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वाराणसी के मुख्य न्यायिक कोर्ट की सख्ती टिप्पणी, ...तो हम अपनी शक्तियों का प्रयोग कर मुकदमा दर्ज कराने को बाध्य होंगे

Fri, 26 Feb 2021 12:22 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Fri, 26 Feb 2021 12:22 AM IST
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Strict comment by the Chief Judicial Court of Varanasi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

वाराणसी के विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने घोर लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई न किए जाने पर सख्त रुख अख्तियार किया है। चौक थाना क्षेत्र से अपहृत हुई युवती को बिना न्यायिक व प्रशासनिक आदेश के न्यायिक संरक्षण गृह में दाखिल किया गया था।

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इस मामले में विवेचक सुरेंद्र यादव व चौक थानाध्यक्ष आशुतोष तिवारी पर एसएसपी द्वारा कार्रवाई न किए जाने पर अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ समुचित धाराओं में मुकदमा नहीं दर्ज किया गया। नियमों का पालन न किए जाने पर न्यायालय अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए बाध्य होगी।
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अदालत ने इस आदेश को प्रमुख सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक लखनऊ और पुलिस महानिरीक्षक को भेजने का आदेश दिया है। इस मामले में सुनवाई के लिए 10 मार्च की तिथि नियत की गई है। वादी के अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी के आवेदन के बाद कोर्ट ने पिछली तिथि को एसएसपी के लिए आदेश जारी किया था।
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आदेश में कहा था कि चौक थाने के अपहरण के इस मामले में विवेचना में विवेचक द्वारा बरती गई लापरवाही और थानाध्यक्ष द्वारा अपने अधीनस्थ विवेचक पर प्रभावी नियंत्रण न होने के संबंध में विशेष जांच करवाकर 15 फरवरी तक कोर्ट में आख्या प्रस्तुत करें, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।

इस पर पुलिस उपाधीक्षक सुरक्षा द्वारा जांच कराई गई। जांच में दोनों पुलिस अधिकारी दोषी पाए गए। इसकी रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल की गई। इसके बाद कोर्ट ने पत्रावली के अवलोकन के बाद आदेश दिया।

 

दीपक मधोक सहित दो के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी
आयकर के एक पुराने मामले में विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने दीपक मधोक, उनकी पत्नी भारती मधोक और बेटे करन मधोक के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। मामले में सुनवाई की अगली तिथि 10 मार्च निर्धारित की गई है।

आय कर विभाग ने वर्ष 2013 में तीनों के खिलाफ अदालत में परिवाद दाखिल किया था। छह दिसंबर 2013 को हाईकोर्ट द्वारा कार्रवाई पर रोक लगा दी गई थी। इस लंबित प्रकरण में हाजिर होने के लिए अदालत द्वारा सम्मन जारी किया गया था।

गुरुवार को सुनवाई के दौरान दीपक मधोक की ओर से अदालत के समक्ष इस आशय का प्रार्थना पत्र दिया गया कि गलत तथ्यों के आधार पर आय कर विभाग द्वारा परिवाद दाखिल किया गया है। हाईकोर्ट द्वारा छह दिसंबर 2013 को कार्रवाई पर स्थगन आदेश पारित किया गया है जो आज तक प्रभावी है।

इस प्रकरण में हाईकोर्ट में दाखिल रिट याचिका भी अभी तक विचाराधीन है। अदालत ने पत्रावलियों के अवलोकन और दलीलों को सुनने के पश्चात अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट की एक नजीर का हवाला देते हुए कहा कि जिस मामलों में स्पष्ट रुप से यथास्थिति का आदेश नहीं बढ़ाया गया है, उन्हें छह माह बाद स्वत: समाप्त माना जाएगा। इस प्रकरण में हाईकोर्ट का कोई भी स्पष्ट आदेश स्थगन आदेश के बढ़ाए जाने के लिए प्रस्तुत नहीं किया गया है।

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