कृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा की नगरी मथुरा में शनिवार को आस्था, परंपरा और लोककलाओं का अद्भुत और अलौलिक संगम हुआ। एक तरफ गोविंदा आला रे की गूंज ब्रजवासियों को आनंदित कर रही थी तो दूसरी ओर झारखंड का आदिवासी नृत्य कान्हा के भक्तों को रोमांचित कर रहा था। पहली बार ब्रज की इस पावन धरा पर देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने अपनी लोक कलाओं का प्रदर्शन कर कृष्ण भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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दही हांडी कार्यक्रम का हुआ आयोजन
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मथुरा के गोविंद नगर स्थित रामलीला मैदान में श्री कृष्णोत्सव में महाराष्ट्र के कलाकारों की दही हांडी को छूने की हो रही जोर आजमाइश को देख लोग अचंभित हुए। मुंबई के कलाकार आला रे आला के गीत पर बार बार मानव मीनार बनाकर हांड़ी को छूने का प्रयास करते और हर बार उनकी यह मेहनत रह जाती।
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जन्माष्टमी पर देशभक्ति का रंग
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कई बार की कोशिश के बाद 12 वर्ष का बच्चा मानव मीनार के माध्यम से दही हांडी तक पहुंचा। इस आयोजन ने ब्रजवासियों को सबसे अधिक रोमांचित किया। लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट कलाकारों में जोश का संचार कर रही थी। जैसे ही उसने दही की हांडी फोड़ी पूरा मैदान गोविंदा आला रे की गूंज उठा।
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जन्मोत्सव कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कलाकार
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मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, मणिपुर, असोम, केरल और ऑडिसा की महिला कलाकारों का नृत्य और झारखंड के कलाकारों की अपने वेश में पारंपरिक नृत्य की शैली ने भी लोगों को आकर्षित किया। शाम को शुरू हुए इस आयोजन ने कृष्णोत्सव में आए लोगों को आनंदित कर दिया। ब्रज के कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से लोगों का मन मोह लिया।
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कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बाहर भक्तों की भीड़
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ब्रज के मठों, मंदिरों के साथ घर-घर में जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। कान्हा के जन्म को लेकर घर-घर में तैयारियां की गईं। कान्हा के स्वागत के लिए घरों में मंदिरों को सजाया गया। खिलौने सजाए गए। ब्रजवासियों ने सुबह पूजा-अर्चना कर उपवास रखा। कान्हा का जन्माभिषेक किया कान्हा के जन्म की बधाइयां गूंजती रही।