चंद्रयान-2 की सफल लैंडिंग के लिए मंदिरों में होती रही पूजा, लेकिन चांद की दहलीज पर जाकर संपर्क टूटा
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चंद्रयान-2 की सफलता के लिए काशी के मंदिरों में पूजा-अनुष्ठान का दौर जारी है। शुक्रवार से सभी शहर के सभी प्रमुख मंदिरों में शुक्रवार की सुबह से देर रात तक पूजन, यज्ञ और अनुष्ठान चलते रहे। वहीं आपको बता दें कि चंद्रयान-2 3.84 लाख किमी का सफर तय कर शनिवार रात 1:55 बजे चांद के करीब पहुंचा, लेकिन 1.55 बजे चंद्रयान का संपर्क टूट गया।
वहीं पाणिनी कन्या महाविद्यालय में भी छात्राओं ने वैदिक मंत्रों के साथ चंद्रयान-2 की सफलता की कामना की। छात्राओं ने भगवान से प्रार्थना की कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान सफलता पूर्वक उतरे और देश के इतिहास में एक नया अध्याय दर्ज हो।
टूटा संपर्क :
चंद्रयान-2 लांचिंग के बाद 48 दिन में 3.84 लाख किमी का सफर तय कर रात 1:55 बजे चांद से बिल्कुल करीब तक पहुंच गया। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम’ के उतरने की सारी प्रक्रिया सामान्य थी। 35 किमी ऊपर से सतह पर उतरने की प्रक्रिया का काउंटडाउन 1:38 बजे शुरू हुआ। 13 मिनट 48 सेकंड तक सब कुछ सही चला। तालियां भी गूंजी, मगर आखिरी के डेढ़ मिनट पहले जब विक्रम 2.1 किमी ऊपर था, तभी करीब 1:55 बजे उसका इसरो से संपर्क टूट गया।
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यह स्थिति करीब 12 मिनट तक रही। करीब 2:07 बजे वैज्ञानिकों ने बताया कि संपर्क बहाल करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, 2.18 बजे इसरो प्रमुख के सिवन ने बताया, विक्रम से संपर्क टूट गया है। हम आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं।
शुक्रवार की रात्रि में अन्नपूर्णा मंदिर में वैदिक रीति से पूजन हुआ था। मंदिर के उप महंत शंकर पुरी के नेतृत्व में मंदिर के पुजारी अनिल पांडेय के आचार्यत्व में 11 वैदिक ब्राह्मणों ने मां भगवती का कुमकुम पूजन किया। तत्पश्चात मां का विशेष शृंगार करके चंद्रयान-2 की सफल लैंडिंग के लिए माता अन्नपूर्णा की विशेष आरती उतारी गई।
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ब्राह्मणों ने भगवती से प्रार्थना की कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-2 सफलता पूर्वक उतर जाए। उपमहंत शंकर पुरी ने कहा कि हमारे देश के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 को कई साल की मेहनत से तैयार किया है और आज उसकी सफल लैंडिंग हो तो देश इतिहास रचे। वहीं शहर के कई मंदिरों में भी पूजन-अनुष्ठान का दौर चलता रहा।