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खबरों के खिलाड़ी: आकाश के कभी बसपा में कभी बाहर होने से किसे फायदा? विश्लेषकों ने बताया 2027 में क्या होगा असर

Sat, 12 Sep 2026 09:12 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 12 Sep 2026 09:12 PM IST
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Khabaron Ke Khiladi BSP Inside Tussle Mayawati Akash Anand Ashok Siddharth UP Election 2027 Expert Analyse
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में उथल-पुथल का दौर जारी है। अब मायावती ने अपने उत्तराधिकारी कहे जा रहे आकाश आनंद को तीन साल के भीतर तीसरी बार राष्ट्रीय संयोजक के पद से मुक्त कर दिया। इस बार मायावती इतने पर भी नहीं रुकीं उन्होंने आकाश को पार्टी से स्वतंत्र करने की भी घोषणा कर दी। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में बसपा में मची इसी उथल-पुथल पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी और राकेश शुक्ल मौजूद रहे। 
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रामकृपाल सिंह: मैंने उत्तर प्रदेश में जो जमीनी स्तर पर देखा है। वहां बसपा का मतलब मायावती है। जो भी घटनाक्रम हो रहे हैं वो नेताओं और पत्रकारों में चर्चा के विषय जरूर हैं, लेकिन उनके वोटर के लिए मायावती ही बसपा हैं। पूरी राष्ट्रीय राजनीति में मतदाता नेपोटिजम की राजनीति के खिलाफ है। मायावती ये संदेश देना चाहती हैं कि परिवार बाद में है, पार्टी ऊपर है। इस वजह से हो सकता है मायावती को इसका फायदा हो जाए। मायावती को इस कदम से फायदा हो न हो नुकसान नहीं हो सकता है। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: मुझे लगता है कि मायावती इस वक्त एक बहुत की अनिश्चित दौर से गुजर रही हैं। वो खुद तय नहीं कर पा रही हैं कि आखिर करना क्या है? आकाश आनंद को वो बार-बार लेकर आ रही हैं और निकाल रही हैं। आकाश आनंद को अगर आप देखेंगे तो युवा दलित वोटर उनकी ओर आकार्षित हो रहा है। युवा आज हर पार्टी के लिए जरूरी बना हुआ है। अगर मायावती उन्हें बाहर करके किसी फायदे की उम्मीद कर रही हैं तो मुझे नहीं लगता इससे फायदा होगा। मुझे लगता है कि ये परिवार की खींचतान ज्यादा है। 
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राकेश शुक्ल: आखिर ये घटनाक्रम क्यों हुआ, मेरी समझ में ये नहीं आ रहा है। अगर अशोक सिद्धार्थ इतने ईमानदार थे तो उन्हें सफाई क्यों देनी पड़ी कि मैंने पार्टी तोड़ने की कोशिश नहीं की। क्या इससे ये नहीं लगता कि चोर की दाढ़ी में तिनका। यानी मायावती को जो आशंका है वो सही है। ये सभी सवाल अशोक सिद्धार्थ के पोस्ट बाद खड़े हो गए हैं। ये भी सच्चाई है कि जब-जब बसपा कमजोर हुई है इसका फायदा भाजपा को मिला है। मायावती खुद को ममता बनर्जी नहीं बनने देना चाहती हैं। 

विनोद अग्निहोत्री: मायावती जिस पार्टी को लीड कर रही हैं वो एक मिशन से बनी है। कांशीराम ने अपने परिवार को पार्टी से दूर रखा, तमाम नेता तैयार किए। जब उन्होंने मायावती को अपनी विरासत सौंपी तो उन्होंने किसी को बर्दास्त नहीं किया और कांशीराम के सभी वफादारों को एक-एक करके बाहर कर दिया। कांशीराम जिस पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी बनाना चाहते थे, लेकिन मायावती ने उस पार्टी को रणनीतिक तौर पर यूपी का पार्टी बना दिया।
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