जम्मू-कश्मीर में कोरोना संक्रमण पर रोकथाम के लिए यंग गांधियन ग्रुप की प्रतिनिधि प्रिया वर्मा ने युवा गांधीवादियों के एक समूह की चर्चा को आधार बनाकर प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र लिखा है। इसमें कोरोना महामारी से निपटने के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना और सर्वदलीय बैठक पर जोर दिया गया है। गृह मंत्रालय के अंतर्गत अपराध विज्ञान एवं न्यायिक विज्ञान संस्थान से स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त प्रिया संयुक्त राष्ट्र डीजीसी, न्यूयॉर्क में एनजीओ प्रतिनिधि भी रह चुकी हैं।
प्रधानमंत्री के नाम लिखे खुले पत्र में उन्होंने कहा है कि कोरोना महामारी की चुनौती से निपटने के लिए जन-जन का सहयोग लेने की जरूरत है। प्रधानमंत्री यदि सभी राजनीतिक पार्टियों की बैठक बुलाते हैं तो कोरोना के खिलाफ जंग जीतने में आसानी होगी। उन्होंने कहा है कि सभी राजनीतिक दलों के सदस्याें की संख्या देशभर में 15 करोड़ है। ऐसे में यदि एक-एक सदस्य को भी आठ लोगाें की जिम्मेदारी दी जाए तो कोरोना के खिलाफ जंग को जीता जा सकता है।
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस
- फोटो : बासित जरगर
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विशेष पहल कर राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार करें, जिसमें विशेषज्ञों की राय को विशेष रूप से शामिल किया जाए। यह कार्ययोजना हमें कोरोना की लहरों और उसमें अलग-अलग म्यूटेंट्स से बचाव का रास्ता आसान करेगी। इस कार्ययोजना की अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री करें और एक ही कमान के तहत नीचे तक सारी कार्यवाही को अंजाम दिया जाए।
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस
- फोटो : बासित जरगर
इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर से लेकर ग्राम स्तर तक टास्क फोर्स बने जिसमें सिविल सोसायटी, पंचायती राज प्रणाली (जिसमें जिला, ब्लाक एवं ग्राम सभा के निर्वाचित सभी सदस्य) और प्रशासन की भागीदारी हो। इस टास्क फोर्स में देश के हर नागरिक को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस
- फोटो : बासित जरगर
बता दें जम्मू-कश्मीर में शहर और कस्बों से होकर कोरोना संक्रमण दूरदराज पर्वतीय इलाकों में भी पहुंच गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं से लेकर सैंपल जांच प्रक्रिया के पर्याप्त इंतजाम न होने की वजह से हालात चिंताजनक हो गए हैं। यहां कोरोना वैक्सीन, सैंपल जांच और समय पर उपचार की व्यवस्था का भारी अभाव है।
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला
कठुआ जिले के पर्वतीय क्षेत्र बनी सब डिवीजन में पिछले दो सप्ताह में छह संक्रमितों की मौत हो चुकी है। डुग्गन ब्लॉक में बड़ी संख्या में लोगों को खांसी-बुखार की शिकायत सामने आ रही है, लेकिन कोरोना टेस्ट न होने से ऐसे मामलों पर स्थिति साफ नहीं हो पाई है। वहीं स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि दूरदराज इलाकों में सुविधाओं की कमी और कोरोना संक्रमण की मार से लोगों की जान खतरे में है। इसे लेकर विशेष जांच अभियान चलाया जाना चाहिए।