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नाबालिग के बालिका वधू बनने पर नहीं लग रहा अंकुश, सात महीने में 26 मामले आए सामने

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jul 2021 12:36 AM IST
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There is no control on the minor becoming a girl bride, 26 cases came to the fore in seven months
मुनीष कुमार
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हिसार। बाल विवाह कानूनन अपराध है। इस बारे में प्रशासन की ओर से समय-समय पर शिविर लगाकर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है, इसके बावजूद बाल नाबालिग के बालिका वधू बनने पर अंकुश नहीं लग रहा है। इस वर्ष जनवरी से अब तक 26 मामले बाल विवाह के सामने आ चुके हैं। इनमें 2 से 3 केस लड़के से संबंधित रहे।
जनवरी से अब तक आए 26 मामलों में से 20 मामलों में काउंसिलिंग की गई। इस दौरान नाबालिग के परिवार वालों को बाल विवाह निषेध अधिकारी की तरफ से समझाया गया और बाल विवाह रुकवाया गया। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एक मामले में ही केस दर्ज किया गया। वहीं चार मामलों में अभी जांच जारी है। सबसे ज्यादा 8 मामले जुलाई में में ही आए हैं। वहीं मार्च में एक भी मामला सामने नहीं आया था। जानकारी के अनुसार 26 मामलों के अलावा एक मामला झूठा पाया गया। दरअसल कई बार रंजिशन या गलती से दूल्हा या दुल्हन की उम्र का स्वयं ही अंदाजा लगा बैठते हैं। ऐसे में विभाग को सूचित कर दिया जाता है। विभाग की टीम जब मौके पर पहुंचकर जांच करती है तो मामला झूठा पाया जाता है।
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अधिकारियों ने बताया कि शादी के लिए लड़की की उम्र 18 वर्ष से ज्यादा व लड़के की 21 वर्ष से ज्यादा उम्र होनी चाहिए। एक सप्ताह पहले गांव बधावड़ में टीम ने पहुंचकर 17 व 15 वर्षीय नाबालिग की शादी रुकवाई थी। इनमें से एक की शादी 20 जुलाई को उसकी जींद में शादी होनी थी। सूचना मिलते ही जिला महिला संरक्षण एवं बाल निषेध अधिकारी बबीता चौधरी, सहायक सचिन मेहता व बरवाला थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शादी को रुकवाया था। छोटी बेटी की शादी चंडीगढ़ तय की गई थी और गोद भी भर दी गई थी। विभाग की टीम ने दोनों शादी रुकवा कर दोबारा से निरीक्षण करने की बात कही थी। वहीं टीम ने कुछ दिन पहले लुदास में बाल विवाह रुकवाया था।
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आंकड़ों पर एक नजर
माह बाल विवाह काउंसिलिंग झूठी सूचना केस दर्ज जांच बाकी
जनवरी 03 03 -- -- -- -- --
फरवरी 03 03 -- -- -- -- --
माच -- -- -- -- -- -- --
अप्रैल 01 01 -- -- -- -- --
मई 07 04 -- -- -- -- 03
जून 04 02 -- 01 01
जुलाई 08 07 01 -- --
बाल विवाह के मुख्य कारण
- गरीब, शिक्षा, जागरूकता का अभाव
- प्रेम प्रसंग
- बेटियों की सुरक्षा, राह से भटकने का डर
- आटा-साटा कुप्रथा, दो बहनों का एक साथ विवाह
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत बाल विवाह करने पर दो वर्ष तक की सजा व एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी हो सकता है। - संदीप बूरा, अधिवक्ता, जिला बार सचिव, हिसार

जब भी बच्चों की शादी करते हैं तो उससे पहले बच्चों की उम्र अवश्य जांच लें। क्योंकि अगर कोई शिकायत करता है तो उनके परिवार वालों के साथ-साथ टीम को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। नाबालिग की शादी करना कानूनन अपराध है। - बबीता चौधरी, जिला महिला संरक्षण एवं बाल निषेध अधिकारी
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