UPSC: हरियाणा के होनहारों ने कर दिया कमाल, पढ़ें यूपीएससी परीक्षा में परचम लहराने वाले छात्रों की कहानियां
देश के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना पूरा करने के लिए छात्रों को सबकुछ त्याग कर अर्जुन की तरह केवल मछली की आंख पर ध्यान लगाना पड़ता है। हर किसी के लिए ऐसा संभव नहीं है, लेकिन संसाधनों के अभाव और पारिवारिक कठिनाइयों को हंसते हंसते पार करने वाले मेधावी ही मंजिल तक पहुंच पाते हैं। यह कर दिखाया है हरियाणा के छोटे शहरों से लेकर मध्य वर्ग तक के परिवार के होनहारों ने। हम आपको बता रहे हैं यूपीएससी की परीक्षा में अपना परचम लहराने वाले ऐसे ही कुछ मेधावी छात्र-छात्राओं की कहानी-
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विस्तार
यूपीएससी टॉप करने वाले प्रदीप सिंह की उपलब्धि पर भले ही परिवार वालों के साथ ही अन्य सभी खुशी मना रहे हों। लेकिन खुद टॉपर प्रदीप सिंह व उनको आईएएस बनने के लिए प्रोत्साहित करने वाले पिता सुखबीर सिंह को एक बार यह विश्वास नहीं हुआ कि वह यूपीएससी टॉपर बन गए हैं।
जब यूपीएससी का परिणाम आया तो उस समय प्रदीप सिंह घर में आराम कर रहे थे और उस समय ही उनके पास दोस्त का फोन आया कि परिणाम आ गया है और वह टॉपर बन गए हैं। प्रदीप सिंह को विश्वास नहीं हुआ है और वह खुद अपना परीक्षा परिणाम देखने लगे। अपना परिणाम खुद देखने के बाद भी कुछ देर तक उन्हें लगा कि वह कोई सपना देख रहे हैं, लेकिन वह कोई सपना नहीं था, बल्कि सबकुछ सच था। और पढ़ें...
समाज में बदलाव लाना चाहती हैं रोहतक की सलोनी जैन
रेलवे रोड रोहतक निवासी सलोनी जैन ने मंगलवार को जारी यूपीएससी परीक्षा के परिणाम में 253वां रैंक हासिल किया है। अमर उजाला से हुई बातचीत में उन्होंने अपनी सफलता के पीछे के संघर्ष को साझा किया। सलोनी जैन ने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार व अन्याय देखकर इसे बदलने की मन में ठानी। इसके लिए दिल्ली के नेशनल कॉलेज ऑफ लॉ से कानून की पढ़ाई की। अपने पिता आदेश जैन को समाज में बदलाव की इच्छा बताई तो उन्होंने लॉ के बजाय सिविल सर्विस चुनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आप बदलाव के लिए प्रयास तब कर सकते हैं, जब किसी अच्छे पद पर हों। और पढ़ें...
नौकरी, शादी व बच्चे की जिम्मेदारियों को निभाते हुए मनीष ने पूरा किया सपना
समाज में आर्थिक व सामाजिक समानता का बदलाव लाना है। इसके लिए काम करना है। यह सोच है यूपीएससी परीक्षा में देश में 268वां रैंक पाने वाले शहर की नेहरू कॉलोनी में रहने वाले मनीष शर्मा की। आयकर विभाग पुणे में बतौर इंस्पेक्टर तैनात मनीष कुमार ने नौकरी, शादी व बच्चे की जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपना आईएएस बनने का सपना पूरा किया। और पढ़ें...
डॉ. पंकज यादव ने इस वजह से ठानी थी कि आईएएस बनना है
रेवाड़ी के गांव टींट निवासी डॉ. पंकज यादव ने यूपीएससी की परीक्षा तीसरे प्रयास में ऑल इंडिया 56वीं रैंक हासिल की है। पंकज यादव को 2018 में 589वीं रैंक मिली थी और वह आईपीएस बने थे। वह वर्तमान में इंफाल में बतौर एएसपी तैनात हैं। आईएएस बनने के सवाल पर यादव ने बताया कि वर्ष 2007 में 12वीं कक्षा के बाद बीसीबी का सर्टिफिकेट बनवाना था। इसके लिए ग्राम सचिव, पटवारी व एसडीएम के साइन होने थे। एक सर्टिफिकेट बनवाने के लिए कई दिनों तक चक्कर कटवाए गए। बस तभी मन में ठान लिया था कि आईएएस बनकर इस व्यवस्था को बदलना है। और पढ़ें...
