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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Sampurnanand Sanskrit University 1037 students received degrees from online courses in Varanasi

SSVV: संपूर्णानंद में पहली बार 1037 को मिलीं ऑनलाइन कोर्स की उपाधियां, पहले बैच में सबसे ज्यादा 495 सर्टिफिकेट

Thu, 27 Mar 2025 02:48 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Thu, 27 Mar 2025 02:48 PM IST
सार

Sampurnanand Sanskrit University : संपूर्णानंद में पहली बार 1037 छात्र- छात्राओं को ऑनलाइन कोर्स की उपाधियां मिलीं। इसमें त्रैमासिक के तीन बैच, छमाही के दो बैच और वार्षिक डिप्लोमा के एक बैच के उपाधिधारक शामिल थे। 

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Sampurnanand Sanskrit University 1037 students received degrees from online courses in Varanasi
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र के 22 कोर्स में 1037 छात्र-छात्राओं को उपाधियां दी गईं। मंच से 40 मेधावियों को उपाधियां मिलीं। ज्योतिष कुंडली विज्ञान, वास्तु विज्ञान, वेद, कर्मकांड, अर्चक, योग, दर्शन, वेदांत, पाली, प्राकृत, भाषा शिक्षण और व्याकरण, मंदिर प्रबंधन आदि में एक वर्षीय डिप्लोमा, छमाही, त्रैमासिक कोर्स के छात्र-छात्राओं, गृहणियों और नौकरीपेशा लोगों को उपाधियां दी गईं। इसमें त्रैमासिक के तीन बैच, छमाही के दो बैच और वार्षिक डिप्लोमा के एक बैच के उपाधिधारक शामिल थे। 

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पहले बैच में सबसे ज्यादा 495 सर्टिफिकेट
कुल 1037 उपाधियों के वितरण में सबसे ज्यादा संख्या पहले बैच में रही। इसमें 495 सर्टिफिकेट, दूसरे समूह से 306 और तीसरे समूह से 236 छात्र और छात्राओं को सर्टिफिकेट दिए गए। एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स में सबसे ज्यादा 393, इसके बाद त्रैमासिक में 315 और छमाही में 293 विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट दिया गया।

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संस्कृत ज्ञान और समर्पण की भाषा मेयर

पाणिनी भवन में आयोजित उपाधि वितरण समारोह व राष्ट्रीय संगोष्ठी में आए नई दिल्ली के लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. विष्णुपद महापात्र ने कहा कि स्कूलों और पाठशालाओं में संचालित पाठ्यक्रमों को भी ऑनलाइन किया जाए। विभिन्न ग्रंथों के मौलिक ग्रंथों का उपयोग ऑनलाइन माध्यमों से होना चाहिए। 

मेयर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि संस्कृत ज्ञान और समर्पण की भाषा है। अपने आसपास के वातावरण में संस्कृत-संस्कृति और संस्कार के अमृत सरोवर को स्थापित करें। काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. एके त्यागी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी संस्कृत को ही आधार बनाकर विश्व में स्थापित होने का मार्ग प्रशस्त किया गया है।

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