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Mathura: स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र बिंदु रहा प्रेम महाविद्यालय, अब बनेगा स्मारक

Tue, 02 Aug 2022 02:09 PM IST
धीरेन्द्र सिंह रामकुमार रौतेला/राजीव अग्रवाल, मथुरा
रामकुमार रौतेला/राजीव अग्रवाल, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 02 Aug 2022 02:09 PM IST
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Prem Mahavidyalaya of Vrindavan will now take the form of a memorial
नए स्वरूप का डिजायन और पुरानी इमारत - फोटो : अमर उजाला

आजादी के आंदोलन का गवाह रहा वृंदावन का प्रेम महाविद्यालय अब स्मारक का रूप लेगा। इसकी पहल उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने की है। जिसके तहत विद्यालय के जीर्ण शीर्ण हो चुके भवन की मरम्मत करते हुए उसे मूल स्वरूप के अनुरूप ही तैयार किया जाएगा। इस पर करीब आठ करोड़ रुपये खर्च होंगे।



भारत अपनी आजादी की 75वीं स्वर्णिम वर्षगांठ मना रहा है। आजादी की इस यात्रा में वृंदावन और खासकर राजा महेंद्र प्रताप का महत्वपूर्ण योगदान है। इसका साक्षी यमुना किनारे केसी घाट स्थित प्रेम महाविद्यालय है, जो आज भी लाल पत्थरों की इमारत के रूप में मौजूद है। जर्जर हो चुकी इस महाविद्यालय की इमारत स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को खुद में संजोए हुए है, जो कभी देश की औद्योगिक शिक्षा केंद्र होने के साथ राष्ट्रीय भावना को जन-जन तक पहुंचाने का भी बड़ा माध्यम था। महाविद्यालय की यादों को बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने नई पहल की है। इसके तहत रेली गेयर कंपनी सीआरएस फंड से प्रेम महाविद्यालय की जीर्ण शीर्ण इमारत की प्राचीनता को सजोने का काम करेगी। इसमें भवन की मरम्मत के साथ ऑडोटोरियम भी बनाया जाएगा। इस पर करीब आठ करोड़ की लागत आ रही है।

Prem Mahavidyalaya of Vrindavan will now take the form of a memorial
राजा महेंद्र प्रताप सिंह, प्रेम महाविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

राजमहल से विद्यालय तक का सफर

वृंदावन के केसी घाट के समीप स्थित यह विद्यालय कभी राजा महेंद्र प्रताप का महल हुआ करता था। देश के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले राजा ने 1909 में इसे प्रेम महाविद्यालय के रूप में दान में दे दिया, जो औद्योगिक शिक्षा का केंद्र था।
Prem Mahavidyalaya of Vrindavan will now take the form of a memorial
राजा महेंद्र प्रताप सिंह - फोटो : अमर उजाला
ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी ने बताया कि प्रेम महाविद्यालय स्वतंत्रता आंदोलन के समय स्वतंत्रता सेनानियों का प्रमुख केंद्र बन गया था। 1921 से 1942 तक देश में जो स्वतंत्रता के लिए संग्राम हुए उनमें प्रेम महाविद्यालय ने संचालक केंद्र की तरह अपनी भूमिका निभाई। यह विद्यालय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों की शरण स्थली भी बना। 
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प्रेम महाविद्यालय में बच्चे (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, महामना पंडित मदनमोहन मालवीय, सुभाषचंद्र बोस, पंडित जवाहरलाल नेहरू सहित अनेक राष्ट्रीय नेता यहां आते रहे। इस शिक्षा संस्थान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे डॉ. संपूर्णानंद, एटी गिडवानी, आचार्य जुगल किशोर, नलिनीकांत मुखर्जी, प्रो. कृष्णचंद्र सहित अनेक विद्वानों ने अध्यापन कार्य किया।
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ब्रज तीर्थ विकास परिषद
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने बताया कि प्रेम महाविद्यालय आजादी के आंदोलन का केंद्र रहा है। यह देश की धरोहर है, जिससे ब्रज के आजादी में योगदान की यादे जुड़ी हुई हैं। कोशिश की जा रही है कि एक बड़ी कंपनी के सीएसआर फंड से इसकी मरम्मत कराई जा सके। इसके लिए प्रेम महाविद्यालय से जुडे़ लोगों में भी आम सहमति बनाई गई है। इसमें ब्रज तीर्थ विकास परिषद महज एक माध्यम की भूमिका में है।
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