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Hisar News: 2016 जाट आरक्षण आंदोलन मामले में 17 आरोपी बरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2026 12:31 AM IST
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17 accused acquitted in 2016 Jat reservation agitation case.
जाट आरक्षण मामले में बरी हुए ग्रामीण
हिसार। 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़े मामले में जेएमआईसी की अदालत ने 17 आरोपियों को बरी कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अविषेक गर्ग की अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की पहचान और सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान के आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
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अग्रोहा थाना पुलिस ने वर्ष 2016 में राष्ट्रीय राजमार्ग-10 जाम करने और तोड़फोड़ के आरोप में यह प्राथमिकी दर्ज की थी। अदालत ने 11 सितंबर को फैसला सुनाया, जिसकी आदेश प्रति बुधवार को दी गई।
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फैसले के अनुसार आरोपियों में जगबीर, झाबर, मणीराम, जगदीश, सचिन पवार, प्रदीप, राजेश पहाड़ी, संजय, ओम प्रकाश, रमेश, सुरेश कुमार, सुल्तान, अनिल गोदारा, राम निवास, अमित ढाका, सुरेंद्र और एक अन्य जगदीश शामिल थे। इन पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं, सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए थे।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार 20 फरवरी 2016 को 50-60 लोगों ने अग्रोहा चौक पर राष्ट्रीय राजमार्ग-10 को अवरुद्ध कर वाहनों की आवाजाही रोक दी थी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था। अदालत ने माना कि घटना में 100 से 150 लोग शामिल होने की बात सामने आई थी, इसलिए आरोपियों की पहचान महत्वपूर्ण मुद्दा थी।
अदालत ने कहा कि घटना की कथित तस्वीरें कानून के अनुसार उचित तरीके से पेश और साबित नहीं की गईं। इसलिए तस्वीरों के आधार पर की गई पहचान को विश्वसनीय नहीं माना जा सकता। कई स्वतंत्र गवाह भी अपने बयानों से मुकर गए और उन्होंने अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया।

सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की प्रकृति और उसकी सीमा साबित करने के लिए भी संतोषजनक साक्ष्य नहीं मिला। इसके अलावा पुलिस अधिकारियों के घटनास्थल पर पहुंचने से संबंधित डीडी एंट्री भी रिकॉर्ड पर नहीं थी। पंजाब पुलिस नियम, 1934 के अनुसार पुलिस अधिकारियों के आगमन और प्रस्थान का रिकॉर्ड दर्ज करना अनिवार्य है। इन कमियों के चलते अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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