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अमर उजाला अपराजिता संवाद में बोले प्रबुद्धजन, डॉक्टर-इंजीनियर ही नहीं, बेटों को संस्कारवान भी बनाएं
Wed, 04 Dec 2019 12:00 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 04 Dec 2019 12:00 AM IST
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अपराजिता संवाद कार्यक्रम में प्रबुद्धजन
- फोटो : अमर उजाला
बेटा बड़ा होकर डॉक्टर-इंजीनियर या अफसर बनेगा, मां-बाप यही सपना संजोते हैं। अभिभावक बेटों को संस्कारित कर ‘बड़ा’ बनाने पर इतने गंभीर हों तो निश्चित ही यौन हिंसा के मामले कम होंगे। अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम के तहत आगरा के सिकंदरा स्थित कार्यालय में हुए संवाद में प्रबुद्ध वर्ग ने यही बोला।
अपराजिता संवाद कार्यक्रम में प्रबुद्धजन
- फोटो : अमर उजाला
बेटों की पहली गलती पर ही विरोध करें और उसे महिलाओं के सम्मान की शिक्षा दें। समाजसेवी ने इंटरनेट पर अश्लील फिल्मों की रोक को जरूरी बताया। कहा कि इससे मानसिक विकृतियां सामने आ रही हैं। पुलिस को सक्रियता बढ़ाने और जनप्रतिनिधियों को ऐसे अपराधों के खिलाफ आवाज बुलंद करने की जरूरत बताई।
यह आए सुझाव:
- स्कूलों में मानसिक चिकित्सक से बच्चों की जांच कराएं, उनकी काउंसलिंग करें और नैतिक मूल्य की कक्षा लगे।
- महिलाओं से छेड़छाड़, अभद्रता की शिकायत आने पर बेटों का पक्ष न लें, उसकी करतूत का विरोध करें।
- बेटियों को पौष्टिक भोजन दें, मानसिक रूप से मजबूत करने के लिए काउंसलिंग कराएं। जूडो-कराटे भी सिखाएं।
- सामाजिक संगठन पार्क, चौराहों, स्कूलों और सोसाइटी में यौन हिंसा से बचाव के लिए जागरूक करें।
- बच्चों के मोबाइल फोन चैक करें, उनमें कहीं अश्लील फिल्म या फिर किसी महिला के फोटो तो नहीं।
यह आए सुझाव:
- स्कूलों में मानसिक चिकित्सक से बच्चों की जांच कराएं, उनकी काउंसलिंग करें और नैतिक मूल्य की कक्षा लगे।
- महिलाओं से छेड़छाड़, अभद्रता की शिकायत आने पर बेटों का पक्ष न लें, उसकी करतूत का विरोध करें।
- बेटियों को पौष्टिक भोजन दें, मानसिक रूप से मजबूत करने के लिए काउंसलिंग कराएं। जूडो-कराटे भी सिखाएं।
- सामाजिक संगठन पार्क, चौराहों, स्कूलों और सोसाइटी में यौन हिंसा से बचाव के लिए जागरूक करें।
- बच्चों के मोबाइल फोन चैक करें, उनमें कहीं अश्लील फिल्म या फिर किसी महिला के फोटो तो नहीं।
नंदकिशोर गोयल, शिशिर भगत, समी अगाई
- फोटो : अमर उजाला
यौन हिंसा के खिलाफ चले सामाजिक अभियान: नंदकिशोर गोयल
पर्यावरण संरक्षण की तरह यौन हिंसा के विरुद्ध मुहिम चले, इसमें शहर भर के प्रबुद्ध लोग, सामाजिक संगठन एकजुट हों। अभिभावक, युवा, बुजुर्ग सभी वर्गों में कार्यक्रम कर उन्हें जागरूक करें। ऐसी घटना पर एकजुट विरोध हो।
दुष्कर्मियों को बनाया जाए नपुंसक: शिशिर भगत
दुष्कर्मी को फांसी दी जानी चाहिए। अगर किसी मामले में उसे आजीवन कारावास होता है, तो उसके अंगभंग कर दिए जाएं या फिर उसे नपुंसक बना दिया जाना चाहिए। इससे उसे अपनी हैवानियत का एहसास होगा।
कानूनी सजा से पहले दी जाए यातनाएं: समी अगाई
दुष्कर्मी को कानूनी सजा से पहले सार्वजनिक स्थानों पर यातनाएं दी जानी चाहिए, जिससे औरों में भी डर बैठेगा। दुष्कर्मियों को सजा के लिए निश्चित समय तय हो। न्याय में देरी से भी अपराधों को बढ़ावा मिलता है।
पर्यावरण संरक्षण की तरह यौन हिंसा के विरुद्ध मुहिम चले, इसमें शहर भर के प्रबुद्ध लोग, सामाजिक संगठन एकजुट हों। अभिभावक, युवा, बुजुर्ग सभी वर्गों में कार्यक्रम कर उन्हें जागरूक करें। ऐसी घटना पर एकजुट विरोध हो।
दुष्कर्मियों को बनाया जाए नपुंसक: शिशिर भगत
दुष्कर्मी को फांसी दी जानी चाहिए। अगर किसी मामले में उसे आजीवन कारावास होता है, तो उसके अंगभंग कर दिए जाएं या फिर उसे नपुंसक बना दिया जाना चाहिए। इससे उसे अपनी हैवानियत का एहसास होगा।
कानूनी सजा से पहले दी जाए यातनाएं: समी अगाई
