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Varanasi News: डोमरी के नमो उपवन में 3.17 लाख पौधरोपण का कल बनेगा वर्ल्ड रिकॉर्ड, विशाल शहरी वन का होगा विकास

Fri, 27 Feb 2026 02:45 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Fri, 27 Feb 2026 02:45 PM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी में शुक्रवार को प्रेसवार्ता कर मेयर अशोक तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि नगर निगम गंगा तट पर हरियाली की नई इबारत लिखेगा। एक मार्च को तीन लाख पौधे लगाए जाएंगे। 

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Three lakh saplings will be planted simultaneously in Kashi
मेयर अशोक कुमार तिवारी व नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक मार्च को डोमरी के नमो उपवन में 3,17,120 पौधरोपण का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनेगा। नमो घाट के सामने होने के कारण नमो उपवन व विश्वनाथ नाम फाइनल किया जाएगा। नगर निगम की ओर से सूजाबाद डोमरी क्षेत्र में एक विशाल ‘शहरी वन’ का विकास किया जा रहा है। ये जानकारी शुक्रवार को मेयर अशोक कुमार तिवारी ने दी।

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उन्होंने कहा कि सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में 350 बीघे में विकसित होने वाला वन शहर की आबोहवा को शुद्ध करेगा। साथ ही स्वावलंबन का नया मॉडल भी बनेगा। मियावाकी पद्धति और आधुनिक तकनीक के संगम से एक मार्च को यहां तीन लाख से अधिक पौधे लगाकर शहरी वन का शुभारंभ किया जाएगा। यह परियोजना न केवल गंगा के किनारों को मजबूती देगी, बल्कि शुद्ध ऑक्सीजन बैंक के रूप में कार्य करेगी।
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नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए मध्यप्रदेश की एमबीके नामक संस्था से समझौता किया गया है, जो तीसरे वर्ष से ही निगम को दो करोड़ रुपये देगी। वहीं सातवें वर्ष तक पहुंचते-पहुंचते सात करोड़ रुपये वार्षिक तक होने की संभावना है। यहां मियावाकी तकनीक के साथ-साथ औषधीय पौधों (आयुर्वेद) और फूलों की खेती का भी अनूठा संगम देखने को मिलेगा। यह केवल एक बगीचा नहीं, बल्कि एक आत्मनिर्भर इको-सिस्टम है। यहां मियावाकी वन के साथ-साथ फलों के बाग, आयुर्वेद की खेती और फूलों की खेती का अद्भुत समन्वय है।
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सात करोड़ राजस्व की प्राप्ति, पांच वर्षों में 19.80 करोड़ की आय
इस वन में बांस, कचनार, महुआ, और हरसिंगार जैसे कुल 27 प्रकार के देशी पेड़ शामिल हैं। आर्थिक लाभ-परियोजना के तीसरे वर्ष आम, अमरूद, पपीता, अनार जैसे फलदार पेड़ों और अश्वगंधा, शतावरी, गिलोय और एलोवेरा जैसे औषधीय पौधों तथा गुलाब, चमेली और पारिजात (हरसिंगार) के फूलों से राजस्व मिलना शुरू हो जाएगा। ऐसे में तीसरे वर्ष निगम को दो करोड़ रुपये मिलेगा। वहीं पांचवें वर्ष पांच करोड़, छठे वर्ष छह करोड़ तथा सातवें वर्ष तक सात करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इसके बाद हर साल सात करोड़ रुपये की आय होगी। पांच वर्षों में 19.80 करोड़ की आय होगी।

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प्रतिदिन तीन बार 45 मिनट सिंचाई का शेड्यूल

भीषण गर्मी (मार्च-जून) में पौधों की प्यास बुझाने के लिए सप्ताह में तीन बार 45 मिनट की विशेष सिंचाई का शेड्यूल तय किया गया है। सिंचाई के लिए यहां पांच बोरवेल स्थापित किए गए हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि भीषण गर्मी (मार्च-जून) के दौरान भी पौधों को सप्ताह में 3 बार उचित नमी मिलती रहे। पांच और बोरवेल लगाए जाएंगे।

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पौधा लगाने के लिए मौसम अनुकूल
मेयर ने कहा कि विशेषज्ञों के मुताबिक मार्च का प्रथम सप्ताह इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए सबसे अनुकूल है। इसके पीछे कई वैज्ञानिक और भौगोलिक कारण हैं। मानसून आने से पहले पौधों को रोपित करने से उनकी जड़ों को जमने का पूरा समय मिल जाता है, जिससे उनके जीवित रहने की दर (सरवाइवल रेट) काफी बढ़ जाती है।

मिट्टी का कटाव को रोकने में कारगर होंगी शीशम, अर्जुन

मिट्टी का कटाव गंगा तट पर स्थित होने के कारण यहां मिट्टी के कटाव का खतरा रहता है। बरसात से पहले फैली जड़ें मिट्टी को बांधकर कटाव रोकने में सुरक्षा चक्र का काम करेंगी। अप्रैल-मई की भीषण गर्मी शुरू होने से पहले पौधे नए वातावरण में ढल जाते हैं। यहां शीशम और अर्जुन जैसी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है, जो नदी किनारे के वातावरण और अस्थायी जलभराव को सहने में सक्षम हैं।

एक नजर में आंकड़े
  • आधुनिक सिंचाई : 360 रेन गन स्प्रिंकलर सिस्टम
  • सिंचाई नेटवर्क 10827 मीटर पाइपलाइन और 10 बोरवेल
  • चार किलोमीटर पाथवे
  • कुल अनुमानित आय : 19.80 करोड़ रुपये (5 वर्षों में)

छायादार और वन प्रजातियां शीशम : 35,171
  • सागौन: 14,371
  • अर्जुन: 13,671
  • सप्तपर्णी: 13,071
  • बांस: 12,371
  • पीपल: 11,421
  • महुआ : 10,771
  • शीशम (हाइब्रिड) : 14,071
  • महोगनी : 11,021
  • बकैन : 9,971
  • चिलबिल : 8,371
  • कैजुराइना/झाऊ : 7,371
  • चितवन : 6,071

फलदार वृक्ष

  • अमरूद: 24,121
  • आम: 19,421
  • अनार: 14,771
  • शहतूत: 12,771
  • नींबू: 10,371
  • करौंदा: 8,071
  • बेल: 3,971
 
फूलों वाले और सजावटी पौधे
  • कचनार: 11,771
  • चांदनी: 9,371
  • गुड़हल: 9,071
  • हरसिंगार/पारिजात: 7,771
  • बोतल ब्रश: 7,071
  • मनोकामिनी: 6,371
  • एलिका: 4,821
  • जंगल जलेबी: 7,022
  • कुल योग: 3,17,120
 
विदेश दौरे से लौटने के बाद काशी आ सकते हैं मुख्यमंत्री
नगर निगम की ओर से इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रण पत्र भेजा गया है। अब तक उनका प्रोटोकाल प्राप्त नहीं हुआ है। उम्मीद जताई जा रही है कि विदेश दौरे से लौटने पर मुख्यमंत्री काशी आ सकते हैं।
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