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आंकड़े हैं गवाह: वैभव सूर्यवंशी को बड़े मैचों का खिलाड़ी क्यों कहा जा रहा? 2026 में दबाव बढ़ा तो बल्ला और गरजा
Wed, 09 Sep 2026 11:45 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Wed, 09 Sep 2026 11:45 AM IST
सार
वैभव सूर्यवंशी ने 2026 में दिखाया है कि बड़े मुकाबलों का दबाव उनके खेल को कमजोर नहीं करता, बल्कि और निखार देता है। अंडर-19 विश्व कप से लेकर आईपीएल, इंडिया ए की ट्राई-सीरीज और दलीप ट्रॉफी तक, नॉकआउट और निर्णायक मुकाबलों में उनके बल्ले से लगातार बड़ी पारियां निकली हैं। यही निरंतरता उन्हें खास बनाती है।
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वैभव सूर्यवंशी
- फोटो : ANI
क्रिकेट में प्रतिभा दिखाना एक बात है, लेकिन बड़े मुकाबले में प्रतिभा को प्रदर्शन में बदलना बिल्कुल अलग चुनौती है। लीग मैचों में रन बनाने वाले कई खिलाड़ी जब मुकाबला करो या मरो की स्थिति में पहुंचते हैं, तो दबाव उनके खेल पर साफ दिखाई देता है, लेकिन वैभव सूर्यवंशी की 2026 की कहानी कुछ अलग है।
वैभव सूर्यवंशी
- फोटो : BCCI
अंडर-19 विश्व कप से शुरू हुआ सिलसिला
2026 के अंडर-19 विश्व कप में वैभव ने भारत के लिए आक्रामक बल्लेबाजी की मिसाल पेश की, लेकिन उनके अभियान की सबसे खास बात यह रही कि टूर्नामेंट के सबसे महत्वपूर्ण मुकाबलों में उनका बल्ला और ज्यादा चला। अफगानिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में भारत को फाइनल का टिकट हासिल करना था। इस दबाव भरे मुकाबले में वैभव ने सिर्फ 33 गेंदों पर 68 रन ठोक दिए। उनकी तेज पारी ने भारतीय टीम को शुरुआत से ही मुकाबले पर पकड़ बनाने का मौका दिया।
इसके बाद आया फाइनल। इंग्लैंड के खिलाफ खिताबी मुकाबले में वैभव ने 80 गेंदों पर 175 रन की तूफानी पारी खेल दी। यह सिर्फ एक शतक नहीं था, बल्कि ऐसा प्रदर्शन था जिसने मैच का रुख ही बदल दिया। इस पारी में उन्होंने 15 चौके और 15 छक्के लगाए। यानी सेमीफाइनल में 68 और फाइनल में 175, जैसे-जैसे टूर्नामेंट का महत्व बढ़ा, वैभव का प्रदर्शन भी उसी अनुपात में बड़ा होता गया।
2026 के अंडर-19 विश्व कप में वैभव ने भारत के लिए आक्रामक बल्लेबाजी की मिसाल पेश की, लेकिन उनके अभियान की सबसे खास बात यह रही कि टूर्नामेंट के सबसे महत्वपूर्ण मुकाबलों में उनका बल्ला और ज्यादा चला। अफगानिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में भारत को फाइनल का टिकट हासिल करना था। इस दबाव भरे मुकाबले में वैभव ने सिर्फ 33 गेंदों पर 68 रन ठोक दिए। उनकी तेज पारी ने भारतीय टीम को शुरुआत से ही मुकाबले पर पकड़ बनाने का मौका दिया।
इसके बाद आया फाइनल। इंग्लैंड के खिलाफ खिताबी मुकाबले में वैभव ने 80 गेंदों पर 175 रन की तूफानी पारी खेल दी। यह सिर्फ एक शतक नहीं था, बल्कि ऐसा प्रदर्शन था जिसने मैच का रुख ही बदल दिया। इस पारी में उन्होंने 15 चौके और 15 छक्के लगाए। यानी सेमीफाइनल में 68 और फाइनल में 175, जैसे-जैसे टूर्नामेंट का महत्व बढ़ा, वैभव का प्रदर्शन भी उसी अनुपात में बड़ा होता गया।
वैभव सूर्यवंशी
- फोटो : ANI
आईपीएल के प्लेऑफ में दिखा असली रंग
अंडर-19 क्रिकेट में धमाल मचाने के बाद सबसे बड़ा सवाल था कि क्या वैभव सीनियर स्तर पर भी दबाव झेल पाएंगे? आईपीएल ने इसका जवाब दे दिया। राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए वैभव ने पूरे सीजन में शानदार प्रदर्शन किया और 776 रन बनाकर टूर्नामेंट में अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन यहां भी खास बात उनका नॉकआउट प्रदर्शन रहा। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ एलिमिनेटर मुकाबला करो या मरो का था। हारने वाली टीम टूर्नामेंट से बाहर होनी थी। ऐसे मुकाबले में वैभव ने महज 29 गेंदों पर 97 रन ठोक दिए।
यह पारी इसलिए और खास थी क्योंकि प्लेऑफ में बल्लेबाज पर सामान्य मुकाबले से कहीं ज्यादा दबाव होता है। लेकिन वैभव ने उस दबाव को अपने ऊपर हावी होने देने के बजाय गेंदबाजों पर डाल दिया। इसके बाद गुजरात टाइटंस के खिलाफ क्वालिफायर में उन्होंने 47 गेंदों पर 96 रन बनाए। यानी आईपीएल के लगातार दो सबसे महत्वपूर्ण मुकाबलों में वैभव के स्कोर रहे 97 (29) और 96 (47)। एक 15 साल के बल्लेबाज के लिए यह आंकड़ा अपने आप में असाधारण है।
