खून के रिश्ते भले ही नहीं हैं, लेकिन भावना ऐसी कि रक्षाबंधन पर सहकर्मी बहन-भाई बन गए। राखी बंधवाई और एकदूसरे की स्वस्थ सेहत की प्रार्थना भी की। रक्षाबंधन के दिन ऐसे ही नए रिश्ते एसएन मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में बने। यहां पर चिकित्सकों ने एक्सरे टेक्नीशियन को राखी बांधी तो लंबे समय से कोविड अस्पताल के आईसीयू में ड्यूटी कर रहे महिला डॉक्टर ने अपने दो साथियों को राखी बांधकर भाई पुकारा। इस पर दोनों की आंखें भर आईं।
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राखी बंधवाने के बाद आशीर्वाद लेते एक्सरे टेक्नीशियन
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कोविड अस्पताल आइसीयू सह प्रभारी डॉ. अनामिका मिश्रा के भाई आस्ट्रेलिया में हैं। रक्षाबंधन पर सुबह फोन पर बात की, लेकिन भाई को राखी न बांधने का मलाल भी था। दूसरे चैंबर में एक्सरे टेक्नीशियन तरुण गुमसुम बैठा था। उन्होंने कहा, क्यों... राखी बंधवाने घर नहीं जा रहे। इस पर तरुण बोला, मेरी बहन नहीं है। उसकी उदासी नहीं देखी और बोली, चल उदास न हो मैं राखी बांधती हूं। यह सुनकर तरुण चहक गया, झटपट राखी मंगवाई और कलाई पर सजा दी। पैर छूकर उसने दीदी से आशीर्वाद भी लिया।
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राखी का तिलक करती महिला चिकित्सक
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नेस्थीसिया विभाग की डॉ. अनामिका और डॉ. अविरल और डॉ. नरेंद्र कुमार लंबे समय से साथ-साथ कोविड अस्पताल में मरीजों को देख रहे हैं। अनामिका बोली, दोनों ही मेरी बहन की तरह देखभाल और चिंता करते। मेरा भाई और परिवार धनबाद में रहता है, संक्रमित मरीजों के इलाज में ड्यूटी लगे होने के कारण घर नहीं जा पा रही तो उन्होंने हैप्पी रक्षाबंधन बोला, इस पर दोनों ने कहा कि खाली बधाई, राखी कहां है। यह सुनकर कुमारी का चेहरा खिल गया, झटपट राखी और चंदन-टीका की व्यवस्था की और दोनों की कलाई पर राखी बांधी।
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एसएन के कोविड अस्पताल में राखी का तिलक करतीं चिकित्सक
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एसएन कॉलेज के स्त्री रोग विभाग की डॉ. रुचिका गर्ग ने बताया कि उनका भाई मध्यप्रदेश में मजिस्ट्रेट हैं। कोरोना वायरस के चलते ड्यूटी के कारण वह भाई के घर नहीं जा पाईं। मन बहुत उदास था। सुबह भाई से वीडियो कॉल के जरिये बात की। भाई ने भी हौसला बढ़ाया और कहा कि महामारी का दौर है, मरीजों की सेवा मन से करो।
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कोविड अस्पताल में राखी के लिए तिलक करतीं महिला चिकित्सक
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एसएन मेडिकल कॉलेज के कोविड आईसीयू प्रभारी डॉ. राजीव पुरी ने बताया दिल्ली में बहन रहती हैं। हर साल वह आगरा आकर राखी बांधती थी, कभी मैं भी दिल्ली चला जाता था, इस बार कोरोना वायरस से बुरा हाल है। मेरी ड्यूटी आईसीयू में है तो छुट्टी को कोई मतलब ही नहीं, दिल्ली के हालात भी ठीक नहीं हैं। फोन पर बहन से बात हुई तो मन कुछ हल्का हुआ। उन्होंने कहा कि मरीजों के भाई बनकर इलाज करो, सब ठीक हो जाएगा।