वाराणसी: टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के सदस्य ललित के नाम पर जारी किया डाक टिकट, खुशी से झूम उठे परिजन
डाक टिकट पर अपनी फोटो देख ओलंपियन ललित खुशी से झूम उठे। डाक विभाग के पीएमजी ने ललित संग परिजनों को सम्मानित किया। पोस्टमास्टर जनरल ने कहा कि वाराणसी ही नहीं ललित ने देश का मान भी बढ़ाया है।
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टोक्यो ओलंपिक-2020 में कांस्य पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम के सदस्य ललित उपाध्याय सोमवार को डाक टिकट पर अपनी फोटो देख खुशी से झूम उठे। वाराणसी में डाक विभाग की ओर से सम्मान स्वरूप माई स्टैंप के तहत ही 12 डाक टिकट वाली शीट भेंट की गई। इस दौरान डाक विभाग के वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल ने न केवल ललित उपाध्याय बल्कि उनके परिजन(माता-पिता) और कोच को भी स्मृति चिह्न, अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया और हौसला बढ़ाया।
डाक विभाग की ओर से प्रधान डाकघर विश्वेश्वरगंज पर आयोजित कार्यक्रम में पोस्टमास्टर जनरल ने कहा कि वाराणसी की धरा साहित्य, कला, संस्कृति, शिक्षा, अध्यात्म के लिए ही नहीं जानी जाती बल्कि खेल के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के लिए जानी जाती है। टोक्यो ओलंपिक में तीन बार की चैंपियन जर्मनी को हराकर कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य रूप में ललित उपाध्याय ने वाराणसी ही नहीं, अपितु पूरे देश का मान बढ़ाया है।
यह भी एक खूबसूरत संयोग है कि मास्को ओलंपिक (1980) में भारतीय हॉकी टीम को गोल्ड मेडल जिताने में वाराणसी के ही मो. शाहिद ने अहम भूमिका निभाई थी और अब टोक्यो ओलंपिक में भी वाराणसी के ही ललित उपाध्याय ने हॉकी टीम को कांस्य मेडल जिताने में प्रमुख भूमिका निभाई। इस दौरान ललित ने अपने सम्मान से अभिभूत होकर डाक विभाग का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से वाराणसी और उत्तर प्रदेश में हॉकी का विकास हो रहा है, निश्चय ही अगले कुछ दिनों में यहां से और अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी निकलेंगे। पिता सतीश उपाध्याय ने कहा कि अच्छा लगता है जब लोग मुझे मेरे बेटे के नाम से पहचानते हैं। अब तो यही सपना है कि अगले ओलंपिक में भारतीय टीम गोल्ड जीतकर आए।