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वरुणा किनारे बस्तियों से पलायन
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Fri, 31 Jul 2015 02:08 AM IST
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पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश, राजस्थान में भीषण बारिश के चलते गंगा में आए उफान का असर वरुणा पर भी पड़ा है। काशी में गुरुवार की दोपहर वरुणा किनारे की बस्तियां बाढ़ से घिर गईं। चौबीस घंटे में एक मीटर बढ़ाव से वरुणा का पानी नक्खीघाट और सरैया बस्ती में घुस गया। आठ से अधिक घरों में पानी भरने से चूल्हा जलाने की भी सुरक्षित जगह नहीं बची। लोग बिस्तर, बर्तन समेटकर सुरक्षित स्थानों पर जान लगे हैं। केंद्रीय जल आयोग के अभियंताओं का कहना है कि अभी 18 घंटे से अधिक समय तक गंगा के जल दबाव से वरुणा में बढ़ाव होता रहेगा। यही हाल रहा तो तमाम परिवारों को घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
वरुणा किनारे जलाल बाबा मसजिद गुरुवार को बाढ़ के पानी से घिर गई। सरैया में वरुणा नदी पर बने रेलवे पुल से महज दो सौ मीटर पश्चिम तट पर ही बना सैयदा बीबी के घर में दोपहर बाद बाढ़ का पानी भर गया। वह अजुब सलातीन समेत अपने चार पुत्रों को लेकर किराए का मकान दिन भर ढूंढती रही लेकिन शाम तक सफलता नहीं मिली थी। सैयदा का परिवार फिलहाल बस्ती के मैदान में ही रात गुजारेगा। इसी तरह मुहम्मद इकबाल, कलाम और इस्माइल की भी गृहस्थी पर पानी पड़ गया है।
सरफराज के घर में तो घुटने भर पानी भर गया है। उसके परिजन बस्ती में ही रहने वाले रिश्तेदार शमशुद्दीन के घर पर अब शरण लेंगे। इसी तरह जैनुल आब्दीन के घर में जब पानी भरने लगा तब उसने दोपहर बाद ही अपनी बीवी परमीन बानों को पुत्र मोहम्मद शाहिद के साथ उसके मायके भेज दिया। अब वह अपनी बूढ़ी मां के साथ किराए का घर ढूंढ रहा है। जैनुल ने बताया कि घर मिलते ही वह शिफ्ट हो जाएगा, ताकि बाढ़ में गृहस्थी का सामान बचाया जा सके। ऐसी ही हालत अन्य प्रभावित परिवारों की है। बाढ़ से बस्ती घिरने के बाद ये सभी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हैं।
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वरुणा किनारे जलाल बाबा मसजिद गुरुवार को बाढ़ के पानी से घिर गई। सरैया में वरुणा नदी पर बने रेलवे पुल से महज दो सौ मीटर पश्चिम तट पर ही बना सैयदा बीबी के घर में दोपहर बाद बाढ़ का पानी भर गया। वह अजुब सलातीन समेत अपने चार पुत्रों को लेकर किराए का मकान दिन भर ढूंढती रही लेकिन शाम तक सफलता नहीं मिली थी। सैयदा का परिवार फिलहाल बस्ती के मैदान में ही रात गुजारेगा। इसी तरह मुहम्मद इकबाल, कलाम और इस्माइल की भी गृहस्थी पर पानी पड़ गया है।
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सरफराज के घर में तो घुटने भर पानी भर गया है। उसके परिजन बस्ती में ही रहने वाले रिश्तेदार शमशुद्दीन के घर पर अब शरण लेंगे। इसी तरह जैनुल आब्दीन के घर में जब पानी भरने लगा तब उसने दोपहर बाद ही अपनी बीवी परमीन बानों को पुत्र मोहम्मद शाहिद के साथ उसके मायके भेज दिया। अब वह अपनी बूढ़ी मां के साथ किराए का घर ढूंढ रहा है। जैनुल ने बताया कि घर मिलते ही वह शिफ्ट हो जाएगा, ताकि बाढ़ में गृहस्थी का सामान बचाया जा सके। ऐसी ही हालत अन्य प्रभावित परिवारों की है। बाढ़ से बस्ती घिरने के बाद ये सभी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हैं।
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