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प्रधानमंत्री आवास योजना: कागजी कोरम कर आवंटित हो रहा आवास!
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Fri, 07 Apr 2017 12:40 AM IST
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सूची की गोपनीयता का लाभ उठा रहे अफसर
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सरकार भले ही विकास योजनाओं में पारदर्शिता की बात करती हो लेकिन धरातल पर उसे लागू करने को लेकर अधिकारी तनिक भी गंभीर नहीं है। पीएम आवास योजना भी अधिकारियों व कर्मचारियों की मनमानी का शिकार हो गया है और अभी तक किसी भी गांव में पात्रता तय करने के लिए कोई खुली बैठक नहीं की गई है।
जबकि छह हजार से अधिक लाभार्थियों का चयन भी कर लिया गया है। सूची की गोपनीयता का लाभ अधिकारी उठा रहे हैं।
बलिया जिले में सालों से आवास योजनाओं में बड़े पैमाने पर धांधली की गई। इंदिरा आवास के अलावा, कांशीराम आवास, महामाया आवास, लोहिया आवास में हुई धांधली जगजाहिर है।
वर्तमान में संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना में भी मनमानी शुरु हो चुकी है। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री आवास को लेकर नियमों में काफी बदलाव किया गया है और सामाजिक आर्थिक गणना के आधार पर गरीबों को देने की व्यवस्था की गई। संबंधित गांवों के लाभार्थियों की सूची सीधे भारत सरकार की ओर से बीडीओ के लॉगिन पर भेजा जा रहा है जिसे निकालकर संबंधित बीडीओ की ओर गांव के सचिव को उपलब्ध कराया जाएगा और गांवों में खुली बैठक कराकर पात्रता का निर्धारण किया जाएगा।
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लेकिन हैरानी की बात है कि अधिकांश गांवों में खुली बैठक कागजों पर करा दी गई और पीएम आवास के लिए छह हजार से अधिक लाभार्थियों का चयन भी कर लिया गया। सूची सार्वजनिक नहीं होने के कारण लाभार्थियों को यह भी जानकारी नहीं हो पाती है कि सूची में उनका नाम है या नहीं।
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जबकि छह हजार से अधिक लाभार्थियों का चयन भी कर लिया गया है। सूची की गोपनीयता का लाभ अधिकारी उठा रहे हैं।
बलिया जिले में सालों से आवास योजनाओं में बड़े पैमाने पर धांधली की गई। इंदिरा आवास के अलावा, कांशीराम आवास, महामाया आवास, लोहिया आवास में हुई धांधली जगजाहिर है।
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वर्तमान में संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना में भी मनमानी शुरु हो चुकी है। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री आवास को लेकर नियमों में काफी बदलाव किया गया है और सामाजिक आर्थिक गणना के आधार पर गरीबों को देने की व्यवस्था की गई। संबंधित गांवों के लाभार्थियों की सूची सीधे भारत सरकार की ओर से बीडीओ के लॉगिन पर भेजा जा रहा है जिसे निकालकर संबंधित बीडीओ की ओर गांव के सचिव को उपलब्ध कराया जाएगा और गांवों में खुली बैठक कराकर पात्रता का निर्धारण किया जाएगा।
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लेकिन हैरानी की बात है कि अधिकांश गांवों में खुली बैठक कागजों पर करा दी गई और पीएम आवास के लिए छह हजार से अधिक लाभार्थियों का चयन भी कर लिया गया। सूची सार्वजनिक नहीं होने के कारण लाभार्थियों को यह भी जानकारी नहीं हो पाती है कि सूची में उनका नाम है या नहीं।