फिरोजाबाद के शिकोहाबाद के आदर्श कृष्ण (एके) इंटर कॉलेज के पूर्व प्रबंधक राकेश यादव की दुखद मौत के पीछे जिस कानूनी शिकंजे की बात सामने आ रही है। उन पर मई 2025 में कोर्ट के आदेश पर वित्तीय धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था। रिश्ते में उनके भतीजे डाहिनी निवासी राहुल यादव की शिकायत पर पुलिस ने राकेश यादव के खिलाफ कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार करने, वित्तीय अनियमितताएं बरतने और कॉलेज के धन का दुरुपयोग करने की गंभीर धाराओं में कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया था।
मुकदमे के अनुसार, राकेश यादव पर कॉलेज की कृषि भूमि से हर साल होने वाली 2 लाख 60 हजार रुपये की सरकारी आय का रिकॉर्ड गायब करने और कॉलेज के बैंक खातों से अलग-अलग समय में लाखों रुपये निकालकर गबन करने का गंभीर आरोप था।
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हत्या और खुदकुशी के बाद विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसी मुकदमे की कानूनी विधिक कार्रवाई और सामाजिक बदनामी के डर ने अंततः इस दुखद घटना का रूप ले लिया। इसके अलावा शिकायतकर्ता का आरोप था कि राकेश यादव ने कूट रचित दस्तावेज तैयार किए और जालसाजी के सहारे अवैध रूप से कॉलेज के प्रबंधक बन बैठे।
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मां की हत्या और पिता की खुदकुशी के बाद जानकारी देतीं बेटी
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तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक बाल मुकंद प्रसाद ने 15 मई 2021 को पत्र भेजकर 18 जनवरी 2021 को हुए निर्वाचन से जुड़े मूल विधिक अभिलेख मांगे थे लेकिन राकेश यादव ने कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए थे। शिकायतकर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत डीआईओएस कार्यालय से जानकारियां निकालीं थीं। इसके बाद विभाग द्वारा कराई गई उच्च स्तरीय जांच की रिपोर्ट 20 मई 2024 को सामने आई, जिसमें पूर्व प्रबंधक को फर्जी दस्तावेज तैयार कर अनुचित लाभ लेने और कॉलेज के खातों में हेराफेरी करने का दोषी पाया गया था।
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हत्या और खुदकुशी के बाद विलाप करते परिजन
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पिता के खिलाफ रची गई बड़ी साजिश, बेटी का गंभीर आरोप
मृतक पूर्व प्रबंधक राकेश यादव की बड़ी बेटी गरिमा ने इस पूरे घटनाक्रम को एक सोची-समझी सियासी और व्यक्तिगत साजिश करार दिया। गरिमा ने आरोप लगाया कि उनके पिता ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उन्हें इस आत्मघाती कदम को उठाने के लिए मजबूर किया गया और इस प्रताड़ना के पीछे क्षेत्र के बड़े राजनीतिक रसूखदारों का हाथ है।
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हत्या और खुदकुशी मामले की जांच करती पुलिस
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गरिमा ने पुलिस और मीडिया के सामने कहा, मेरे पिता को चारों तरफ से घेरकर प्रताड़ित करने में विरोधियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। शिकोहाबाद क्षेत्र के ही एक पूर्व विधायक इस पूरे मामले में सक्रिय थे। वह लगातार हमारे खिलाफ और विरोधी पक्ष के समर्थन में थानों से लेकर कोर्ट तक पैरवी कर रहे थे। उन्हीं के दबाव और शह के कारण हमारे पक्ष को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया था।