फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   varanasi administration did not find land for hajj house

वाराणसी में ख्वाब बना हज हाउस, 10 साल में जमीन तक नहीं ढूंढ पाए

Sat, 22 Jul 2017 06:04 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Sat, 22 Jul 2017 06:04 PM IST
विज्ञापन
varanasi administration did not find land for hajj house
सांस्कृतिक संकुल में अस्थायी हज हाउस बनकर तैयार - फोटो : अमर उजाला
कई निजाम बदले, पांच करोड़ खर्च, फिर भी स्थायी हज हाउस का ख्वाब पूरा नहीं हो पाया। बीते ग्यारह साल में कई सरकारें बदलीं, सबने स्थायी हज हाउस बनवाने का ख्वाब दिखाया, आश्वासनों के ढेर लगे लेकिन अब तक हज हाउस के लिए जमीन की तलाश तक पूरी न हो सकी।
विज्ञापन


हर साल करीब 50 लाख की लागत से अस्थायी हज हाउस तैयार होता है। इस अंदाज से पिछले दस साल में अब तब पांच करोड़ से अधिक रुपये खर्च हो चुके हैं। इस बार भी चौकाघाट स्थित सांस्कृतिक संकुल में अस्थायी हज हाउस बनकर तैयार है जहां से 24 जुलाई को काबा के लिए उड़ान शुरू होनी है। 
विज्ञापन


साल 2007 से पूर्वांचल के 16 जिलों के हज जाइरीन की हजयात्रा काशी से हो रही है और तकरीबन उसी साल से काशीवासी बनारस में स्थायी हज हाउस की मांग कर रहे हैं। उस वक्त बसपा की सरकार थी। निजामुद्दीन सिद्दीकी ने मुसलमानों को पूरा भरोसा दिलाया लेकिन कुछ नहीं हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


खुद को मुसलमानों की हितैषी बताने वाली सपा सरकार ने भी हज हाउस बनवाने का पूरा दम खम दिखाया। मास्टर हज ट्रेनर डॉ. अकबर अली कहते हैं कि हज मंत्री आजम खां ने तो बनारस में कई जगहों पर जमीन भी तलाशी लेकिन पांच साल गुजर गए वो तलाश पूरी नहीं हो सकी। 

हज ट्रेनर अदनान खां कहते हैं कि पहले तो फिर भी हज जाइरीन को सहूलियत थी जब सांस्कृतिक संकुल परिसर में मौजूद गौतम बुद्ध ट्रंड एंड एग्जीबिशन सेंटर को हज हाउस बनाया जाता था लेकिन आज आलम ये है कि इस सेंटर में एनडीआरएफ कार्यालय खुल गया है।

ऐसे में अब हज जाइरीन के लिए मैदान में ही टीन शेड में ठहरने के लिए हॉल बनाया जाता है। अस्थायी शौचालय से लेकर स्नानघर, इबादतगाह व मस्जिद सब टीन की शेड में। बारिश के मौसम में जाइरीन को यहां बड़ी मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं। ऐसे में स्थायी हज हाउस नहीं बनने से उनमें भी खासी नाराजगी रहती है। 

करीब दो बीघे जमीन की जरूरत

varanasi administration did not find land for hajj house
हर साल 50 लाख से अधिक खर्च आता है अस्थायी हज हाउस के निर्माण में - फोटो : अमर उजाला
अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन शकील अहमद बबलू ने कहा कि लखनऊ और गाजियाबाद के बाद काशी में अस्थाई हज हाउस बनाने की योजना थी लेकिन किसी कारणों से ऐसा नहीं हो सका।

उत्तर प्रदेश हज कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री आजम खान और मैने हज हाउस बनाने के लिए पांच जमीन देखी। नियमत: हज हाउस सरकारी जमीन पर ही बनता है। करीब दो बीघे जमीन की जरूरत है। साफ सुथरी जमीन न मिलने की वजह से हज हाउस नहीं बन पाया है। सभी जमीन में कोई न कोई विवाद था। अब भाजपा सरकार को यह काम करना है। स्थानीय प्रशासन को जमीन उपलब्ध करानी चाहिए। 

नगर निगम के चीफ  इंजीनियर कैलाश सिंह ने कहा कि अस्थायी हज हाउस को तैयार होने में तकरीबन 50 लाख रुपये खर्च होते हैं। दो वाटरप्रूफ पंडाल बनाए जाते हैं। 200 शौचालय, 150 स्नानघर, वजूखाना का निर्माण हर साल होता है। साफ-सफाई और चौबीस घंटे पानी और बिजली की व्यवस्था की जाती है। स्थायी हज हाउस होता तो हर साल का जो इतना रुपया खर्च होता है, इसे बचाया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed