प्रो. रतन लाल हांगलू इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अब तक के सबसे विवादित कुलपति रहे। उनके चार वर्ष के कार्यकाल में चार सौ से अधिक मुकदमे हाईकोर्ट में दाखिल किए गए और ज्यादातर में इविवि को झटका लगा। भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के आरोपों से लगातार घिरे रहे। वह पहले ऐसे कुलपति हैं, जिनका आठ माह तक का वेतन कोर्ट के आदेश पर रोक दिया गया था।
इलाहाबाद विवि के अब तक के सबसे विवादित कुलपति रहे हांगलू
प्रो. हांगलू के खिलाफ कोर्ट में अवमानना के भी कई मामले लंबित हैं। इतनी बड़ी संख्या में दर्ज मुकदमे और अवमानना के मामलों से स्पष्ट है कि प्रो. हांगलू ने कुलपति रहते हुए निर्णय लेने में तमाम गलतियां की होंगी। वहीं, इविवि एवं संघटक कॉलेजों में हुई शिक्षक भर्ती में धांधली के आरोप से भी प्रो. हांगलू घिरे हैं और उनके खिलाफ दर्जनों शिकायतों केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रपति भवन में लंबित हैं। इसके अलावा इविवि के पुरा छात्र रंजीत टोपा की ओर से विश्वविद्यालय को में दिए गए तकरीबन 15 करोड़ रुपये की धनराशि को लेकर भी प्रो. हांगलू पर तीन करोड़ रुपये के गबन के आरोप लगे हैं। इसके अलावा भी उन पर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितता के कई गंभीर आरोप हैं।
कल्याणी में भी पूरा नहीं कर सके थे कार्यकाल
इविवि आने से पहले प्रो. रतन लाल हांगलू पश्चिम बंगाल में कल्याणी विश्वविद्यालय के कुलपति थे, लेकिन वहां भी तमाम विवादों में घिरे रहे और उन्हें विश्वविद्यालय बीच में छोड़कर जाना पड़ा। उस दौरान भी विश्वविद्यालय की महिला शिक्षक ने उन पर कई प्रकार के आरोप लगाते हुए कहा था कि विश्वविद्यालय में उनके कार्यकाल के दौरान महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। इसके अलावा नेहू विश्वविद्यालय, असम में शिक्षक के तौर पर काम किया लेकिन वहां भी विवादों से घिरने के बाद विश्वविद्यालय छोड़कर जाना पड़ गया।
साल भर पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं हांगलू
- प्रो. रतन लाल हांगलू की मूल तैनाती हैदराबाद विश्वविद्यालय की है। वहां प्रोफेसर रहे हांगलू पहले कल्याणी और फिर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। प्रो. हांगलू हैदराबाद विश्वविद्यालय से दो जनवरी 2019 को रिटायर हो चुके हैं।
प्रो. हांगलू की कार्यशैली की हैदराबाद विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने भी निंदा की है। इविवि के पूर्व वीसी प्रो. राजेन हर्षें भी हैदराबाद विश्वविद्यालय में शिक्षक रहे चुके हें। वह दो जनवरी को हैदराबाद विश्वविद्यालय में एक सेमिनार में शामिल होने गए थे। वहां के शिक्षकों ने प्रो. हर्षे से हांगलू के मसले पर चर्चा की और हांगलू की कार्यशैली की निंदा करते हुए कहा कि प्रो. हर्षे यहां के शिक्षकों का संदेश इविवि के शिक्षकों तक पहुंचा दें। हैदराबाद विश्वविद्यालय की छवि हमेशा से साफसुथरी रही है। हांगलू एक अपवाद हैं।