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यूपी: सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामला- हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, हर्जाना वसूली के आदेश पर भी रोक

Fri, 11 Sep 2026 01:05 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 11 Sep 2026 01:05 PM IST
सार

Saharanpur Mosque Demolition Case: सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने नगर मजिस्ट्रेट के 6.41 करोड़ रुपये हर्जाना वसूलने के सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर की तारीख तय की है।

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Saharanpur mosque demolition case – High Court seeks response from the government; stays recovery of fine from
इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से लगाए गए 6.41 करोड़ रुपये हर्जाने की वसूली पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार से जवाब मांगते हुए सुनवाई के लिए अगली तिथि 12 अक्तूबर नियत की है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने मोहम्मद तनवीर अहमद की याचिका पर दिया है।

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याचिका में सिटी मजिस्ट्रेट के 16 जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश में कथित अनधिकृत कब्जे के संबंध में बेदखली का आदेश पारित करने के साथ 6,41,65,500 रुपये का हर्जाना लगाया गया था। इसके खिलाफ दाखिल अपील को जिला जज ने दो सितंबर 2026 को खारिज कर दिया था। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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100 वर्ष से पुरानी बताई गई मस्जिद

याची वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष कुमार सिंह, हिमांशु दुबे ने दलील दी कि राज्य सरकार ने बेदखली आदेश पारित होने के महज तीन दिन के भीतर मस्जिद ध्वस्त कर दिया। याची के दावे व रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों पर विचार नहीं किया गया। विवादित जमीन पर 100 साल से अधिक समय से मस्जिद है। जमीन के मूल मालिक याकूब खान और वाहिद खान थे और जमीन का इस्तेमाल वक्फ के रूप में किया जा रहा था।
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वहीं राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने दलील दी कि रिकॉर्ड में संपत्ति को कचहरी/कलेक्ट्रेट के रूप में दर्ज किया गया है। याची के लिखित बयान में याकूब खान और वाहिद खान को मूल मालिक बताया गया है लेकिन संपत्ति कब वक्फ की गई, इसका कोई उल्लेख नहीं है। न ही कोई वक्फनामा रिकॉर्ड पर लाया गया है।

विवादित जमीन पर डाकघर संचालित हो रहा है और कमरे किराये पर लेने के बाद वहां मस्जिद बनाई गई तथा नमाज पढ़ी जा रही थी। हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मामले में विचारणीय माना। कोर्ट ने प्रतिवादी नंबर दो को नोटिस जारी करते हुए राज्य को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने और उसके बाद याची को एक सप्ताह में प्रत्युत्तर दाखिल करने का समय दिया है।

क्या है पूरा मामला

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित विवादित मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मामला सरकारी जमीन पर अनधिकृत कब्जे और अदालती फैसलों से जुड़ा हुआ है। मार्च 2025 में बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी की शिकायत के आधार पर राजस्व विभाग ने कार्रवाई शुरू की, जिसमें कलेक्ट्रेट की 315 वर्ग मीटर जमीन (खसरा सं. 539) पर बने इस ढांचे को अवैध बताया गया।

प्रशासन का कहना था कि यह परिसर की पुरानी विश्रामशाला की जमीन थी, जिसे बिना अनुमति धार्मिक ढांचे में बदला गया, जबकि मस्जिद कमेटी का दावा था कि यह 100 साल से अधिक पुरानी और वक्फ में दर्ज संपत्ति है। 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने ढांचे को बेदखली का आदेश देते हुए भारी जुर्माना लगाया। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने जिला जज की अदालत में अपील की, लेकिन 2 सितंबर 2026 को जिला अदालत ने याचिका खारिज कर सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखा।

पांच सितंबर को ध्वस्त कर दी गई थी मस्जिद

इसके बाद 5 सितंबर 2026 की देर रात से 6 सितंबर के तड़के के बीच प्रशासन ने कलेक्ट्रेट के सभी मुख्य द्वारों को सील कर और भारी सुरक्षा बल तैनात कर बुलडोजर कार्रवाई के जरिए ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। ध्वस्तीकरण के तुरंत बाद मस्जिद कमेटी ने इस कार्रवाई को बिना पर्याप्त नोटिस और अवैध बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिस पर 11 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने यूपी सरकार और प्रशासन से जवाब मांगते हुए मस्जिद कमेटी से जुर्माना वसूली पर रोक लगा दी।
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