अंडर-19 क्रिकेट में धमाल मचाने के बाद सबसे बड़ा सवाल था कि क्या वैभव सीनियर स्तर पर भी दबाव झेल पाएंगे? आईपीएल ने इसका जवाब दे दिया। राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए वैभव ने पूरे सीजन में शानदार प्रदर्शन किया और 776 रन बनाकर टूर्नामेंट में अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन यहां भी खास बात उनका नॉकआउट प्रदर्शन रहा। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ एलिमिनेटर मुकाबला करो या मरो का था। हारने वाली टीम टूर्नामेंट से बाहर होनी थी। ऐसे मुकाबले में वैभव ने महज 29 गेंदों पर 97 रन ठोक दिए।
यह पारी इसलिए और खास थी क्योंकि प्लेऑफ में बल्लेबाज पर सामान्य मुकाबले से कहीं ज्यादा दबाव होता है। लेकिन वैभव ने उस दबाव को अपने ऊपर हावी होने देने के बजाय गेंदबाजों पर डाल दिया। इसके बाद गुजरात टाइटंस के खिलाफ क्वालिफायर में उन्होंने 47 गेंदों पर 96 रन बनाए। यानी आईपीएल के लगातार दो सबसे महत्वपूर्ण मुकाबलों में वैभव के स्कोर रहे 97 (29) और 96 (47)। एक 15 साल के बल्लेबाज के लिए यह आंकड़ा अपने आप में असाधारण है।
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वैभव सूर्यवंशी
- फोटो : PTI
इंडिया ए के लिए भी निर्णायक मुकाबले में तूफानी पारी
वैभव की यह आदत सिर्फ आईपीएल तक सीमित नहीं रही। श्रीलंका ए के खिलाफ ट्राई-सीरीज के फाइनल में भी उन्होंने भारत ए के लिए शानदार बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 29 गेंदों पर 94 रन बना डाले। गौर करने वाली बात यह है कि यहां भी मुकाबला फाइनल था। यानी 2026 में जब-जब मैच का महत्व बढ़ा, वैभव ने अपनी बल्लेबाजी की रफ्तार कम करने के बजाय उसे और तेज किया।
वैभव की यह आदत सिर्फ आईपीएल तक सीमित नहीं रही। श्रीलंका ए के खिलाफ ट्राई-सीरीज के फाइनल में भी उन्होंने भारत ए के लिए शानदार बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 29 गेंदों पर 94 रन बना डाले। गौर करने वाली बात यह है कि यहां भी मुकाबला फाइनल था। यानी 2026 में जब-जब मैच का महत्व बढ़ा, वैभव ने अपनी बल्लेबाजी की रफ्तार कम करने के बजाय उसे और तेज किया।
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वैभव सूर्यवंशी
- फोटो : Twitter
दलीप ट्रॉफी में बदला अंदाज, फिर भी रन नहीं रुके
दलीप ट्रॉफी ने वैभव के खेल का एक दूसरा पहलू दिखाया। सफेद गेंद की विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले इस युवा खिलाड़ी ने लाल गेंद के क्रिकेट में भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। सेंट्रल जोन के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने पहली पारी में 92 रन बनाए और दूसरी पारी में भी तेज 40 रन जोड़े।
यहां सिर्फ रन महत्वपूर्ण नहीं थे। दलीप ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नामेंट में सीनियर खिलाड़ियों के बीच खेलते हुए वैभव ने दिखाया कि उनका खेल सिर्फ तेज गेंदबाजों पर बड़े शॉट लगाने तक सीमित नहीं है। ईस्ट जोन के लिए खेलते हुए उन्हें नेतृत्व की जिम्मेदारी भी मिली। कप्तान ईशान किशन के चोटिल होने पर वैभव ने टीम की कमान संभाली और मैदान पर अपने फैसलों से भी प्रभावित किया। फाइनल में साउथ जोन के खिलाफ भी उनका बल्ला चला और उन्होंने 44 रन की तेज पारी खेली।
दलीप ट्रॉफी ने वैभव के खेल का एक दूसरा पहलू दिखाया। सफेद गेंद की विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले इस युवा खिलाड़ी ने लाल गेंद के क्रिकेट में भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। सेंट्रल जोन के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने पहली पारी में 92 रन बनाए और दूसरी पारी में भी तेज 40 रन जोड़े।
यहां सिर्फ रन महत्वपूर्ण नहीं थे। दलीप ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नामेंट में सीनियर खिलाड़ियों के बीच खेलते हुए वैभव ने दिखाया कि उनका खेल सिर्फ तेज गेंदबाजों पर बड़े शॉट लगाने तक सीमित नहीं है। ईस्ट जोन के लिए खेलते हुए उन्हें नेतृत्व की जिम्मेदारी भी मिली। कप्तान ईशान किशन के चोटिल होने पर वैभव ने टीम की कमान संभाली और मैदान पर अपने फैसलों से भी प्रभावित किया। फाइनल में साउथ जोन के खिलाफ भी उनका बल्ला चला और उन्होंने 44 रन की तेज पारी खेली।