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बिलासपुर: बड़ी इलायची की खेती से चमकी किसान की किस्मत, एक बीघा जमीन में 3 क्विंटल तक पैदावार और 1,800 रुपये किलो दाम
Ankesh Dogra
Updated Sun, 18 Oct 2026 11:08 AM IST
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कम जमीन में बेहतर आमदनी कमाने की तलाश कर रहे किसानों के लिए बड़ी इलायची की खेती एक अच्छा विकल्प बन सकती है। बिलासपुर जिले के करोट गांव निवासी प्रेम लाल ठाकुर पिछले 20 वर्षों से बड़ी इलायची की खेती कर रहे हैं। करीब एक बीघा जमीन में वह हर साल दो से तीन क्विंटल तक बड़ी इलायची का उत्पादन कर रहे हैं। बाजार में इसके दाम 1,800 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिलने से यह खेती उनकी आमदनी का अच्छा साधन बनी हुई है।
प्रेम लाल ठाकुर की खेती उन किसानों के लिए भी मिसाल है, जो जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान और कम आमदनी के कारण खेती से दूरी बना रहे हैं। उनका कहना है कि बड़ी इलायची की खेती के लिए सबसे जरूरी पर्याप्त पानी की उपलब्धता है। जिन किसानों के पास नियमित सिंचाई की सुविधा है, वे अपने क्षेत्र की जलवायु और जमीन के अनुकूल इस फसल को अपनाने की संभावनाएं तलाश सकते हैं।
उन्होंने बताया कि बड़ी इलायची के पौधों को करीब तीन गुणा तीन फुट की दूरी पर लगाया जाता है। पर्याप्त पानी और उचित देखभाल से बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है। इस फसल की तुड़ाई सामान्य तौर पर नवंबर और दिसंबर में की जाती है। इसके बाद फलियों की सफाई, धुलाई और अच्छी तरह सुखाने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। सही तरीके से सुखाने और प्रसंस्करण से उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है, जिससे बाजार में बेहतर दाम मिलने की संभावना रहती है।
बड़ी इलायची की एक खासियत यह भी बताई जाती है कि जंगली जानवरों और पक्षियों से इसे सामान्यतः दूसरी फसलों की तुलना में कम नुकसान होता है। ऐसे में यह उन किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बन सकती है, जिन्हें अपनी फसलों को बचाने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
बड़ी इलायची का इस्तेमाल मसालों के साथ कुछ औषधीय उत्पादों में भी किया जाता है, जिसके कारण बाजार में इसकी मांग बनी रहती है। प्रेम लाल ठाकुर ने युवा पीढ़ी से खेती को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर के रूप में अपनाने की अपील की। उनका कहना है कि जमीन, जलवायु, पानी और बाजार को ध्यान में रखकर फसल का चयन किया जाए, तो खेती से अच्छी आमदनी अर्जित की जा सकती है।
उपनिदेशक कृषि कुलभूषण धीमान ने कहा कि पर्याप्त पानी की सुविधा वाले किसान बड़ी इलायची की खेती से अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर सकते हैं। जंगली जानवरों और पक्षियों से फसल को सामान्यतः कम नुकसान होना भी इसकी विशेषता है।
उन्होंने कहा कि कृषि विभाग प्रेम लाल ठाकुर के अनुभव का लाभ लेकर अन्य किसानों को भी बड़ी इलायची की खेती से जोड़ने का प्रयास करेगा। इसका उद्देश्य किसानों के लिए आमदनी के अतिरिक्त साधन विकसित करना है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए गेहूं, मक्का, जौ, हल्दी और अदरक जैसी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य भी उपलब्ध करवा रही है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना है।
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