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UP: चार हजार साल पहले भी श्रृंगार की शौकीन थीं महिलाएं, टीले से मिलीं ये चीजें...तस्वीरें देख रह जाएंगे हैरान
Sat, 05 Jul 2025 09:03 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 05 Jul 2025 09:03 AM IST
सार
मैनपुरी के किरथुआ खेड़ा में साढ़े तीन हजार साल पुरानी टेराकोटा की बनी मुहर के साथ महिलाएं शृंगार की चीजें भी मिली हैं।
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श्रृंगार
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की जांच में किरथुआ खेड़ा के टीले में मिले प्राचीन अवशेषों के रहस्यों से मिट्टी हट रही है। इसमें टेराकोटा (पक्की मिट्टी) के मुहर, दवात, मनके और तांबे की चूड़ियाें के टुकड़े मिले हैं। एएसआई ने इन्हें 3500-4000 साल पुराने बताए हैं। संभावना है कि महिलाएं साज-सज्जा के लिए मनके-चूड़ियां पहनती होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापक ढंग से इसकी जांच से कई अनछुई सभ्यता सामने आ सकती हैं।
किरथुआ खेड़ा से मिला सामान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
टीले में ही टेराकोटा से बनी पशु आकृतियां, मानव आकृतियां, महिला का चेहरा समेत अन्य प्राचीन वस्तुएं 4500 साल पुरानी हैं, जिनके महाभारतकालीन होने की संभावना है। इन सभी को विभाग के म्यूजियम में सुरक्षित रखा गया है।
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किरथुआ खेड़ा से मिला सामान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मिले हैं डिजाइनिंग बर्तन
टीले में लाल, काली और लाल-काली मिश्रित पक्की मिट्टी के कई मनके भी मिले हैं। इनका आकार भी अलग-अलग है। तांबे की चूड़ी का टुकड़ा भी बरामद हुआ। विशेषज्ञ मानते हैं कि महिलाएं शृंगार के लिए गले में मनकों की माला पहनती होंगी। हाथों में तांबे की चूड़ियाें का अधिक चलन रहा होगा। डिजाइनिंग बर्तन भी मिले हैं।
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टीले में लाल, काली और लाल-काली मिश्रित पक्की मिट्टी के कई मनके भी मिले हैं। इनका आकार भी अलग-अलग है। तांबे की चूड़ी का टुकड़ा भी बरामद हुआ। विशेषज्ञ मानते हैं कि महिलाएं शृंगार के लिए गले में मनकों की माला पहनती होंगी। हाथों में तांबे की चूड़ियाें का अधिक चलन रहा होगा। डिजाइनिंग बर्तन भी मिले हैं।
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किरथुआ खेड़ा से मिला सामान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
10 हेक्टेयर में फैला था टीला
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के इतिहास एवं संस्कृति विभागाध्यक्ष प्रो. बृजेश्वर दत्त शुक्ला का कहना है कि टीला 15-20 मीटर ऊंचा और करीब 10 हेक्टेयर में फैला हुआ था। खुदाई से अब ये एक हेक्टेयर तक ही सिमट गया है। यहां मिले 4500 साल तक पुराने बर्तन, हड्डियां, सिक्के, चूड़ियां समेत अन्य वस्तुएं मिलीं।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के इतिहास एवं संस्कृति विभागाध्यक्ष प्रो. बृजेश्वर दत्त शुक्ला का कहना है कि टीला 15-20 मीटर ऊंचा और करीब 10 हेक्टेयर में फैला हुआ था। खुदाई से अब ये एक हेक्टेयर तक ही सिमट गया है। यहां मिले 4500 साल तक पुराने बर्तन, हड्डियां, सिक्के, चूड़ियां समेत अन्य वस्तुएं मिलीं।
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किरथुआ खेड़ा से मिला सामान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दो मुहर और स्याही पात्र मिला
इसी में दो मुहर और स्याही पात्र मिला। इससे साबित हो रहा है कि उस वक्त उन्नत सभ्यता रही होगी। मुहर का विशेष आदेशों के लिए इस्तेमाल होता होगा। टीले की व्यापक खोज से नई सभ्यता सामने आ सकती है। इसका संरक्षण नहीं होने पर इनके नष्ट होने की आशंका है।
इसी में दो मुहर और स्याही पात्र मिला। इससे साबित हो रहा है कि उस वक्त उन्नत सभ्यता रही होगी। मुहर का विशेष आदेशों के लिए इस्तेमाल होता होगा। टीले की व्यापक खोज से नई सभ्यता सामने आ सकती है। इसका संरक्षण नहीं होने पर इनके नष्ट होने की आशंका है।