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नवंबर से अक तक 50 लोग ब्रिटेन से आए, सभी की होगी जांच

Fri, 25 Dec 2020 01:32 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 25 Dec 2020 01:32 AM IST
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50 people come from Britain, their will test
हिसार। कोरोना के मामले में स्वास्थ्य विभाग अब फिर वहीं प्रक्रिया अपनाएगा, जो शुरुआत में अपनाई थी। इसका कारण है कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन। अब स्वास्थ्य विभाग विदेश से आने वाले लोगों की ट्रेवल हिस्ट्री लेगा। नवंबर से लेकर अभी तक ब्रिटेन से करीब 50 लोग हिसार पहुंच चुके हैं। विभाग इन सभी लोगों की पिछलेे 14 दिनों के अंतराल की ट्रैवल हिस्ट्री लेगा। इस बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने वीसी के जरिये बैठक कर जिला स्वास्थ्य विभाग को निर्देश जारी किए हैं।
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विदेशों से लौटे लोगों के लिए जाएंगे आरटीपीसीआर सैंपल
विदेश से लौटने वालों में कुछ लोग एनआरआई हैं, जो वहां रह रहे हैं और कुछ लोग ऐसे हैं, जो वहां पर पढ़ाई या नौकरी के लिए गए हुए थे। जैसेे ही हवाई यात्रा शुरू हुई तो ये सभी लोग भारत लौट आए। स्वास्थ्य विभाग के पास इन लोगों की सूची पहुंच गई है, जो कोविड-19 नोडल इंचार्ज डॉ. रमेश पूनिया को सौंप दी गई है। विभाग अब उन सभी लोगों को ट्रेस करेगी। उन सभी लोगों के आरटीपीसीआर सैंपल लिए जाएंगे। इसके बाद इन सभी को 28 दिन के लिए क्वारंटीन किया जाएगा, ताकि संक्रमण ना फैले।
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इस बार नहीं करनी पड़ेगी ज्यादा जद्दोजहद
इस बार विभाग को ज्यादा जद्दोजहद नहीं करनी पड़ेगी, क्योंकि कोरोना के शुरू के दौर में जो लोग विदेशों से आए थे। इस समय विदेश से आए ज्यादातर लोग भी उन्हीं लोगों के परिजन हैं। यह बात का पता उस दौरान चला, जब डॉ. रमेश पूनिया ने सूची देखकर उनके घर फोन मिलाने शुरू किए। इनमें से ज्यादातर लोगों ने खुद अस्पताल आकर जांच कराने की बात कही।
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यह है वायरस का नया स्ट्रेन
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अजय चुघ के अनुसार इस वायरस में कुछ जीन अलग पाए गए हैं और इसकी पहले वाले वायरस के मुकाबले 70 प्रतिशत फैलने की क्षमता अधिक है। उदाहरण के तौर पर पहले वाला वायरस एक से तीन तो यह एक से 5 से सात लोगों तक जल्दी से फैल सकता है। ब्रिटेन में ऐसे केस देखने को मिले हैं, जिनका स्ट्रेन सीक्वेंसेस टेस्ट किया गया है। ब्रिटेन की स्टडी में यह जानकारी सामने आई है। फिलहाल भारत में ऐसा कोई केस देखने को नहीं मिला है। यदि वायरस के नए स्ट्रेन का कोई केस मिलता है तो उसका सबसे पहले पुणे लैब में स्ट्रेन सीक्वेंसेस टेस्ट किया जाएगा। जिसके तहत रिसर्च की जाएगी की उसके आरएनए यानी जीन किस चीज के बने हैं। ऐसी कोई बात नहीं है कि नया वायरस के आने से ट्रीटमेंट बदल जाएगा। इस बारे में अभी कोई नई गाइडलाइन नहीं आई है।

युवाओं को भी अधिक सतर्क रहने की जरूरत
चिकित्सकों के मुताबिक अब युवाओं को भी अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि यह वायरस युवाओं में भी तेजी से फैलता है। कोरोना का पहले वाला वायरस युवाओं की अपेक्षा बुजुर्गों में तेजी से फैल रहा था और उसे केवल बुजुर्गों को ही खतरा था। मगर यह युवाओं को भी तेजी से शिकार बना रहा है। ब्रिटेन में भी इस वायरस के लक्षण युवाओं में ज्यादा पाए गए हैं।
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