मंजू के जज्बे को सलाम, पहुंची वहां जहां सांस लेना भी मुश्किल
कहते हैं जुनून और हिम्मत के आगे पहाड़ भी नतमस्तक हो जाते हैं। इसी कहावत को 40 साल की उम्र में सच कर दिखाया है कांगड़ा जिले की एक महिला टीचर ने। तस्वीर में दिखी कैलाश पर्वत की एक झलक ने मानसरोवर यात्रा की पूरी पटकथा लिख डाली।
मंजू के जज्बे को सलाम, पहुंची वहां जहां सांस लेना भी मुश्किल
इस साल मानसरोवर यात्रा को पूरी करने वालों में मंजू कटोच सकलानी भी शामिल हैं। उन्होंने दिल्ली से दूरभाष पर ‘अमर उजाला’ के साथ अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए। 6000 मीटर की ऊंचाई पर जहां इंसान को सांस लेना मुश्किल हो जाता है, इतनी ऊंचाई पर 219 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा को मंजू ने 22 दिन में पूरा कर लिया।
मंजू के जज्बे को सलाम, पहुंची वहां जहां सांस लेना भी मुश्किल
उन्होंने बताया कि कैलाश मानसरोवर
को लेकर 11वीं कक्षा में एक चैप्टर में पढ़ा था। मन में कैलाश पर्वत को
देखने की इच्छा जागी। हालांकि, उन्होंने बीते साल भी कैलाश मानसरोवर यात्रा
के लिए आवेदन किया, लेकिन सर्जरी के कारण यात्रा को टालना पड़ा।
मंजू के जज्बे को सलाम, पहुंची वहां जहां सांस लेना भी मुश्किल
एक्सटर्नल
अफेयर्स मिनिस्ट्री से 14वें बैच के लिए देश भर से महज 51 यात्रियों की
लिस्ट जारी हुई। इसमें उनका नाम भी था। यात्रा पूरी करने से पहले उनकी 16
बार मेडिकल जांच हुई।
मंजू के जज्बे को सलाम, पहुंची वहां जहां सांस लेना भी मुश्किल
उत्तराखंड का लिपूलेक पार करने के बाद उनके दल
ने तिब्बत सीमा में प्रवेश किया। उनके मुताबिक सुरक्षा के लिए आईटीबीपी
जवान यात्रा के दौरान उनके साथ रहे। तिब्बत बॉर्डर पार करने के बाद चीनी
गाइडों ने भरपूर सहयोग दिया।