दुष्कर्मी को कानूनी सजा से पहले सार्वजनिक स्थानों पर यातनाएं दी जानी चाहिए, जिससे औरों में भी डर बैठेगा। दुष्कर्मियों को सजा के लिए निश्चित समय तय हो। न्याय में देरी से भी अपराधों को बढ़ावा मिलता है।
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आभा जैन, ऊषा बंसल, सुमन सुराना
- फोटो : अमर उजाला
बेटों की करतूत पर पर्दा न डालें अभिभावक: आभा जैन
महिलाओं को मां-बहन समझने की सोच बच्चों के दिमाग में विकसित करनी होगी। जब बचपन से ही बेटों को संस्कारित करेंगे तो उनकी सोच दूषित नहीं होगी। बेटों की करतूत पर पर्दा न डालकर उसकी खिलाफत करें।
धार्मिक मूल्यों की दी जाए शिक्षा: ऊषा बंसल
मोबाइल, इंटरनेट, फिल्मों में अश्लीलता बड़ी चुनौती है, ऐेसे में बच्चों में धार्मिक भाव और मानवीय मूल्यों की भी शिक्षा दी जाए। हर धर्म इंसानियत की सीख देता है, इससे उनका दिमाग इन विकृतियों से बच सकेगा।
उच्च शिक्षित करना बेहद जरूरी: सुमन सुराना
यौन हिंसा जैसे अधिकांश अपराधों के पीछे अशिक्षा भी एक वजह है। बच्चों को उच्च शिक्षित करने से उनकी सोच काफी विकसित होगी। वह अच्छा-बुरे कार्य को बेहतर सोच सकेंगे। उसका ध्यान करियर पर ज्यादा रहेगा।
महिलाओं को मां-बहन समझने की सोच बच्चों के दिमाग में विकसित करनी होगी। जब बचपन से ही बेटों को संस्कारित करेंगे तो उनकी सोच दूषित नहीं होगी। बेटों की करतूत पर पर्दा न डालकर उसकी खिलाफत करें।
धार्मिक मूल्यों की दी जाए शिक्षा: ऊषा बंसल
मोबाइल, इंटरनेट, फिल्मों में अश्लीलता बड़ी चुनौती है, ऐेसे में बच्चों में धार्मिक भाव और मानवीय मूल्यों की भी शिक्षा दी जाए। हर धर्म इंसानियत की सीख देता है, इससे उनका दिमाग इन विकृतियों से बच सकेगा।
उच्च शिक्षित करना बेहद जरूरी: सुमन सुराना
यौन हिंसा जैसे अधिकांश अपराधों के पीछे अशिक्षा भी एक वजह है। बच्चों को उच्च शिक्षित करने से उनकी सोच काफी विकसित होगी। वह अच्छा-बुरे कार्य को बेहतर सोच सकेंगे। उसका ध्यान करियर पर ज्यादा रहेगा।
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डॉ. शिवानी मिश्रा, सुरेंशचंद सोनी, चंद्रवीर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
बेटियां बनें मजबूत, सीखे जूडो-कराटे: डॉ. शिवानी मिश्रा
बेटियों को खुद मजबूत होना पड़ेगा। खानपान बेहतर करने के साथ जूडो-कराटे सीखें। पर्स में मिर्च पाउडर रखें। पुलिस को चाहिए कि वह गश्त बढ़ाए, इमरजेंसी कॉल तत्काल उठे। ऐसा होने से अपराध कम हो जाएंगे।
अश्लील साइट पर रोक लगाए सरकार: सुरेशचंद सोनी
यौन हिंसा की सबसे बड़ी वजह अश्लील फिल्म हैं। इंटरनेट पर यह आसानी से उपलब्ध हैं। इन्हें देखकर लोग विकृत हो रहे हैं। बच्चियां तक सुरक्षित नहीं रही है। सरकार को अश्लील साइट पर रोक लगानी चाहिए।
कानून बने सख्त, तय समय में मिले न्याय: चंद्रवीर सिंह
यौन हिंसा पर कानून और सख्त होने चाहिए। दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों में न्याय जल्द दिया जाए, जिससे अपराधी पर बचाव के मौके नहीं रहें। न्याय के लिए एक अवधि भी तय हो। इससे अपराधियों के हौसले टूटेंगे।
बेटियों को खुद मजबूत होना पड़ेगा। खानपान बेहतर करने के साथ जूडो-कराटे सीखें। पर्स में मिर्च पाउडर रखें। पुलिस को चाहिए कि वह गश्त बढ़ाए, इमरजेंसी कॉल तत्काल उठे। ऐसा होने से अपराध कम हो जाएंगे।
अश्लील साइट पर रोक लगाए सरकार: सुरेशचंद सोनी
यौन हिंसा की सबसे बड़ी वजह अश्लील फिल्म हैं। इंटरनेट पर यह आसानी से उपलब्ध हैं। इन्हें देखकर लोग विकृत हो रहे हैं। बच्चियां तक सुरक्षित नहीं रही है। सरकार को अश्लील साइट पर रोक लगानी चाहिए।
कानून बने सख्त, तय समय में मिले न्याय: चंद्रवीर सिंह
यौन हिंसा पर कानून और सख्त होने चाहिए। दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों में न्याय जल्द दिया जाए, जिससे अपराधी पर बचाव के मौके नहीं रहें। न्याय के लिए एक अवधि भी तय हो। इससे अपराधियों के हौसले टूटेंगे।