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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   The world's highest railway station will be built at Tengla in Ladakh.

लेह: जहां सांस लेना भी चुनौती, अब वहां पहुंचेगी ट्रेन; लद्दाख में बनेगा दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन

Fri, 06 Nov 2026 11:35 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, लेह
अमर उजाला नेटवर्क, लेह Published by: Nikita Gupta Updated Fri, 06 Nov 2026 11:35 AM IST
सार

लद्दाख के टेंगला में समुद्र तल से 17,582 फीट की ऊंचाई पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन बनाने की योजना है, जो चीन के तांगगुला स्टेशन का रिकॉर्ड तोड़ेगा। 1.31 लाख करोड़ की इस परियोजना के तहत 489 किलोमीटर लंबी रेललाइन बिछाई जाएगी जिसका आधे से अधिक हिस्सा सुरंगों से गुजरेगा।

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The world's highest railway station will be built at Tengla in Ladakh.
लद्दाख रेल परियोजना - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

लद्दाख तक रेलगाड़ी पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना पर तेजी से काम चल रहा है। यदि सब कुछ ठीक रहा और इसकी डीपीआर को अंतिम रूप मिल गया तो भारत दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लेगा।

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The world's highest railway station will be built at Tengla in Ladakh.
लद्दाख रेल परियोजना - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

प्रस्तावित बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन पर तंगलांग ला दर्रे के पास टेंगला में समुद्र तल से 17,582 फीट की ऊंचाई पर एक रेलवे स्टेशन बनाने की योजना है। इसके निर्माण के बाद यह चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और चिंगहाई प्रांत की सीमा पर चिंगहाई-तिब्बत रेलवे लाइन पर 16,627 फीट की ऊंचाई स्थित तांगगुला रेलवे स्टेशन को पीछे छोड़ देगा।

परियोजना से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा चुकी है। फिलहाल, निर्माण शुरू करने के लिए औपचारिक मंजूरी बाकी है। इसके लिए नीति आयोग और वित्त मंत्रालय सहित विभिन्न संबंधित संस्थाओं से परामर्श और आवश्यक स्वीकृतियां ली जानी हैं।

प्रस्तावित परियोजना की लागत करीब 1.31 लाख करोड़ रुपये है। यह रेललाइन हिमालय के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र से गुजरते हुए 489 किलोमीटर लंबा रेल संपर्क स्थापित करेगी। इसका उद्देश्य केवल लद्दाख को रेल नेटवर्क से जोड़ना ही नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से अहम इस सीमावर्ती क्षेत्र तक सैन्य साजो-सामान और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही को मजबूत बनाना भी है। रक्षा मंत्रालय ने इसे रणनीतिक महत्व की परियोजना के रूप में चिह्नित किया है।

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दिखेगी इंजीनियरिंग...आधे से अधिक हिस्सा सुरंगों में होगा
प्रस्तावित 489 किलोमीटर के ट्रैक में से करीब 270 किमी हिस्सा सुरंगों से से गुजरेगा यानी रेलमार्ग का आधे से अधिक हिस्सा पहाड़ों को चीरकर बनाया जाएगा। पूरी परियोजना में 62 सुरंगों और 116 पुलों के निर्माण का प्रस्ताव है। इन जगहों से गुजरेगा ट्रैक, भूमिगत रेलवे स्टेशन भी होगा...हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से शुरू होकर यह रेललाइन सुंदरनगर, मंडी, मनाली, केलांग, सरचू और उपशी से होते हुए लेह के टेंगला पहुंचेगी। रास्ते में केलांग में भारत का पहला भूमिगत रेलवे स्टेशन बनाने की भी योजना है। टेंगला में प्रस्तावित स्टेशन की ऊंचाई वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाएगी। यह चीन के तांगगुला स्टेशन से करीब 291 मीटर अधिक ऊंचाई पर होगा। परियोजना के पहले चरण में भानुपल्ली-बिलासपुर रेलखंड पर काम चल रहा है, जिसके 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। हालांकि, बिलासपुर-मनाली-लेह के पूरे रेल कॉरिडोर के निर्माण की समयसीमा अभी तय नहीं हुई है।

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ये फायदे होंगे
लद्दाख में सर्दियों में भारी बर्फबारी और कठिन मौसम के बीच रेल संपर्क रहने से खाद्यान्न, ईंधन और अन्य जरूरी सामान की आवाजाही को अधिक नियमित बनाया जा सकेगा। इससे कीमतें भी नियंत्रित रखी जा सकेंगी।

परियोजना से हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति, जंस्कार व लेह सहित आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पहुंच आसान होने से कारोबार, परिवहन तथा पर्यटन से जुड़े रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

लद्दाख तक बेहतर और अपेक्षाकृत भरोसेमंद संपर्क से सेना के जवानों, उपकरणों और अन्य जरूरी सामान की आवाजाही को मजबूती मिल सकती है।

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