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अस्सी घाट पर संत मोरारी बापू की राम कथा आरंभ
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Sun, 22 Mar 2015 02:24 AM IST
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वाराणसी। नजरों से पांव चूम लूं या हाथों से छू लूं उसे/ तेरी पाकीजगी को देखकर दिल कशमकश में है...। गंगा तीरे अस्सी घाट के पास प्रख्यात संत मोरारी बापू ने शनिवार की शाम नौ दिनी रामकथा की यात्रा की शुरूआत इसी शेर से की। कहा कि काशी में विद्वता की बात करना नानी के आगे ननिहाल का बखान करने जैसा है। उन्होंने संतों की नगरी को नमन करते हुए भाव को ज्ञान से बड़ा करार दिया।
कथा स्थल पर मोरारा बापू 21 मिनट विलंब से पहुंचे लेकिन तबतक एक लाख स्क्वायर फीट में बना हैंगर स्टाइल वाला पंडाल खचाखच भर चुका था। जर्मनी, लंदन, अमेरिका के अलावा देश के कई शहरों से पांच हजार से अधिक भक्त कथा स्थल पर रास्ता पूछते पहुंचे थे। बापू ने कहा कि कथा वो नहीं चलाते बल्कि कथा उन्हें चला रही है। उनकी 16वीं शताब्दी में हुए तुलसी, कबीर, रैदास को याद किया। बताया कि
काशी में संत रैदास को केंद्र में रखकर राम कथा कहने का वादा किया था लेकिन वो धरा रह गया। चाहकर भी वो संकल्प अभी पूरा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने दोहराया कि जिंदगी ने दगा नहीं दिया तो दोबारा काशी में रामकथा संत रविदास को ही केंद्र में रखकर की जाएगी। इस पर पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इससे पहले दिन के 12:20 पर वो बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचे। वहां रामकथा प्रेमयज्ञ
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समिति के अध्यक्ष केशव जालान, अशोक अग्रवाल ने अगवानी की। कार से वो सीधे बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचे। इसके बाद संकट मोचन में उन्होंने शीश नवाया। फिर गंगा स्नान के बाद उन्होंने कथा आरंभ की। कथा का उद्घाटन कुंवर अनंत नारायण सिंह, सूबे के लोक निर्माण राज्य मंत्री सुरेंद्र पटेल, बीएचयू के वीसी जीसी त्रिपाठी, संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा, महापौर राम गोपाल मोहले ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया।स्वागत कृष्ण कुमार जालान ने किया।
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कथा स्थल पर मोरारा बापू 21 मिनट विलंब से पहुंचे लेकिन तबतक एक लाख स्क्वायर फीट में बना हैंगर स्टाइल वाला पंडाल खचाखच भर चुका था। जर्मनी, लंदन, अमेरिका के अलावा देश के कई शहरों से पांच हजार से अधिक भक्त कथा स्थल पर रास्ता पूछते पहुंचे थे। बापू ने कहा कि कथा वो नहीं चलाते बल्कि कथा उन्हें चला रही है। उनकी 16वीं शताब्दी में हुए तुलसी, कबीर, रैदास को याद किया। बताया कि
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काशी में संत रैदास को केंद्र में रखकर राम कथा कहने का वादा किया था लेकिन वो धरा रह गया। चाहकर भी वो संकल्प अभी पूरा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने दोहराया कि जिंदगी ने दगा नहीं दिया तो दोबारा काशी में रामकथा संत रविदास को ही केंद्र में रखकर की जाएगी। इस पर पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इससे पहले दिन के 12:20 पर वो बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचे। वहां रामकथा प्रेमयज्ञ
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समिति के अध्यक्ष केशव जालान, अशोक अग्रवाल ने अगवानी की। कार से वो सीधे बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचे। इसके बाद संकट मोचन में उन्होंने शीश नवाया। फिर गंगा स्नान के बाद उन्होंने कथा आरंभ की। कथा का उद्घाटन कुंवर अनंत नारायण सिंह, सूबे के लोक निर्माण राज्य मंत्री सुरेंद्र पटेल, बीएचयू के वीसी जीसी त्रिपाठी, संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा, महापौर राम गोपाल मोहले ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया।स्वागत कृष्ण कुमार जालान ने किया।