ताजमहल और किला के पास ही सैलानियों के लिए ऐसी वाटिका तैयार की जा रही है जिसमें पौधे ग्रह और नक्षत्र के अनुसार होंगे। इसका नाम है नक्षत्र वाटिका। इसके अंदर ही नवग्रह वाटिका होगी। इसको तैयार किया जा रहा है शाहजहां गार्डन में। इसमें 12 किस्मों के गुलाब भी महकेंगे। डेढ़ हेक्टेयर में बन रही वाटिका छह महीने में यह तैयार हो सकती है। प्रारंभिक बजट 10 लाख रखा गया है। यह बढ़ सकता है।
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नक्षत्र वाटिका
- फोटो : अमर उजाला
नक्षत्र वाटिका में 27 नक्षत्रों के प्रतीक पौधों की क्यारियां बनाई जा रही हैं। आगरा किला और ताजमहल के बीच में 248 एकड़ एरिया में स्थित शाहजहां गार्डन के अंदर वर्तमान में भी खूबसूरत पेड़ पौधे, पार्क और बच्चों के झूले मौजूद हैं। राजकीय उद्यान विभाग इसमें नक्षत्र वाटिका बना रहा है जिसमें गोल घेरे में 27 नक्षत्रों के प्रतीक पौधे लगाना शामिल हैं। इसके अंदर ही नौ ग्रहों के अनुसार पौधों वाली नवग्रह वाटिका होगी।
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धूप में दमकता ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
राजकीय उद्यान अधीक्षक संजीव वर्मा का कहना है कि दोनों वाटिकाओं के साथ पंच पल्लव वाटिका भी बनेगी, जिसमें चारों दिशाओं के प्रतीक के रूप में आम, पीपल, बरगद, पाकड़ और गूलर के पेड़ लगेंगे। छह महीने के अंदर यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा।
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वाटिका का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
नवग्रह वाटिका में ग्रहों के प्रतीक यह पुष्प खिलेंगे
पलाश-सोम, दूब-राहु, खैर-मंगल, गूलर-शुक्र, मदार-सूर्य, कुश-केतु, अपामार्ग-बुध, पीपी-गुरु और शमी-शनि।
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नक्षत्र वाटिका
- फोटो : अमर उजाला
नक्षत्र वाटिका में 27 नक्षत्रों के प्रतीक पुष्प
रेवती-महुआ, अश्वनी-कुचिला, भरणी-आंवला, कृतिका-गूलर, रोहिणी-जामुन, मृगशिरा-खैर, आद्रा-शीशम, पुनर्वसु-बांस, पुष्य-पीपल, आश्लेषा-नागकेसर, मघा-बरगद, पूर्वी फाल्गुनी-पलाश, उत्तरी फाल्गुनी-पाकड़, हस्त-रीठा और चमेली, स्वाति-अर्जुन, विशाखा-कटाई, अनुराधा-मौलश्री, ज्येष्ठा-चीड़ और सेमल, मूल-साल, पूर्वाषाढ़ा-जलवेतर, उत्तराषाढ़ा-कटहल, श्रवण-शमी, धनिष्ठा-मदार, शतभिषक-कदंब, चित्रा-बेल, पूर्वी भाद्रपद-आम और उत्तरी भाद्रपद-नीम। चारों तरफ 27 नक्षत्रों के प्रतीक पुष्पों के बीच में आस्था का प्रतीक रुद्राक्ष पेड़ होगा।