करनाल के गांव अरडाना की चंद्रीमा अत्री ने पहली कोशिश में ही यूपीएससी की परीक्षा में ऑल इंडिया में 72वां रैंक पाया है। बचपन से चंद्रीमा को उसके दादा स्व. बीएल अत्री (इनकम टैक्स विभाग से डीटीओ रिटायर्ड) ने आईएएस बनने का सपना दिखाया था। चंद्रीमा ने बताया कि उसने ग्रेजुएशन दिल्ली से की और वहीं से एलएलबी की। साथ ही यूपीएससी की तैयारी की। और पढ़ें...
रिद्धिमा ने गलतियों को सुधारा और दूसरे प्रयास में पूरा कर लिया सपना
सेक्टर-24 की रहने वाली रिद्धिमा श्रीवास्तव ने आईएएस की परीक्षा में 74वीं रैंक हासिल की है। रिद्धिमा ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से वर्ष 2017 में इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है। उसके बाद वह सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी में जुट गई थी। रिद्धिमा के मुताबिक साल 2018 में भी परीक्षा दी लेकिन प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर सकी। निराश होने के बजाय उन्होंने फिर से तैयारी की और सफलता प्राप्त की। दूसरे प्रयास से पहले उन्होंने छोटी-छोटी गलतियों को सुधारा और उस पर काम किया। और पढ़ें...
मधुमिता ने तीसरे प्रयास में पूरा किया पिता अधूरा सपना
पानीपत की मधुमिता ने अपने तीसरे प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 86 ऑल इंडिया रैंक हासिल कर पानीपत का नाम रोशन किया है। उनकी इस सफलता में पिता का बड़ा योगदान है, जिन्होंने आईएएस की सीढ़ी चढ़ने का बेटी को हौसला दिया। पिता महावीर सिंह ने 1987 में आईएएस बनने का सपना देखा था। परीक्षा में बैठे लेकिन उत्तीर्ण नहीं हो सके। इसके बाद पिता ने दोबारा परीक्षा दी ही नहीं। और पढ़ें...
सरकारी स्कूल से पढ़े मनोज कुमार ने हासिल किया 732वां रैंक
बहादुरगढ़ के सरकारी स्कूल से 12वीं पास करने वाले वार्ड- 23 की शक्ति नगर कॉलोनी निवासी मनोज कुमार ने यूपीएससी परीक्षा में 732वां रैंक हासिल किया है। नगर परिषद बहादुरगढ़ की चेयरपर्सन शीला राठी समेत अनेक लोगों ने मनोज के घर पहुंचकर बधाई दी। मनोज कुमार ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बहादुरगढ़ से विज्ञान में 12वीं करने के बाद पंजाब के रोपड़ से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। फिर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड से फाइनेंस में एमबीए की। और पढ़ें...
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में हिसार के सेक्टर-14 निवासी अपराजित ने 174वीं रैंक हासिल की है। खास बात यह है कि उन्होंने पहले प्रयास में ही यह परीक्षा पास की है। अपराजित ने बताया कि वह हरियाणा कैडर में आना चाहते हैं। अपराजित ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2012 में सीबीएसई से दसवीं और 2014 में बारहवीं कक्षा पास की थी। और पढ़ें...
दर्पण ने तय किया डॉक्टर से आईएएस बनने तक का सफर
यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) परीक्षा में ऑल इंडिया 80वां रैंक हासिल करने वाली दर्पण आहलूवालिया की स्कूली पढ़ाई मोहाली और चंडीगढ़ में हुई। इसके बाद डिग्री पटियाला में हुई है। वर्ष 2011 में उन्होंने पटियाला के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की। 2017 में यह पूरी हुई। इसके तुरंत बाद ही 2018 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी। साक्षात्कार होने तक उनका लिस्ट में नाम नहीं आया। इसके बाद उन्होंने 2019 में दोबारा परीक्षा की तैयारी की और कड़ी मेहनत से इस बार सफलता उनके हाथ लगी। और पढ़ें...
