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नए बचे 4, रिसोल टायर खत्म, ठेकेदार के कर्मचारी नहीं आने पर प्लांट बंद
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हिसार डिपो के रिसोल प्लांट में रखे हुए रिसोल करने के लिए बसों के टायर।
- फोटो : Hisar
हिसार। रोडवेज के हिसार डिपो में एक भी रिसोल टायर नहीं बचा है। ठेकेदार के कर्मचारी नहीं आने के कारण दो दिन से प्लांट बंद पड़ा है। फिलहाल स्टॉक में चार नए टायर ही बचे हैं। अब कर्मचारी आने के बाद ही पुराने टायरों को रिसोल किया जाएगा। टायरमैन रूपचंद के अनुसार सोमवार को ठेकेदार के कर्मचारी आने की उम्मीद है।
बता दें कि रोजाना तीन से चार रिसोल टायर बसों में लगाए जाते हैं। मगर, प्लांट में एक भी टायर तैयार नहीं है। प्लांट में 320 टायर ऐसे रखे हुए हैं, जिन्हें रिसोल किया जाना है। ठेकेदार के कर्मचारियों की ओर से रोजाना 16 पुराने टायरों को रिसोल किया जाता है, लेकिन दो दिन से कर्मचारी नहीं आने के कारण एक भी टायर रिसोल नहीं किया गया है। यदि समय पर नए टायर नहीं पहुंचे और पुराने टायर रिसोल नहीं हुए तो टायरों के अभाव में रोडवेज बसें खड़ी हो सकती हैं।
30 हजार से 35 हजार किलोमीटर तक चलता है रिसोल टायर
बस में लगा नया टायर 45 हजार से 50 हजार किलोमीटर तक चल जाता है। वहीं, रिसोल टायरों को पीछे लगाया जाता है। एक बार रिसोल किया टायर 30 हजार से 35 हजार किलोमीटर तक निकाल देता है। वहीं, प्लांट में ऐसे कई टायर भी रखे हुए हैं, जो रिसोल नहीं हो सकते हैं। उन टायरों के अंदर से तारें और रबड़ निकल चुका है, जिन्हें अब कंडम घोषित किया जा चुका है।
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हरियाणा में तीन जगह ही रिसोल प्लांट
टायरमैन के अनुसार हरियाणा में तीन जगह ही रिसोल प्लांट है। इनमें करनाल, गुरुग्राम और हिसार जिला शामिल हैं। हिसार की बात करें तो यहां फतेहाबाद, जींद, सिरसा, चरखी दादरी, लोहारू, भिवानी सहित अन्य जिलों से टायर रिसोल के लिए पहुंचते हैं।
टायर रिसोल होने में लगता है चार घंटे का समय
मशीन में एक साथ आठ टायरों को रिसोल किया जाता है। इसमें चार घंटे का समय लगता है। वहीं, टायरों को रिसोल करने की प्रक्रिया लंबी होती है। सबसे पहले टायर को मशीन पर चढ़ाकर वफिंग की जाती है। उसके बाद टायरों के गड्ढे भरे जाते हैं। फिर वोडिंग गम भरा जाता है, जोकि रबड़ का होता है। उसके बाद टायर के ऊपर इनोलेफ चढ़ाया जाता है। फिर टायरों में हवा भरने के लिए टयूनिंग बैग लगाया जाता है। उसके बाद चेंबर मशीन में आठ टायर एक साथ लगाए जाते हैं। इन टायरों को रिसोल होने में चार घंटे का समय लगता है।
ठेकेदार के दो कर्मचारी रोजाना 16 टायरों को रिसोल करते हैं। मगर दो दिन से कर्मचारी नहीं आने के कारण रिसोल प्लांट बंद पड़ा है। फिलहाल कोई टायर रिसोल नहीं किया जा रहा है। सोमवार को ठेकेदार के कर्मचारी के आने की उम्मीद है। उसके बाद ही टायर रिसोल हो सकेंगे।
- रूपचंद, टायरमैन, रोडवेज
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बता दें कि रोजाना तीन से चार रिसोल टायर बसों में लगाए जाते हैं। मगर, प्लांट में एक भी टायर तैयार नहीं है। प्लांट में 320 टायर ऐसे रखे हुए हैं, जिन्हें रिसोल किया जाना है। ठेकेदार के कर्मचारियों की ओर से रोजाना 16 पुराने टायरों को रिसोल किया जाता है, लेकिन दो दिन से कर्मचारी नहीं आने के कारण एक भी टायर रिसोल नहीं किया गया है। यदि समय पर नए टायर नहीं पहुंचे और पुराने टायर रिसोल नहीं हुए तो टायरों के अभाव में रोडवेज बसें खड़ी हो सकती हैं।
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30 हजार से 35 हजार किलोमीटर तक चलता है रिसोल टायर
बस में लगा नया टायर 45 हजार से 50 हजार किलोमीटर तक चल जाता है। वहीं, रिसोल टायरों को पीछे लगाया जाता है। एक बार रिसोल किया टायर 30 हजार से 35 हजार किलोमीटर तक निकाल देता है। वहीं, प्लांट में ऐसे कई टायर भी रखे हुए हैं, जो रिसोल नहीं हो सकते हैं। उन टायरों के अंदर से तारें और रबड़ निकल चुका है, जिन्हें अब कंडम घोषित किया जा चुका है।
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हरियाणा में तीन जगह ही रिसोल प्लांट
टायरमैन के अनुसार हरियाणा में तीन जगह ही रिसोल प्लांट है। इनमें करनाल, गुरुग्राम और हिसार जिला शामिल हैं। हिसार की बात करें तो यहां फतेहाबाद, जींद, सिरसा, चरखी दादरी, लोहारू, भिवानी सहित अन्य जिलों से टायर रिसोल के लिए पहुंचते हैं।
टायर रिसोल होने में लगता है चार घंटे का समय
मशीन में एक साथ आठ टायरों को रिसोल किया जाता है। इसमें चार घंटे का समय लगता है। वहीं, टायरों को रिसोल करने की प्रक्रिया लंबी होती है। सबसे पहले टायर को मशीन पर चढ़ाकर वफिंग की जाती है। उसके बाद टायरों के गड्ढे भरे जाते हैं। फिर वोडिंग गम भरा जाता है, जोकि रबड़ का होता है। उसके बाद टायर के ऊपर इनोलेफ चढ़ाया जाता है। फिर टायरों में हवा भरने के लिए टयूनिंग बैग लगाया जाता है। उसके बाद चेंबर मशीन में आठ टायर एक साथ लगाए जाते हैं। इन टायरों को रिसोल होने में चार घंटे का समय लगता है।
ठेकेदार के दो कर्मचारी रोजाना 16 टायरों को रिसोल करते हैं। मगर दो दिन से कर्मचारी नहीं आने के कारण रिसोल प्लांट बंद पड़ा है। फिलहाल कोई टायर रिसोल नहीं किया जा रहा है। सोमवार को ठेकेदार के कर्मचारी के आने की उम्मीद है। उसके बाद ही टायर रिसोल हो सकेंगे।
- रूपचंद, टायरमैन, रोडवेज