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कुदरत का कहर: बारिश में दीवार ढहने से ठेले पर सो रहे दंपती की मलबे में दबकर मौत, सुरक्षित स्थान पर गए थे
Tue, 25 Aug 2026 01:59 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Tue, 25 Aug 2026 01:59 PM IST
सार
वाराणसी में सोमवार की रात से मंगलवार तक बारिश का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान एक पुरानी दीवार गिरने से ठेले पर सो रहे दंपती की मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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मृतक दंपती की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चांदपुर इंडस्ट्रियल एरिया में उपडाकघर के पास मंगलवार सुबह पुरानी दीवार ढहने से ठेले पर सोए रवींद्र नाथ मिश्रा (60) और पत्नी प्रतिमा मिश्र (55) की मलबे में दबकर मौत हो गई। मंडुवाडीह पुलिस, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग और फायर ब्रिगेड ने शव को बाहर निकाला।
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झारखंड के डुमरिया के गढ़वा निवासी रवींद्र नाथ मिश्रा कैपकोन कंपनी में ऑपरेटर थे। कंपनी से कुछ ही दूरी पर राधेश्याम डोलिया के बंद पड़े कारखाने में रवींद्रनाथ, प्रतिमा, बेटा आनंद साथ रहते थे। अमूमन मकान की छत पर दंपती सोते थे। सोमवार रात भारी बारिश के कारण जर्जर मकान के बगल में ही खुले आसमान के नीचे तिरपाल डालकर ठेले पर सो गए। सुबह कारखाने की पुरानी दीवार भरभराकर ठेले पर ही गिर गई।
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सोते समय ईंट के मलबे में दंपती दब गए। नाइट ड्यूटी खत्म कर सुबह बेटा आनंद घर पहुंचा तो मकान में माता-पिता की खोजबीन शुरू की। बगल में मलबा गिरा देखा तो पिता का एक पैर ईंटों के बीच दिखाई दिया। आनंद ने तुरंत ईंट हटाते हुए पुलिस को सूचना दी।
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इंस्पेक्टर अजय राज वर्मा फोर्स के साथ पहुंचे और मलबे में दबे लोगों को एनडीआरएफ की सहायता से बाहर निकलवाया। बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने परीक्षण के दौरान दंपती की मौके पर ही मौत की पुष्टि की। चांदपुर चौराहे पर दिन में आनंद बाटी चोखे का ठेला भी लगाता था।
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जर्जर भवन से बचने के लिए सुरक्षित स्थान पर गए थे राधेश्याम
कारखाना काफी पहले बंद हो गया था और भवन पूरी तरह जर्जर था। मालिक ने दंपती को पहले ही जगह खाली करने को कहा था। जर्जर भवन के कारण ही दंपती ने सोचा कि बारिश में कहीं मकान गिर न जाए। इसलिए दोनों पास में ही ठेले पर ही सो गए। बारिश में जर्जर मकान तो नहीं ढहा, लेकिन बगल में बंद पड़े कारखाने की दीवार ही दंपती के ऊपर गिर गई। हफ्ते भर पहले प्रतिमा गांव से लौटी थीं। सहायक पुलिस आयुक्त रोहनिया अवधेश विश्वकर्मा, मंडुवाडीह प्रभारी निरीक्षक अजय राज वर्मा ने लोगों से जानकारी ली।
बहू को मायके से विदा करने के बाद आई थी प्रतिमा
