आगरा के ऐतिहासिक शहर फतेहपुर सीकरी में राजा टोडरमल की बारादरी के संरक्षण के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को 450 साल पुराना लाइम प्लास्टर का बना पानी का टैंक और फव्वारा उत्खनन में मिला है। एएसआई ने पानी का टैंक और लाल पत्थर के फव्वारे को इसी बारादरी का हिस्सा माना है। उत्खनन जारी है और एक ओर की दीवार निकलनी बाकी है।
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फतेहपुर सीकरी में राजा टोडरमल की बारादरी में हो रहा उत्खनन
- फोटो : अमर उजाला
एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार के निर्देशन में फतेहपुर सीकरी में राजा टोडरमल की बारादरी का संरक्षण चल रहा है। यहां जब मजदूर पत्थर तराश रहे थे तो फर्श पर कुछ डिजाइन पैटर्न नजर आए, जिनकी मिट्टी हटाने पर लगा कि नीचे कुछ दबा हुआ है। एएसआई अधिकारियों ने यहां उत्खनन कराया तो मुगलकालीन वास्तुकला का भव्य नमूना सामने आया।
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बारादरी के सामने निकला पानी का टैंक और फव्वारा
- फोटो : अमर उजाला
जमीन के नीचे से लाइम प्लास्टर का बना 8.7 मीटर लंबा चौकोर पानी का टैंक निकला जो 1.1 मीटर गहरा है। 8.7 मीटर लंबे टैंक में हर दीवार पर 9 डिजाइन पैटर्न हैं। इस टैंक का फव्वारा लाल बलुई पत्थर का है। फुब्बारे का पाइप किस धातु का है, यह पता नहीं चला है, लेकिन एएसआई इस टैंक को टोडरमल की बारादरी का हिस्सा मान रहा है।
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बारादरी के सामने निकला पानी का टैंक और फव्वारा
- फोटो : अमर उजाला
पुरातत्वविदों का मानना है कि बारादरी के बीचोंबीच फव्वारा रहा होगा, जो सीकरी की गर्मी से बचने के लिए बनाया गया। अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि जब हम राजा टोडरमल की बारादरी का संरक्षण करा रहे थे, तब संरक्षण के लिए पत्थर तराशते समय वाटर टैंक का प्लेटफार्म निकला। यह बारादरी के ठीक सामने है और उसी का हिस्सा है। अभी उत्खनन जारी है। टैंक का एक ओर का हिस्सा निकलना बाकी है।
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राजा टोडरमल की बारादरी में हो रहा उत्खनन
- फोटो : अमर उजाला
महताब बाग में अष्टकोणीय, सीकरी में चौकोर निकला टैंक
ताजमहल के यमुना किनारे महताब बाग में जिस तरह का अष्टकोणीय वाटर टैंक है, वह भी बारादरी का हिस्सा था। ठीक उसी तरह की टोडरमल की बारादरी के सामने यह टैंक निकला है, लेकिन यह चौकोर है। जिस तरह का डिजाइन पैटर्न महताब बाग में है, वही पैटर्न सीकरी में टोडरमल की बारादरी के सामने निकला है। महताब बाग में भी लाइम प्लास्टर का टैंक निकला है। यहां भी लाइम प्लास्टर का टैंक और फर्श निकला है। केवल बलुई पत्थर इनके ऊपर लगाया गया है।