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कर्मचारियों और रिसर्च स्कॉलर की मिलीभगत से हुई जालसाजी
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में नियुक्ति पत्र के फर्जीवाड़े में विश्वविद्यालय के कर्मचारी और रिसर्च स्कॉलर की मिलीभगत सामने आ रही है। कार्रवाई का आलम यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन तीसरे दिन भी पुलिस के आने का इंतजार ही करता रह गया। तीन दिन बीतने के बाद भी पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई करना उचित नहीं समझा।
संस्कृत विश्वविद्यालय के व्याकरण विभाग में जालसाजों ने बकायदा 20 अभ्यर्थियों का बारी-बारी से साक्षात्कार लिया। फर्जी नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र तक जारी कर दिए। पैसे की पूरी डीलिंग भी यहीं पर बैठकर की गई है। इसके अलावा जालसाजों के फोन नंबर पर भी लगातार बात हुई। फिलहाल सभी मोबाइल नंबर बंद आ रहे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवालिया निशान उठ रहे हैं। बिना किसी विश्वविद्यालय कर्मचारी की मिलीभगत के परिसर में खुलेआम साक्षात्कार नहीं किया जा सकता था। वहीं पीड़ितों के पास जो तस्वीरें हैं, उनमें से एक विश्वविद्यालय का कर्मचारी और एक रिसर्च स्कॉलर का नाम सामने आ रहा है। विश्वविद्यालय की प्राक्टोरियल टीम अपने स्तर से इस मामले में जांच कर रही है। बता दें कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में लिपिक और चपरासी के पद पर नियुक्ति के लिए फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए। 20 अभ्यर्थियों से जालसाजों ने 5-5 लाख रुपये भी जमा करवा लिए। नियुक्ति नहीं होने पर जब जालसाजों पर दबाव बढ़ा तो उन्होंने एक-एक लाख रुपये की और मांग की। जालसाजों ने विश्वविद्यालय की फर्जी वेबसाइट बनाकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की तहरीर नाटी इमली चौकी पर दी गई है लेकिन पुलिस अभी तक इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। चीफ प्राक्टर प्रो. आशुतोष मिश्र ने बताया कि हम लोग पुलिस का इंतजार कर रहे हैं। अपने स्तर से हम लोगों ने छानबीन शुरू कर दी है। कुछ चेहरे चिह्नित किए गए हैं। पुलिस अगर नहीं पहुंचती है तो उच्चाधिकारियों से संपर्क किया जाएगा।
काशी विद्यापीठ ने जारी किया संदेश, जालसाजों से रहें दूर
वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने का मामला सामने आने के बाद महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। विश्वविद्यालय की वेबसाइट और परिसर में जालसाजों से दूर रहने के लिए संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर यह संदेश प्रसारित किया जा रहा है कि विश्वविद्यालय की एकमात्र वेबसाइट यही है। अगर कोई आपसे नियुक्ति, दाखिले या फिर किसी और मद में पैसे की मांग करता है तो तत्काल प्राक्टोरियल बोर्ड को सूचना दें। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के नंबर मौजूद हैं।
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संस्कृत विश्वविद्यालय के व्याकरण विभाग में जालसाजों ने बकायदा 20 अभ्यर्थियों का बारी-बारी से साक्षात्कार लिया। फर्जी नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र तक जारी कर दिए। पैसे की पूरी डीलिंग भी यहीं पर बैठकर की गई है। इसके अलावा जालसाजों के फोन नंबर पर भी लगातार बात हुई। फिलहाल सभी मोबाइल नंबर बंद आ रहे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवालिया निशान उठ रहे हैं। बिना किसी विश्वविद्यालय कर्मचारी की मिलीभगत के परिसर में खुलेआम साक्षात्कार नहीं किया जा सकता था। वहीं पीड़ितों के पास जो तस्वीरें हैं, उनमें से एक विश्वविद्यालय का कर्मचारी और एक रिसर्च स्कॉलर का नाम सामने आ रहा है। विश्वविद्यालय की प्राक्टोरियल टीम अपने स्तर से इस मामले में जांच कर रही है। बता दें कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में लिपिक और चपरासी के पद पर नियुक्ति के लिए फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए। 20 अभ्यर्थियों से जालसाजों ने 5-5 लाख रुपये भी जमा करवा लिए। नियुक्ति नहीं होने पर जब जालसाजों पर दबाव बढ़ा तो उन्होंने एक-एक लाख रुपये की और मांग की। जालसाजों ने विश्वविद्यालय की फर्जी वेबसाइट बनाकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की तहरीर नाटी इमली चौकी पर दी गई है लेकिन पुलिस अभी तक इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। चीफ प्राक्टर प्रो. आशुतोष मिश्र ने बताया कि हम लोग पुलिस का इंतजार कर रहे हैं। अपने स्तर से हम लोगों ने छानबीन शुरू कर दी है। कुछ चेहरे चिह्नित किए गए हैं। पुलिस अगर नहीं पहुंचती है तो उच्चाधिकारियों से संपर्क किया जाएगा।
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काशी विद्यापीठ ने जारी किया संदेश, जालसाजों से रहें दूर
वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने का मामला सामने आने के बाद महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। विश्वविद्यालय की वेबसाइट और परिसर में जालसाजों से दूर रहने के लिए संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर यह संदेश प्रसारित किया जा रहा है कि विश्वविद्यालय की एकमात्र वेबसाइट यही है। अगर कोई आपसे नियुक्ति, दाखिले या फिर किसी और मद में पैसे की मांग करता है तो तत्काल प्राक्टोरियल बोर्ड को सूचना दें। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के नंबर मौजूद हैं।
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