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तीन महीने में विजिलेंस पूरी करेगी अवैध नियुक्ति की जांच
Updated Sun, 15 Jul 2018 11:06 PM IST
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खेमराज शर्मा
बिलासपुर। वर्ष 2015 में बिलासपुर में रहे तत्कालीन कानूनगो और वर्तमान नायब तहसीलदार पर विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है। उक्त अधिकारी पर गलत दस्तावेज पेश कर नौकरी लेने का आरोप है। इस संबंध में फोरलेन प्रभावित एवं विस्थापित समिति ने विजिलेंस को साक्ष्यों के साथ शिकायत दी थी, जिस पर अब विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है। वहीं जांच पूरी करने के लिए तीन महीने का समय तय किया है। विजिलेंस से जारी पत्र संख्या 1753 दिनांक 5-7-2018 में बताया गया है कि इस संबंध में विभिन्न विभागों से जानकारी ली जा रही है जिसकी जांच के लिए तीन महीने का समय लगेगा।
अधिकारी पर समिति ने आरोप लगाया था कि उक्त अधिकारी ने पूर्व सैनिक के नाम पर सरकारी पटवारी के पद पर नियुक्ति करवाई थी। इसके बाद यह प्रमोट होकर कानूनगो और अब नायब तहसीलदार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा है। समिति ने आरोप लगाया है कि उक्त अधिकारी न तो पूर्व सैनिक, न आईआईआरडीपी की श्रेणी में आता है। जबकि पूर्व सैनिक के पुत्र(एक्स सर्विस मैन अवार्डी) के नाम पर उस वक्त कोई पद ही नहीं था। ऐसे में उक्त अधिकारी को नौकरी कैसे मिल गई जिस संबंध में समिति ने विजिलेंस को 14-12-2016 को शिकायत दी थी। इस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की जा रही थी। इसके बाद समिति की ओर से इस मामले को लेकर मुख्य सचिव प्रदेश सरकार को पत्र लिख कर कार्रवाई की मांग की थी। वहीं विजिलेंस से सूचना के अधिकार के तहत मामले पर अभी क्या कार्रवाई हुई उसकी जानकारी मांगी थी।
इस पर सूचना अधिकारी एएसपी विजिलेंस मंडी कुलभूषण वर्मा ने पंत्र संख्या 1753 दिनांक 5-7-2018 के तहत जानकारी दी है कि इस मामले पर कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए तीन महीने का समय तय किया गया है क्योंकि अभी कई विभागों से जानकारी जुटाई जा रही है।
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बिलासपुर। वर्ष 2015 में बिलासपुर में रहे तत्कालीन कानूनगो और वर्तमान नायब तहसीलदार पर विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है। उक्त अधिकारी पर गलत दस्तावेज पेश कर नौकरी लेने का आरोप है। इस संबंध में फोरलेन प्रभावित एवं विस्थापित समिति ने विजिलेंस को साक्ष्यों के साथ शिकायत दी थी, जिस पर अब विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है। वहीं जांच पूरी करने के लिए तीन महीने का समय तय किया है। विजिलेंस से जारी पत्र संख्या 1753 दिनांक 5-7-2018 में बताया गया है कि इस संबंध में विभिन्न विभागों से जानकारी ली जा रही है जिसकी जांच के लिए तीन महीने का समय लगेगा।
अधिकारी पर समिति ने आरोप लगाया था कि उक्त अधिकारी ने पूर्व सैनिक के नाम पर सरकारी पटवारी के पद पर नियुक्ति करवाई थी। इसके बाद यह प्रमोट होकर कानूनगो और अब नायब तहसीलदार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा है। समिति ने आरोप लगाया है कि उक्त अधिकारी न तो पूर्व सैनिक, न आईआईआरडीपी की श्रेणी में आता है। जबकि पूर्व सैनिक के पुत्र(एक्स सर्विस मैन अवार्डी) के नाम पर उस वक्त कोई पद ही नहीं था। ऐसे में उक्त अधिकारी को नौकरी कैसे मिल गई जिस संबंध में समिति ने विजिलेंस को 14-12-2016 को शिकायत दी थी। इस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की जा रही थी। इसके बाद समिति की ओर से इस मामले को लेकर मुख्य सचिव प्रदेश सरकार को पत्र लिख कर कार्रवाई की मांग की थी। वहीं विजिलेंस से सूचना के अधिकार के तहत मामले पर अभी क्या कार्रवाई हुई उसकी जानकारी मांगी थी।
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इस पर सूचना अधिकारी एएसपी विजिलेंस मंडी कुलभूषण वर्मा ने पंत्र संख्या 1753 दिनांक 5-7-2018 के तहत जानकारी दी है कि इस मामले पर कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए तीन महीने का समय तय किया गया है क्योंकि अभी कई विभागों से जानकारी जुटाई जा रही है।
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