तीन प्रयासों में असफल रहने पर भी हार नहीं मानी, चौथे प्रयास में हासिल की 222वीं रैंक
हिसार मंडलायुक्त विनय सिंह की बेटी देवयानी ने यूपीएससी की परीक्षा में 222वीं रैंक हासिल की है। देवयानी का यह चौथा प्रयास था। इससे पहले देवयानी ने वर्ष 2015, 2016 व 2017 में भी यह परीक्षा दी थी। वर्ष 2017 में तो वह इंटरव्यू स्टेज तक पहुंच गई थीं। तीन बार परीक्षा में असफल होने के बाद भी देवयानी ने हार नहीं मानी और चौथी बार में सफलता हासिल की। देवयानी फिलहाल राजस्थान के अलवर जिले में चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। और पढ़ें...
मेहनत के दम पर हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। लुधियाना सिविल लाइंस निवासी राघव जैन ने भी मेहनत कर मंगलवार को घोषित सिविल सर्विसेज के परिणाम में ऑल इंडिया स्तर पर 127वां रैंक हासिल किया है। राघव इस रैंक को हासिल करने का श्रेय अपने मन की इच्छा और स्मार्ट वर्क को देते हैं। इस मुकाम को हासिल करने के लिए वह चार साल से लगातार मेहनत कर रहे थे। पहले छह माह दिल्ली में रहकर परीक्षा की तैयारी की। इसके बाद वह लुधियाना लौट आए और यहीं तैयारी की। और पढ़ें...
किसान के बेटे का यूपीएससी में चयन, नौकरी छोड़ की तैयारी, हासिल की 232वीं रैंक
यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) में जींद जुलाना के वार्ड नंबर एक निवासी रिंकू लाठर का चयन हुआ है। उन्हें 232वीं रैंक मिली है। रिंकू के प्रदर्शन से परिवार में खुशी का माहौल है। रिंकू ने कहा कि चौथी बार में उसने यह परीक्षा पास की है। इससे पहले वह उदयपुर स्थित भारत पेट्रोलियम कंपनी में एक्जीक्यूटिव ऑफिसर रहते हुए 2016 में पहली बार परीक्षा दी थी। उसके साथ 2017 व 2018 में भी परीक्षा दी लेकिन नौकरी के दौरान पढ़ाई के लिए समय नहीं निकाल पाने के कारण वह परीक्षा में पास नहीं हो पाया था। इसके बाद 2018 में उसने नौकरी छोड़ दी और घर पर रहकर ही दिन में 13 से 14 घंटे पढ़ाई करते हुए यह मुकाम हासिल किया। और पढ़ें...
17 लाख के पैकेज की नौकरी छोड़ी, अभिषेक ने तीसरी बार में पास की परीक्षा
लोक सेवा आयोग का परिणाम मंगलवार को घोषित हो गया। नारनौल के गांव भांखरी निवासी अभिषेक ने 288वां रैंक हासिल किया। अभिषेक ने तीसरे प्रयास में यह परीक्षा उत्तीर्ण की। पिछले वर्ष अभिषेक ने 595 रैंक हासिल किया था। अभिषेक के पिता सरकारी अध्यापक है। आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण करने की खबर मिलते ही अभिषेक के घर पर लोगों का बधाई देने का तांता लगा रहा। और पढ़ें...
पिता हैं किसान और बेटे ने यूपीएससी परीक्षा में हासिल की 682वीं रैंक
हरियाणा के बाढ़डा कस्बे के गांव गोपालवास निवासी किसान के बेटे मंदीप पूनिया ने यूपीएससी परीक्षा में 682वीं रैंक प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। ग्रामीणों ने मंदीप पूनिया को बधाई दी है। गांव गोपालवास निवासी किसान पालेराम के पुत्र मंदीप पूनिया ने बारहवीं कक्षा शिक्षा भारती स्कूल से ग्रहण की। गणित विषय में रुचि होने के कारण दिल्ली के हिंदू कॉलेज से स्नातक और बाद में स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की। और पढ़ें...
कंचन ने हासिल की 35वीं रैंक, मम्मी-पापा ने दी परिणाम की जानकारी
सिरसा की कोर्ट कॉलोनी की रहने वाली कंचन सिंगला ने यूपीएससी 2019 की परीक्षा में ऑल इंडिया में 35वीं रैंक हासिल की है। कंचन ने यह उपलब्धि 24 साल की उम्र में प्राप्त की है। कंचन के पिता अनिल सिंगला शहर में चाटर्ड अकाउंटेंट हैं और माता प्रवीण सिंगला गृहिणी हैं। कंचन का एक छोटा भाई अनुज है, जो कि बीए ऑनर्स कर रहा है। और पढ़ें...