संगम तट पर शनिवार की सुबह अर्घ्यदान और शंख ध्वनि के साथ नव संवत्सर का जोरदार स्वागत किया गया। नई उम्मीदों और सपनों के साथ नव संवत की पहली सुबह कुछ कर गुजरने के संकल्पों के साथ हुई। मंदिरों में शीश नवाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
हिंदू नववर्ष : संगम पर शंखध्वनि से हुई नव संवत्सर की नई सुबह, अनोखे अंदाज में हुआ साल के पहले दिन का स्वागत
नल नामक नव संवत्सर के स्वागत के लिए संगम समेत गंगा, यमुना के तटों पर पौ फटने के पहले ही भीड़ लग गई। हर किसी को पूरब के आसमान से अरुणोदय की लाली प्रस्फुटित होने का इंतजार था।
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सूर्योदय के साथ गूंजने लगे घंटा और घड़ियाल
इस दौरान शंखध्वनि गूंजती रही। घंटे-घड़ियाल बजाकर आरती की जाने लगी। रेती पर नव संवत्सर के स्वागत में अल्पनाएं भी उकेरी गईं। नावों से त्रिवेणी दर्शन की भी होड़ मची रही। त्रिपौलिया हनुमान मंदिर में सुबह ही भीड़ लग गई। इसी तरह सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन मंदिर में शनिवार भोर में ही घंटे-घड़ियाल गूंजने लगे। सूर्योदय होने के साथ ही उपस्थित लोगों ने शंखध्वनि और ऊं के उद्घोष के साथ नववर्ष का स्वागत किया।
लेटे हनुमानजी का किया गया भव्य श्रृंगार
संगम स्थित बड़े हनुमान की नव संवत्सर के आगमन पर भव्य शृंगार किया गया। रंग-बिरंगे फूलों, हरी पत्तियों से हनुमान जी के दरबार को सजाया गया। मंगला आरती के साथ मंदिर के पट खुलते ही पहले से लंबी लाइन में लगे श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। इस दौरान मंदिर परिसर में दीपदान और महाआरती होती रही।
नव संवत के साथ नवरात्र का प्रथम दिन होने की वजह से बड़े हनुमान के अन्नक्षेत्र में फलाहार का सुबह से ही वितरण किया जाता रहा। इसी तरह मीरापुर में मां कल्याणी देवी और मां ललिता देवी के मंदिरों में भी नव संवत के आगमन पर दर्शन-पूजन तक नव वर्ष के प्रथम दिन की शुरुआत करने की होड़ मची रही। अलोप शंकरी माता के दरबार में भी बड़ी संख्या में लोगों ने दीपदान और दर्शन, अभिषेक कर नव वर्ष की शुरुआत की।
संगम पर गंगा पूजन से नव संवत्सर का आगाज
संगम तट पर शनिवार को गंगा पूजन के साथ ही नव संवत्सर का आगाज हुआ। सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था प्रयागराज सेवा समिति की ओर से पूजन के बाद पंचांग का वितरण भी किया गया। संगम विश्व धरोहर महाभियान के संयोजक तीर्थराज पांडेय बच्चा भैया की ओर से नव संवत्सर का पंचांग वितरित किया गया।
संस्था के अध्यक्ष धर्मराज पांडेय ने राक्षस और नल नामक संवत्सर का फलित बताया गया। इस मौके पर भक्तराज पांडेय, राम मिश्रा, सोनी मिश्रा, केसी पांडेय, आकाश निषाद, प्रभुराज पांडेय ने सामूहिक रूप से संगम विश्व धरोहर महाभियान को और तेज करने का संकल्प लिया। साथ ही केंद्र सरकार से संगम को विश्व धरोहर घोषित कराने के लिए पहल करने के लिए आवाज उठाई।
घंटा-घड़ियाल, डमरू, झांझ-मजीरा शंखनाद से पहली किरण का स्वागत
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी शनिवार को नवसंवत्सर के आगमन पर सृजन जन सेवा समिति की ओर से घंटा-घड़ियाल, डमरू,झांझ-मजीरा तथा शंखनाद से सूर्य की पहली किरण का स्वागत किया गया। सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन परिसर में ‘नववर्ष स्वागत उत्सव उद्घोष’ के तहत ओम के उच्चारण से पूरा परिसर गूंज उठा।
कार्यक्रम अध्यक्ष स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज ने आशीर्वचन के दौरान पहल का स्वागत करते हुए कहा, सनातन परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सनातन समाज की है। गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, सरकारी दस्तावेजों में नवसंवत की तारीखें डालने का आदेश स्वागतयोग्य है।
आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल ने कहा, सनातन परंपरा पूरी दुनिया में मानी जाती है। संयोजक डॉ. बीबी अग्रवाल ने शंकराचार्य जी का स्वागत करते हुए कहा, इसमें वे लोग भी शामिल होने लगे हैं जो प्रात:नहीं उठते हैं। अजय सिंह ने संचालन और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की सदस्य डॉ.सविता अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में विधायक राजमणि कोल, प्रवीण पटेल, गुरुप्रसाद, ब्लाक प्रमुख गंगा प्रसाद मिश्रा सहित प्रमोद बंसल, देवेश त्रिपाठी, राजीव महेश्वरी, मुरारी लाल,श्याम सुंदर,विनोद अग्रवाल आदि मौजूद थे।