एसीपी रोहनिया अवधेश विश्वकर्मा ने बताया कि प्रतिमा के दो पुत्र हैं। सुधीर बिहार के मुंगेर में किसी रेस्टोरेंट में मैनेजर है, जबकि दूसरा पुत्र आनंद चांदपुर मार्ग पर बाटी-चोखा की दुकान लगाता है। पिता की कंपनी में नाइट ड्यूटी भी करता है। बेटे की शादी होने के बाद बहू को मायके से विदा करने के बाद ही सास वाराणसी पहुंची थी। बिहार के मुंगेर से बड़ा बेटा और अन्य रिश्तेदार भी घटनास्थल पर पहुंच गए।
कारखाना काफी पहले बंद हो गया था और भवन पूरी तरह जर्जर था। मालिक ने दंपती को पहले ही जगह खाली करने को कहा था। जर्जर भवन के कारण ही दंपती ने सोचा कि बारिश में कहीं मकान गिर न जाए। इसलिए दोनों पास में ही ठेले पर ही सो गए। बारिश में जर्जर मकान तो नहीं ढहा, लेकिन बगल में बंद पड़े कारखाने की दीवार ही दंपती के ऊपर गिर गई। हफ्ते भर पहले प्रतिमा गांव से लौटी थीं। सहायक पुलिस आयुक्त रोहनिया अवधेश विश्वकर्मा, मंडुवाडीह प्रभारी निरीक्षक अजय राज वर्मा ने लोगों से जानकारी ली।
बहू को मायके से विदा करने के बाद आई थी प्रतिमा
एसीपी रोहनिया अवधेश विश्वकर्मा ने बताया कि प्रतिमा के दो पुत्र हैं। सुधीर बिहार के मुंगेर में किसी रेस्टोरेंट में मैनेजर है, जबकि दूसरा पुत्र आनंद चांदपुर मार्ग पर बाटी-चोखा की दुकान लगाता है। पिता की कंपनी में नाइट ड्यूटी भी करता है। बेटे की शादी होने के बाद बहू को मायके से विदा करने के बाद ही सास वाराणसी पहुंची थी। बिहार के मुंगेर से बड़ा बेटा और अन्य रिश्तेदार भी घटनास्थल पर पहुंच गए।
पत्नी के चेहरे को हाथों से ढके रहे राधेश्याम
आसपास के लोगों ने और पुलिस ने मलबा हटवाया तो राधेश्याम और प्रतिमा का शव दिखा। ईंट गिरने के दौरान राधेश्याम ने पत्नी को बचाने के लिए अपना एक हाथ उसके चेहरे पर रखा था। ताकि पत्नी को चोट न आए। भोर में दीवार गिरी तो दोनों को संभलने का मौका नहीं मिला। शव देखकर लोगों की जुबान से यही निकला कि सावन में दंपती एक साथ दुनिया छोड़ गए।
उप डाकघर के जर्जर हाल को देख एसीपी ने कर्मियों को फटकारा
उपडाकघर के पास घटना पर पहुंचे एसीपी रोहनिया अवधेश विश्वकर्मा ने जर्जर हाल में डाकघर देखा तो कर्मचारियों से पूछताछ की। मालूम चला कि भवन गिराने के आदेश के बावजूद संचालित हो रहा तो एसीपी ने डाक कर्मियों को तुरंत फटकारा। कर्मियों ने बताया कि मुख्यालय स्तर से इसकी प्रक्रिया चल रही है।
आसपास के लोगों ने और पुलिस ने मलबा हटवाया तो राधेश्याम और प्रतिमा का शव दिखा। ईंट गिरने के दौरान राधेश्याम ने पत्नी को बचाने के लिए अपना एक हाथ उसके चेहरे पर रखा था। ताकि पत्नी को चोट न आए। भोर में दीवार गिरी तो दोनों को संभलने का मौका नहीं मिला। शव देखकर लोगों की जुबान से यही निकला कि सावन में दंपती एक साथ दुनिया छोड़ गए।
उप डाकघर के जर्जर हाल को देख एसीपी ने कर्मियों को फटकारा
उपडाकघर के पास घटना पर पहुंचे एसीपी रोहनिया अवधेश विश्वकर्मा ने जर्जर हाल में डाकघर देखा तो कर्मचारियों से पूछताछ की। मालूम चला कि भवन गिराने के आदेश के बावजूद संचालित हो रहा तो एसीपी ने डाक कर्मियों को तुरंत फटकारा। कर्मियों ने बताया कि मुख्यालय स्तर से इसकी प्रक्रिया चल रही है।