UPSC Result: मोहाली की दर्पण ने तय किया डॉक्टर से आईएएस का सफर, हासिल की आल इंडिया 80वीं रैंक
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यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) परीक्षा में ऑल इंडिया 80वां रैंक हासिल करने वाली दर्पण आहलूवालिया की स्कूली पढ़ाई मोहाली और चंडीगढ़ में हुई। इसके बाद डिग्री पटियाला में हुई है। वर्ष 2011 में उन्होंने पटियाला के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की। 2017 में यह पूरी हुई। इसके तुरंत बाद ही 2018 उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी। साक्षात्कार होने तक उनका लिस्ट में नाम नहीं आया। इसके बाद उन्होंने 2019 में दोबारा परीक्षा की तैयारी की और कड़ी मेहनत से इस बार सफलता उनके हाथ लगी। यूपीएससी की पढ़ाई के साथ वह एक गैर सरकारी संस्था के लिए काम कर रही थीं।
दर्पण बताती हैं कि मैं परिवार में चौथी पीढ़ी हूं जो डॉक्टर बनी। लेकिन मैं एक ही दायरे में काम नहीं करना चाहती थी, इसलिए मैंने यूपीएससी को अपने भविष्य के लिए चुना। दर्पण ने बताया कि जिस भी सेक्टर में सर्विस का मुझे आदेश होगा मैं उसके लिए पूरी तैयार हूं।
दर्पण ने बताया कि उनके पिता गुरिंदर सिंह वालिया ज्वाइंट डायरेक्टर एनिमल हस्बेंडरी डिपार्टमेंट पंजाब में हैं। वह मुझे भी डॉक्टर बनाना चाहते थे। इसलिए मैंने भी डॉक्टर बन कर उनका सपना पूरा किया। एक डॉक्टर होने के नाते मैंने 26 साल की उम्र में एमबीबीएस कर ली थी। एक डॉक्टर होते हुए मैंने माना कि अगर मैं अपनी डॉक्टर वाली फील्ड में काम करती रही तो मेरे काम का दायरा सीमित रह जाएगा। इसलिए आगे बढ़ने के लिए यह कदम उठाया, जिसमें लोगों के काम करने के साथ एक समाज सेवा भी शामिल है।
कॉलेज में पढ़ते हुए मैं एक एनजीओ चलाती थी और कॉलेज खत्म करने के बाद ब्रेस्ट कैंसर के लिए महिलाओं को जागरुक करने का भी काम किया है। मेरा कोई एक प्रेरणास्रोत नहीं रहा है, सिवाय मेरे माता-पिता के, जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया और पहली असफलता के बाद उनका साथ बना रहा। उन्होंने मेरे खाने-पीने से लेकर मेरे हर काम में पूरा सहयोग दिया है।
उन्होंने बताया कि परिवार में हम पांच लोग हैं। पिता गुरिंदर सिंह वालिया ज्वाइंट डायरेक्टर ऑफ पंजाब एनिमल हस्बेंडरी डिपार्टमेंट फतेहगढ़ साहिब में एडिशनल चार्ज ऑफ हेडक्वार्टर हैं। वहीं मां नवनीत वालिया भी पूर्व प्राध्यापक रह चुकी हैं। मेरी बड़ी बहन अमेरिका में रहती है और छोटा भाई इंजीनियरिंग कर रहा है। स्कूल और कॉलेज के समय मैं हमेशा ही भाषण प्रतियोगिता और सामाजिक मुद्दों को लेकर आगे रहीं हूं।
समाज में बदलाव लाने की चाहत
मैं एक मजबूत दिल वाली हूं और हर हालात से लड़ सकती हूं। लेकिन मैं अपने दायरे को बढ़ाना चाहती थी। इस कारण मैंने संघ लोक सेवा आयोग में जाने की सोचा। जहां मुझे भारत के हर कोने को जानने का मौका मिलेगा। जैसे कोरोना वायरस ने जहां हर किसी को एक नाव में सवार कर दिया है, वहीं ऐसे लॉकडाउन के दौर में मेरा मानना है कि हमें उन लोगों को ही अपने पास रखना चाहिए जो आपको पॉजिटिव बनाए रखते हैं और कोई बुरा ख्याल नहीं आने देते। एक ऑफिसर बनने के बाद मैं लोगों की सेहत और सुरक्षा को मजबूत बनाउंगी।
टॉपर के टिप्स
दर्पण ने बताया कि एक डॉक्टर होने के नाते मैं चाहूंगी कि जो भी संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी में जुटे हैं और जिन्होंने इन परीक्षाओं की अभी तैयारी ही शुरू की है, उनको दिन में 5-6 घंटे ही पढ़ना चाहिए। उन सभी विद्यार्थियों को मेहनत करते रहना चाहिए जो गो विद फ्लो... का फंडा अपना रहे हैं। मैंने घुड़सवारी से सीखा है कि जैसे घोडे़ को ब्लाइंड फोल्ड पहनाया जाता है। वैसे ही हमें भी तैयारी करने के लिए हर समय फोकस करना चाहिए।