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तालाब में डूब रहे भाई को बचाने कूदा भाई, दोनों की मौत
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 04 Apr 2017 07:12 PM IST
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करते थे सेना भर्ती की तैयारी, रिश्तेदारी में रुकने के बाद चले गए थे नहाने
- फोटो : demo
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वाराणसी-जौनपुर जिले की सीमा पर स्थित छोटी देवराई गांव के तालाब में डूबने से दो सगे भाइयों सदानंद (21) और गजानंद (18) की मौत हो गई। सूचना पाकर पहुंची चोलापुर थाने की पुलिस ने दोनों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। स्नातक उत्तीर्ण सदानंद और इंटरमीडिएट का छात्र गजानंद दोनों सेना भर्ती की तैयारी करते थे। दो सगे भाइयों की असामयिक मौत से पूरे इलाके के ग्रामीण गमगीन दिखे।
जौनपुर जिले के चंदवक थाना क्षेत्र के भैसा गांव निवासी किसान मोहन राजभर के चार बेटों में दूसरे नंबर का सदानंद और तीसरे नंबर का गजानंद सेना भर्ती के लिए रोजाना करीब के घोड़दौड़ गांव स्थित मैदान जाते थे। घोड़दौड़ के मैदान में भैसा, छोटी देवराई सहित आसपास के अन्य गांवों के लड़के भी आते हैं।
मोहन की रिश्तेदारी भैसा सेे सटे गांव चोलापुर थाना क्षेत्र के छोटी देवराई स्थित दूधनाथ राजभर के यहां थी। इस वजह से दौड़ और अभ्यास के बाद सदानंद और गजानंद या तो घर वापस लौट जाते थे या फिर दूधनाथ के यहां ठहर जाते थे। मंगलवार को दोनों भाई सेना भर्ती की तैयारी से खाली होकर दूधनाथ के घर रुक गए और 12 बजे के लगभग निकले तो वापस नहीं लौटे।
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लगभग दो घंटे बाद भी दोनों भाई नहीं लौटे तो चिंतित होकर दूधनाथ ने उनकी खोजबीन शुरू की। गांव में पता चला कि दोनों तालाब की ओर गए हुए हैं। दूधनाथ पहुंचे तो देखे कि तालाब किनारे दोनों भाई के कपड़े रखे हुए थे।
दूधनाथ ने शोर मचाया तो ग्रामीण भागकर मौके पर पहुंचे और लगभग आधा घंटे में दोनों भाई का शव निकाला गया। उधर, घटना की जानकारी पाकर मोहन, उनका बड़ा बेटा रामानंद और छोटा बेटा शिवानंद भी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के अनुसार एक भाई डूबने लगा होगा तो दूसरा उसे बचाने के प्रयास में डूब गया होगा।
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जौनपुर जिले के चंदवक थाना क्षेत्र के भैसा गांव निवासी किसान मोहन राजभर के चार बेटों में दूसरे नंबर का सदानंद और तीसरे नंबर का गजानंद सेना भर्ती के लिए रोजाना करीब के घोड़दौड़ गांव स्थित मैदान जाते थे। घोड़दौड़ के मैदान में भैसा, छोटी देवराई सहित आसपास के अन्य गांवों के लड़के भी आते हैं।
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मोहन की रिश्तेदारी भैसा सेे सटे गांव चोलापुर थाना क्षेत्र के छोटी देवराई स्थित दूधनाथ राजभर के यहां थी। इस वजह से दौड़ और अभ्यास के बाद सदानंद और गजानंद या तो घर वापस लौट जाते थे या फिर दूधनाथ के यहां ठहर जाते थे। मंगलवार को दोनों भाई सेना भर्ती की तैयारी से खाली होकर दूधनाथ के घर रुक गए और 12 बजे के लगभग निकले तो वापस नहीं लौटे।
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लगभग दो घंटे बाद भी दोनों भाई नहीं लौटे तो चिंतित होकर दूधनाथ ने उनकी खोजबीन शुरू की। गांव में पता चला कि दोनों तालाब की ओर गए हुए हैं। दूधनाथ पहुंचे तो देखे कि तालाब किनारे दोनों भाई के कपड़े रखे हुए थे।
दूधनाथ ने शोर मचाया तो ग्रामीण भागकर मौके पर पहुंचे और लगभग आधा घंटे में दोनों भाई का शव निकाला गया। उधर, घटना की जानकारी पाकर मोहन, उनका बड़ा बेटा रामानंद और छोटा बेटा शिवानंद भी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के अनुसार एक भाई डूबने लगा होगा तो दूसरा उसे बचाने के प्रयास में डूब गया होगा।
पहले पत्नी साथ छोड़ी और बुढ़ापे में बच्चे
छोटी देवराई स्थित तालाब के किनारे सदानंद और गजानंद की मौत से पिता मोहन और भाई रामानंद व शिवानंद का रो-रोकर बुरा हाल था। मोहन और उनके दोनों बेटों को संभालना ग्रामीणों के लिए मुश्किल हो रहा था। मोहन ने कहा कि कई साल पहले पत्नी साथ छोड़ दी गई थी और जब हमारे जाने की उम्र हुई तो जवान बेटों ने धोखा दे दिया। मोहन बार-बार यही रट रहे थे कि अब कैसे जियेंगे...। वहीं, गजानंद और सदानंद के साथ रोजाना घोड़दौड़ मैदान में सेना भर्ती की तैयारी करने वाले इलाके केे नवयुवक भी छोटी देवराई स्थित तालाब पहुंचे। दोनों भाईयों का जब सभी ने शव देखा तो फूट-फूट कर रोने लगे।