियों का कहना है कि कई स्थानों पर जमीन में बड़े गड्ढे हैं। भराई और निर्माण में ही करीब 40 से 50 लाख रुपये तक अतिरिक्त खर्च आने से परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है।
बिसलेरी को करीब 300 करोड़ रुपये के निवेश के लिए 13 एकड़, एक अन्य कंपनी को करीब 200 करोड़ रुपये के निवेश के लिए 13 एकड़ और वरुण बेवरेजेज को करीब 1500 करोड़ रुपये के निवेश के लिए 24 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक संतोष कुमार के अनुसार, परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए नए सिरे से प्रयास किए जा रहे हैं।
औद्योगिक भूखंडों की स्थिति भी चिंताजनक
औद्योगिक संघ का कहना है कि हाईटेक सिटी में जमीन आवंटन की स्थिति संतोषजनक नहीं है। यहां सबसे छोटा औद्योगिक भूखंड भी करीब दो करोड़ रुपये का है। छोटे उद्यमियों की जरूरत को देखते हुए संघ की ओर से 20 उद्यमियों की सूची यूपीसीडा को दी गई थी, जिनमें से करीब 10 को भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। उद्यमियों का कहना है कि भूखंड की कीमत के साथ विकास और निर्माण की अतिरिक्त लागत भी उठानी पड़ रही है। इससे परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है और निवेश प्रभावित हो रहा है।
नई कार्ययोजना से रफ्तार बढ़ाने की तैयारी
सरस्वती हाईटेक सिटी को विकसित करने के लिए नई कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसे जल्द ही कार्यरूप में परिवर्तित किया जाएगा। नई व्यवस्था के माध्यम से परियोजना से जुड़ी गतिविधियों को मजबूत करते हुए औद्योगिक निवेश को गति देने का प्रयास होगा। यूपीसीडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के अनुसार, मानव संसाधन और प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों को मजबूत करते हुए औद्योगिक निवेश बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
भूखंड की कीमत बनी बड़ी चुनौती
वर्तमान में आवासीय भूखंड की कीमत करीब 20 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर है। वर्ष 2022 से पहले यह दर करीब 17,900 रुपये प्रति वर्ग मीटर थी। वहीं औद्योगिक भूखंड की कीमत 10,860 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। औद्योगिक क्षेत्र में कुल 76 भूखंड बताए गए हैं, जिनमें केवल 20 का आवंटन हुआ है और 57 खाली पड़े हैं। इससे साफ है कि महंगी जमीन और परियोजना लागत निवेश की राह में बड़ी चुनौती बनी हुई है।